
की थी जुबानी जंग
सचिन ने कहा, मैं वो मैच नहीं भूल सकता। विकेट एक बार फिर थोड़ा गीला था और उस पर बैटिंग आसान नहीं थी। विकेट में बहुत जीवंतता था। सचिन ने कहा, मैक्ग्रा ने जिस तरह से पहला ओवर फेंका, मैंने सौरव गांगुली से बात की और सलाह दी कि मैं मैक्ग्रा के खिलाफ जुबानी जंग करता हूं। मुझे अहसास हुआ कि हमें कुछ माइंड गेम खेलना होगा। मैंने उनसे कुछ शब्द कहे और इससे वह हैरान रह गए। मैंने साथ ही उनके खिलाफ शॉट खेलने भी शुरू कर दिए, हालांकि उनमें से कुछ बहुत खतरनाक भी थे।

इसलिए बनाई थी योजना
मास्टर ब्लास्टर ने खुलासा किया कि उन्होंने मैक्ग्रा को नाराज करने की योजना बनाई थी ताकि वह ऑफ स्टंप के बाहर गेंदें फेंकने के बजाय उनके शरीर पर फेंके। सचिन ने कहा, योजना उन्हें (मैक्ग्रा) को नाराज करने की थी ताकि वह मुझे आउट करने की कोशिश के बजाय मेरे शरीर पर आक्रमण करें। हम कई बार बीट भी हुए लेकिन हम साथ ही जहां चाहते थे वहां मैक्ग्रा को गेंद फिंकवाने में सफल रहे। मैंने 38 रनों की तेज पारी खेली और मैं खुश था मेरे रन जीत में काम आए।

काम कर गई योजना
सचिन की योजना काम कर गई और ऑस्ट्रेलिया को पहले 10 ओवरों में कोई विकेट नहीं मिला। भारत को पहला झटका 11.3 ओवर में 66 के स्कोर पर सचिन तेंदुलकर के रूप में लगा, जिन्होंने ब्रेट ली की गेंद पर आउट होने से पहले 37 गेंदों में तीन चौकों और तीन छक्कों की मदद से 38 रन बनाए। मैक्ग्रा उस मैच में 9 ओवर में 61 रन देने के बावजूद एक भी विकेट नहीं ले पाए। भारत ने अपना डेब्यू मैच खेल रहे युवराज सिंह की 80 गेंदों में 84 रन की पारी की मदद से पहले खेलते हुए 265/9 का स्कोर बनाया। धीमे ओवर रेट के कारण ऑस्ट्रेलियाई पारी के दो ओवर काटे गए थे और उसकी पूरी टीम 46.2 ओवरों में 245 पर सिमट गई और भारत 2 रन से जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंच गया था। भारत के लिए अजीत अगरकर, जहीर खान, और वेंकटेश प्रसाद ने दो-दो विकेट लिए थे।


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