'धोनी जैसे खिलाड़ी 30-40 साल में एक पैदा होते हैं, उनकी जगह कोई नहीं ले सकता'
नई दिल्ली। भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री ने धोनी की तारीफों के पुल बांधे हैं। कोहली तीसरे वनडे मैच के बाद हुई प्रेस कांफ्रेस में पहले ही कह चुके हैं कि धोनी से ज्यादा क्रिकेट के लिए समर्पित कोई और खिलाड़ी नहीं है। धोनी ने इस सीरीज में जो काम किया है उसने आलोचकों के मुंह पर तो ताला जड़ा ही बल्कि कई युवाओं को एक दिनी फार्मेट की वो कला भी सीखा दी जो आज के क्रिकेट की सबसे महत्वपूर्ण है, वह है मैच फिनिश करने की कला। ऐसी कला के लिए दिमाग को शांत रखना सबसे जरूरी है। टेस्ट क्रिकेट में चेतेश्वर पुजारा भी ऐसी ही करते हुए देखे गए थे। किसी तपस्वी की तरह से बल्लेबाजी को कला को निखारने वाले इन बल्लेबाजों को युवा फॉलो कर रहे हैं जो क्रिकेट के लिए शानदार बात है।

'सचिन को नाराज होते देखा लेकिन धोनी को नहीं'
धोनी के बारे में एक तथ्य बड़ा चर्चित है कि चाहे वे जीरो पर आउट हो या शतक बनाए या फिर एडिलेड-मेलबर्न जैसी मैच जिताऊ पारियां खेल दे, उनकी भावभंगिमा एक सी रहती है, उनका चित्त एक सा रहता है। यह संतुलन ही दुनिया के सामने एक अद्वितीय मैच फिनिशर को पेश करता है। अब जब धोनी की हर ओर चर्चा हो रही है तो भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री ने कहा है उन्होंने सचिन तेंदुलकर को कई बार गुस्सा करते हुए देखा है लेकिन धोनी को आज तक एक बार भी गुस्सा होते हुए नहीं देखा। कोच शास्त्री के मुताबिक 40 साल में ऐसा खिलाड़ी एक ही बार आता है और उनकी जगह लेना किसी के लिए मुमकिन नहीं है। शास्त्री ने कहा, 'मैंने किसी इंसान को इतना शांत नहीं देखा है। मैंने कई बार सचिन को नाराज होते देखा लेकिन धोनी को नही।'
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धोनी ने 2011 के बाद से कोई इंटरव्यू नहीं दिया है
उन्होंने कहा, 'मैं भारतीयों से यही कहता हूं कि जब तक धोनी खेल रहे हैं, उसका मजा लो। वह संन्यास ले लेगा तो तो ऐसा खालीपन पैदा होगा जिसे भरना मुश्किल होगा।' जब शास्त्री से पूछा गया कि क्या ऋषभ पंत अगले 20 सालों में धोनी बन सकते हैं तो शास्त्री का जवाब था कि पंत में प्रतिभा है और धोनी पंत के हीरो हैं। पंत रोज धोनी का फोन करते हैं। टेस्ट सीरीज के दौरान भी उन्होंने पंत से बात की होगी। इसी दौरान शास्त्री ने कहा कि धोनी ने 2011 के बाद से कोई इंटरव्यू नहीं दिया है।

'मैन ऑफ द सीरीज' धोनी
बता दें कि धोनी ने सीरीज के तीनों मैच में अर्धशतक जड़े जिसमें दो मैचों में मैच जिताऊ नाबाद पारी खेली। उन्होंने सीरीज के तीन मैचों में कुल 193 औसत बनाए और इतना ही उनका औसत भी रहा क्योंकि वे एक ही बार आउट हुए थे। धोनी ने सिडनी में 51, एडिलेड में 55 नाबाद और मेलबर्न में 87 नाबाद रनों की पारियां खेली थी। वे इस सीरीज में 193 से औसत से बल्लेबाजी के साथ मैन ऑफ द सीरीज भी बने थे।
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