क्लार्क के अनुसार विश्वास करना मुश्किल है कि वह 40 साल के हो गये हैं। उनके बिना अब भारतीय टीम बदली हुई सी नजर आएगी क्योंकि मध्यक्रम में उनका स्थान पक्का था। खास बात है कि वह निरंतर अच्छा प्रदर्शन करते हुए कई पीढि़यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनें।
सचिन के रिकॉर्डों के बारे में क्लार्क का कहना है कि सौ शतक, वनडे और टेस्ट मैचों में रिकॉर्ड रन ये कुछ ऐसे रिकॉर्ड हैं जो कि शायद कभी नहीं टूटेंगे। गौर हो कि सचिन तेंदुलकर आज वानखेड़े स्टेडियम में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेल रहे हैं, जो कि उनका दो सौवां टेस्ट भी है। क्लार्क का कहना है कि सचिन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है उन्होने पच्चीस साल तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला।
यह ध्यान देने योग्य है कि सचिन की तुलना उनके समकालीन खिलाड़ी रिकी पोंटिंग और ब्रायन लारा से की जाती रही है। कई बार आस्ट्रेलियाई खिलाडि़यों ने लारा को सचिन से भी ज्यादा प्रभावशाली बल्लेबाज बताया।