राष्ट्रमंडल खेल: उद्घाटन समारोह की झलकियां
नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों का उद्घाटन समारोह सभी पूर्व आलोचनाओं के बाद भी बेहद शानदार रहा। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम की सज-धज और कार्यक्रम सांस थामने वाले रहे। रविवार शाम को 7 बजे जब 19वें राष्ट्रमंडल खेलों का उद्घाटन समारोह शुरू हुआ तो र कोई बस सांस रोके देखता ही रहा। आयोजन खत्म होने के बाद कोई भी ऐसा नहीं था जो कार्यक्रम की सराहना किए बगैर रह सके। यहां पेश है उद्घाटन समारोह की कुछ झलकियां :
परेड में आस्ट्रेलिया से आगाज:
जैसे की इन खेलों की परंपरा रही है, झंडे के साथ परेड की शुरुआत आस्ट्रेलिया ने की। ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रमंडल खेलों का पिछला मेजबान था लिहाजा शुरूआत उसी से हुई। इसके बाद अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार सभी 70 देशों ने स्टेडियम में प्रवेश किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल सबसे अंत में आया।
इसके साथ ही पूरा स्टेडियम गुंजायमान हो गया। लोगों ने अपने चहेते खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत किया। यही नहीं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भी खिलाड़ियों के लिए तालियां बजाईं। इससे साफ होता है कि भारतीय खिलाड़ियों पर अच्छा प्रदर्शन करने का कितना दबाव है।
खास लोगों का संबोधन:
सबसे पहले आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने दर्शकों को संबोधित किया। कलमाडी के पूरे संबोधन में सबसे अच्छी बात यही दिखी कि- हमारा सपना सच हो रहा है, हम शानदार मेजबान साबित हो रहे हैं। जय हिन्द।
अब बारी सीजीएफ के अध्यक्ष माइकल फेनेल की थी। फेनेल ने कलमाडी का नाम खास तौर पर जोर देकर लिया। इस पर दर्शकों ने खूब शोर मचाया। फेनेल ने यह भी कहा कि भारत बेहतरीन मेजबान साबित हो रहा है। हमें राष्ट्रमंडल खेल की भावना को जिन्दा रखना होगा।
इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संबोधित किया। उनके पहले शब्द थे: भारत में आपका स्वागत है। इन खेलों में आपका स्वागत है। भारत के लोग इन खेलों के लिए ऐतिहासिक शहर दिल्ली में आपका स्वागत करते हैं। मैं अपने देशवासियों के माध्यम से सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत करता हूं।
मैं चाहता हूं कि हम साथ मिलकर पूरी दुनिया को भारत में हो रहे इस आयोजन में शामिल करें। अगले दो सप्ताह तक हम खेलों के महान उत्सव का जश्न मनाएंगे। इसमें हमें खेल और खेल भावना का शानदार समागम देखने को मिलेगा। यही राष्टमंडल का उद्देश्य है। हम चाहते हैं कि पूरी दुनिया में एकता और भाईचारा फैले।
स्टेडियम में बैटन का प्रवेश:
इसके बाद स्टेडियम में बैटन का प्रवेश होता है। 190, 000 किलोमीटर की यात्रा के बाद नेहरू स्टेडियम पहुंची इस बैटन को लेकर सबसे पहले मुक्केबाज विजेन्दर नजर आए। स्टेडियम में लाने के बाद विजेन्दर ने इसे 5 बार की मुक्केबाजी चैम्पियन एमसी मैरीकाम को सौंपा।
मैरीकाम ने विश्व निशानेबाजी चैम्पियन और मेलबर्न खेलों के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी समरेश जंग को बैटन सौंपा। सबसे आखिर में बारी पहलवान विश्व चैम्पियन सुशील कुमार की थी। सुशील ने इस बैटन को राजकुमार चार्ल्स को सौंपा। सुशील से बैटन लेने के बाद चार्ल्स ने दर्शको को संबोधित किया और फिर महारानी एलिजाबेथ का संदेश पढ़ा। भारतीय समयानुसार 8.50 बजे चार्ल्स ने कहा- मैं खेलों को शुरू करने की घोषणा करता हूं।
अब बारी भारतीय राष्ट्रपति की थी। राष्ट्रपति ने कहा: मैं आज सभी देशों को अपनी शुभकामनाएं देती हूं। मुझे उम्मीद है कि खिलाड़ी इसमें पूरे जोश के साथ हिस्सा लेंगे और दर्शक उनके शानदार परदर्शन पर उत्साह बढ़ाएंगे। इसी के साथ मैं इन खेलों के शुरू होने की घोषण करती हूं।
'लेट्स द गेम्स बिगिन'
राष्ट्रपति की इसी घोषणा के साथ स्टेडियम एक बार फिर आतिशबाजी से नहा उठा। इसके बाद सेना के बैंड का प्रदर्शन हुआ। बैंड की मधुर धुनों के बीच सभी देशों का झंडा लिए स्वयंसेवक स्टेडियम में प्रवेश करते हैं। इनके हाथों से सीजीएफ का झंडा लाया जाता है और स्टेडियम के एक कोने में स्थित स्टैंड पर लगा दिया जाता है।
सीजीएफ का झंडा लगने के बाद ओलंपिक में स्वर्ण जीत चुके निशानेबाद अभिनव बिंद्रा ने शपथ लिया। इसके बाद 'ट्री ऑफ नॉलेज' पेश किया गया। उसके बाद योग बॉडी माइंड एंड सोल, फिर भारतीय रेलवे द्वारा प्रस्तुत ग्रेट इंडियन जर्नी और फिर महात्मा गांधी पर एक खास झांकी-गांधी पेश किया गया। गांधी को याद करने के बाद सेलीब्रेशन की बारी आई, जिसमें अनेकों कलाकारों ने रंगारंग नृत्य पेश किया। यह कार्यक्रम बेहद मनोरम दृश्य पेश कर रहा था।
परेड में आस्ट्रेलिया से आगाज:
जैसे की इन खेलों की परंपरा रही है, झंडे के साथ परेड की शुरुआत आस्ट्रेलिया ने की। ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रमंडल खेलों का पिछला मेजबान था लिहाजा शुरूआत उसी से हुई। इसके बाद अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार सभी 70 देशों ने स्टेडियम में प्रवेश किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल सबसे अंत में आया।
इसके साथ ही पूरा स्टेडियम गुंजायमान हो गया। लोगों ने अपने चहेते खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत किया। यही नहीं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भी खिलाड़ियों के लिए तालियां बजाईं। इससे साफ होता है कि भारतीय खिलाड़ियों पर अच्छा प्रदर्शन करने का कितना दबाव है।
खास लोगों का संबोधन:
सबसे पहले आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने दर्शकों को संबोधित किया। कलमाडी के पूरे संबोधन में सबसे अच्छी बात यही दिखी कि- हमारा सपना सच हो रहा है, हम शानदार मेजबान साबित हो रहे हैं। जय हिन्द।
अब बारी सीजीएफ के अध्यक्ष माइकल फेनेल की थी। फेनेल ने कलमाडी का नाम खास तौर पर जोर देकर लिया। इस पर दर्शकों ने खूब शोर मचाया। फेनेल ने यह भी कहा कि भारत बेहतरीन मेजबान साबित हो रहा है। हमें राष्ट्रमंडल खेल की भावना को जिन्दा रखना होगा।
इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संबोधित किया। उनके पहले शब्द थे: भारत में आपका स्वागत है। इन खेलों में आपका स्वागत है। भारत के लोग इन खेलों के लिए ऐतिहासिक शहर दिल्ली में आपका स्वागत करते हैं। मैं अपने देशवासियों के माध्यम से सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत करता हूं।
मैं चाहता हूं कि हम साथ मिलकर पूरी दुनिया को भारत में हो रहे इस आयोजन में शामिल करें। अगले दो सप्ताह तक हम खेलों के महान उत्सव का जश्न मनाएंगे। इसमें हमें खेल और खेल भावना का शानदार समागम देखने को मिलेगा। यही राष्टमंडल का उद्देश्य है। हम चाहते हैं कि पूरी दुनिया में एकता और भाईचारा फैले।
स्टेडियम में बैटन का प्रवेश:
इसके बाद स्टेडियम में बैटन का प्रवेश होता है। 190, 000 किलोमीटर की यात्रा के बाद नेहरू स्टेडियम पहुंची इस बैटन को लेकर सबसे पहले मुक्केबाज विजेन्दर नजर आए। स्टेडियम में लाने के बाद विजेन्दर ने इसे 5 बार की मुक्केबाजी चैम्पियन एमसी मैरीकाम को सौंपा।
मैरीकाम ने विश्व निशानेबाजी चैम्पियन और मेलबर्न खेलों के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी समरेश जंग को बैटन सौंपा। सबसे आखिर में बारी पहलवान विश्व चैम्पियन सुशील कुमार की थी। सुशील ने इस बैटन को राजकुमार चार्ल्स को सौंपा। सुशील से बैटन लेने के बाद चार्ल्स ने दर्शको को संबोधित किया और फिर महारानी एलिजाबेथ का संदेश पढ़ा। भारतीय समयानुसार 8.50 बजे चार्ल्स ने कहा- मैं खेलों को शुरू करने की घोषणा करता हूं।
अब बारी भारतीय राष्ट्रपति की थी। राष्ट्रपति ने कहा: मैं आज सभी देशों को अपनी शुभकामनाएं देती हूं। मुझे उम्मीद है कि खिलाड़ी इसमें पूरे जोश के साथ हिस्सा लेंगे और दर्शक उनके शानदार परदर्शन पर उत्साह बढ़ाएंगे। इसी के साथ मैं इन खेलों के शुरू होने की घोषण करती हूं।
'लेट्स द गेम्स बिगिन'
राष्ट्रपति की इसी घोषणा के साथ स्टेडियम एक बार फिर आतिशबाजी से नहा उठा। इसके बाद सेना के बैंड का प्रदर्शन हुआ। बैंड की मधुर धुनों के बीच सभी देशों का झंडा लिए स्वयंसेवक स्टेडियम में प्रवेश करते हैं। इनके हाथों से सीजीएफ का झंडा लाया जाता है और स्टेडियम के एक कोने में स्थित स्टैंड पर लगा दिया जाता है।
सीजीएफ का झंडा लगने के बाद ओलंपिक में स्वर्ण जीत चुके निशानेबाद अभिनव बिंद्रा ने शपथ लिया। इसके बाद 'ट्री ऑफ नॉलेज' पेश किया गया। उसके बाद योग बॉडी माइंड एंड सोल, फिर भारतीय रेलवे द्वारा प्रस्तुत ग्रेट इंडियन जर्नी और फिर महात्मा गांधी पर एक खास झांकी-गांधी पेश किया गया। गांधी को याद करने के बाद सेलीब्रेशन की बारी आई, जिसमें अनेकों कलाकारों ने रंगारंग नृत्य पेश किया। यह कार्यक्रम बेहद मनोरम दृश्य पेश कर रहा था।
Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:22 [IST]
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