डेब्यू से पहले ही क्रिकेट जगत में नाम कमा चुके थे सचिन, दिलीप वेंगसरकर ने सुनाया किस्सा
नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने सचिन तेंदुलकर से जुड़ा एक मजेदार किस्सा शेयर किया है। हर कोई जानता है कि सचिन ने 16 की कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। उन्होंने पहला मैच 15 नवंबर 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। डेब्यू करने के बाद सचिन ने विदेशी पिचों पर भी रनों की बाैछार की और क्रिकेट जगत में गहरी पहचान बनाई। लेकिन वेंगसरकर ने खुलासा किया है कि सचिन ने तो डेब्यू से पहले ही क्रिकेट जगत में नाम कमा लिया था। आखिर कैसे आइए जानें-
जब सचिन मुंबई के स्कूल क्रिकेट टूर्नामेंट्स में गेंदबाजों की जमकर धुनाई कर रहे थे तो उस समय वेंगसरकर भारतीय टीम के कप्तान थे। वेंगसरकर ने सचिन को पहली बार 1988 में देखा था जब भारतीय टीम मुंबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच के लिए प्रैक्टिस करने पहुंची थी। वेंगसरकर का यह करियर का 100वां टेस्ट मैच था।

4 दिग्गजों ने की थी 15 साल के सचिन को गेंदबाजी
वेंगसरकर ने एक बेवसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा, 'मैंने सचिन के बारे में सुना था, वो उस समय स्कूल टूर्नामेंट्स में बहुत सारे रन बनाता था। वो टूर्नामेंट 100 साल पुराने हैं और उन्होंने मुंबई के अलावा भारतीय टीम को कई सारे खिलाड़ी दिए हैं। मैं भारतीय टीम का कप्तान था। न्यूजीलैंड के खिलाफ भिड़ने से पहले हम वहां प्रैक्टिस कर रहे थे। हमारे कोच वासुदेव परांजपे सचिन से काफी प्रभावित थे और उन्होंने कहा था इस लड़के को देखना एकदम अलग टैलेंट है।' वेंगसरकर कहा, 'कोच वासुदेव उसे मैजान पर ले आए। मैं सचिन को नेट्स पर बल्लेबाजी करते हुए देखना चाहता था। ऐसे में मैंने कपिल देव, अरशद अयूब, मनिंदर सिंह, चेतन शर्मा से कहा कि वे सचिन को गेंदबाजी करें, लेकिन उन्होंने कहा कि 15 साल के लड़के को क्या गेंदबाजी करेंगे हम।'

फिर सचिन ने दिखाई अपनी बैटिंग
जब 4 दिग्गज गेंदबाजों ने सचिन को गेंदबाजी करने से मना किया तो फिर वेंगसरकर ने उनसे कहा कि वो सचिन को खेलता हुआ देखना चाहते हैं। वेंगसरकर ने आगे कहा, 'मेरे कहने के बाद सभी ने सचिन को गेंदबाजी की। लेकिन सचिन ने अपनी बैटिंग से हम सबरो काफी प्रभावित किया। उसने बेहतरीन बल्लेबाजी की।' वेंगसरकर ने बताया कि उन्होंने सचिन को मुंबई टीम में लाने के लिए चयन समिति की बैठक में बात की। उन्होंने कहा, 'उसी शाम को हमारी मुंबई टीम की चयन समिति की बैठक होनी थी। मैंने उसमें हिस्सा लिया। मैंने उन्हें सचिन के बारे में बताया। मैंने उन्हें बल्लेबाजी करते देखा है वो बेहतरीन हैं इसलिए सचिन को 15 सदस्यीय टीम में चुनना चाहिए।'

फिर सचिन को मिले माैके
वेंगसरकर ने कहा, 'मेरे कहने के बाद हालांकि चयनकर्ताओं का कहना था कि सचिन को अभी लाना जल्दबाजी होगी क्योंकि उसकी उम्र छोटी है, वो चोटिल हो सकता है जिसके जिम्मेदार फिर हम ठहराए जाएंगे। इसलिए कुछ दिन इंतजार करते हैं। फिर मैंने उनसे कहा कि आप उन्हें 15 सदस्यीय टीम में रखें ताकि वो टीम के साथ रहें।' वेंगसरकर ने कहा कि सचिन के सामने जैसे ही मौके आते गए वो उनको भुनाते गए और अगले साल भारतीय टीम के लिए चुने गए। उन्होंने कहा, 'दलीप ट्रॉफी में उन्होंने शतक जमाया, ईरानी ट्रॉफी में उन्होंने शतक जमाया। इसके बाद वो 1989 में पाकिस्तान गए। सचिन तेंदुलकर इस तरह से आए, बाकी इतिहास है।'
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