टीम में रहने का पैमाना खिलाड़ी का प्रदर्शनः पठान
भोपाल, 21 मार्चः भारतीय क्रिकेट टीम में एक बार फिर सीनियर खिलाडियों की जगह को लेकर छिड़ी बहस के बीच टीम के हरफन मौला खिलाड़ी इरफान पठान ने आज कहा कि टीम इंडिया की नुमाइंदगी करने का पैमाना प्रदर्शन ही होना चाहिए.
टाटा इंडिकाम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विजेताओं को पुरस्कृत करने यहां आए पठान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनका मानना है कि टीम में चयन का आधार प्रदर्शन होना चाहिए.
कप्तान धोनी की खुलकर प्रशंसा करते हुए पठान ने कहा कि खिलाड़ियों को समने और उनका मनोबल बढाने में धोनी का कोई सानी नहीं है. आस्ट्रेलिया में एक दिवसीय त्रिकोणीय क्रिकेट सीरीज में कंगारूओं के खिलाफ दूसरे फाइनल में मैच के अंतिम ओवर के लिए गेंद उन्हें थमाए जाने का जिक्र करते हुए इरफान ने कहा कि इससे उनकी हौसला अफजाई हुई और कप्तान के विश्वास को भी उन्होंने टूटने नहीं दिया.
पठान ने कहा कि इससे पहले ट्वेंटी-20 क्रिकेट विश्व कप में भी धोनी ने शानदार कप्तानी का परिचय दिया था. कप्तान अगर ठंडे दिमाग वाला हो और अपने खिलाडियों की खूबियों से बखूबी वाकिफ हो तो प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है.
इस प्रश्न पर कि बीच में एक हरफनमौला खिलाड़ी के रूप में गेंद और बल्ले दोनों में उनका प्रदर्शन डगमगाया था. इरफान ने कहा कि हर खिलाडी के जीवन में कभी न कभी ऐसा समय आता है.
गेंदबाजी उनका पहला शौक है और वह ईश्वर को धन्यवाद देते हैं कि वह अपनी पुरानी लय हॉसिल कर चुके हैं. बल्लेबाजी में भी उन्हें मजा आता है और उन्हें उम्मीद है कि टीम को जब भी जरूरत होगी उनका बल्ला भी खामोश नहीं रहेगा.
टाटा इंडिकाम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विजेताओं को पुरस्कृत करने यहां आए पठान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनका मानना है कि टीम में चयन का आधार प्रदर्शन होना चाहिए.
कप्तान धोनी की खुलकर प्रशंसा करते हुए पठान ने कहा कि खिलाड़ियों को समने और उनका मनोबल बढाने में धोनी का कोई सानी नहीं है. आस्ट्रेलिया में एक दिवसीय त्रिकोणीय क्रिकेट सीरीज में कंगारूओं के खिलाफ दूसरे फाइनल में मैच के अंतिम ओवर के लिए गेंद उन्हें थमाए जाने का जिक्र करते हुए इरफान ने कहा कि इससे उनकी हौसला अफजाई हुई और कप्तान के विश्वास को भी उन्होंने टूटने नहीं दिया.
पठान ने कहा कि इससे पहले ट्वेंटी-20 क्रिकेट विश्व कप में भी धोनी ने शानदार कप्तानी का परिचय दिया था. कप्तान अगर ठंडे दिमाग वाला हो और अपने खिलाडियों की खूबियों से बखूबी वाकिफ हो तो प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है.
इस प्रश्न पर कि बीच में एक हरफनमौला खिलाड़ी के रूप में गेंद और बल्ले दोनों में उनका प्रदर्शन डगमगाया था. इरफान ने कहा कि हर खिलाडी के जीवन में कभी न कभी ऐसा समय आता है.
गेंदबाजी उनका पहला शौक है और वह ईश्वर को धन्यवाद देते हैं कि वह अपनी पुरानी लय हॉसिल कर चुके हैं. बल्लेबाजी में भी उन्हें मजा आता है और उन्हें उम्मीद है कि टीम को जब भी जरूरत होगी उनका बल्ला भी खामोश नहीं रहेगा.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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