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शोएब ने सचिन को डरपोक हालात के कारण कहा

बैंगलुरू। शोएब अख्तर ने अपनी जीवनी लिखी है जिसका नाम है 'कॉन्ट्रोवर्शली यॉर्स'। अख्तर ने अपनी किताब में लिखा है कि उनकी गेंदो से डरते थे सचिन तेंदुलकर। सचिन और द्रविड़ मैंच विनिंग खिलाड़ी नहीं है। जिसके बाद से भारत से लेकर पाकिस्तान तक उनके विरोध में आवजें उठ रही हैं। सब ने शोएब अख्तर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। यहां तक पाकिस्तान में भी उनके खिलाफ विगुल फूंक दिया गया है। लेकिन किसी ने ये जानने की कोशिश नहीं कि शोएब ने आखिर ऐसा कहा क्यों?

भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पर जब भी कोई बात करता है तो हंगामा तो ना जाते हुए भी हो जाता है। और शोएब ने तो सचिन का नाम ले लिया है। तो भला लोग कैसे शांत रह सकते थे। शोएब की बातों से एक दर्द का एहसास होता है, दर्द उस क्रिकेटर का जिसे मिलकर भी कुछ नहीं मिला। ना इज्जत, ना रूतबा और ना ही पैसा। जो वाकई में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

ये बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान में खिलाड़ियों की हालत बहुत अच्छी नहीं हैं। उन्हें हमेशा पैसों का अभाव रहता है। शोएब से पहले कई पाकिस्तानी खिलाड़ी मैच फिक्सिंग विवाद में सामने आये हैं। जिसके पीछे कारण यही बताया गया कि पाकिस्तानी क्रिकेटरों को पैसों का अभाव रहता है जिसके चलते वो इस घिनौने काम को अंजाम देते हैं।

अपनी किताब के विवाद पर जब शोएब से पूछा गया कि शोएब ने जो कुछ भी कहा कि उससे उनका दर्द पूरी तरह छलकता है। जनाब ने कहा कि उन्होंने अपनी किताब में अपने अनुभव लिखे हैं। इसलिए उनकी बात को तूल ना दिया जाये। मैं एक स्ट्रीट ब्वाय था, बड़ी मेहनत से मैनें क्रिकेट में पांव जमाया था, मुझे साढ़े पांच लाख रूपये सलाना मिलता था लेकिन मुझ पर पहला जब जुर्माना ठोंका गया तो साढ़े छह लाख का था। यानी कि मेरी औकात से ज्यादा। हमेशा मेरी गलती नहीं भी होती तो भी मुझे दोषी करार दे दिया जाता था। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान में क्रिकेटर की लाइफ क्रिकेट के बाद मिट्टी की तरह हो जाती है। यानी की उसे कोई पूछने वाला नहीं है।

ये बातें पाकिस्तान में खिलाड़ियों का हाल ए दिल बयां करने के लिए काफी है। यानी कि जब तक आप टीम में हैं तब तक हीरो और उसके बाद जीरो। जिसकी वजह से पाकिस्तानी युवा खिलाड़ी कुछ गलत तरीकों को अपनाने में नहीं गुरेज नहीं कर रहे हैं। शोएब अब टीम में नहीं हैं, उन्हें आईपीएल और काउंटी मैचों में भी खेलने का मौका नहीं मिला है और विज्ञापन जिनसे कि सारे क्रिकेटर्स रातों-रात करोड़पति बन जाते हैं वो भी उनके पास नहीं है।

ऐसे में उन्होने अपनी किताब जिसका नाम ही है 'कॉन्ट्रोवर्शली यॉर्स', लिखकर एक नया हंगामा पैदा कर दिया । आखिर इस किताब में शोएब के विचार है, वो किसी को बाध्य तो नहीं कर रहे हैं कि उनकी इस किताब को पढ़ो ही। मार्केट में किताब आयी है, चर्चा का विषय बनीं और अब यह तो पाठकों पर हैं कि वो इसे खरीदें ना खरीदें।

इस मु्द्दे पर सचिन तेंदुलकर की दाद देनी चाहिए। शायद गंभीरता ही उनकी महानता का कारण हैं। उन्होंने शोएब पर कोई टिप्पणी ना करके ये जता दिया कि वो महान और बड़े खिलाड़ी क्यों हैं? और इतने सालों से जो वो क्रिकेट खेल रहे हैं उसकी वजह क्या है? आखिर सचिन को किसी से भी कोई प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं हैं।

अगर शोएब, सचिन की तारीफ कर देते तो वो अच्छे हो जाते, आपका उत्तर होगा नहीं। तो सचिन के बारे में अपशब्द कह देने से सचिन गलत हो जायेगें। बिल्कुल नहीं। सचिन एक महान खिलाड़ी थे, हैं और रहेगें। शोएब जैसे लोग तो आते-जाते रहे हैं और आगे भी आते रहेगें।

लेकिन शोएब के इस बयान पर हल्ला मचाने के बजाय शोएब और पाकिस्तान टीम के हालात पर ध्यान देना होगा। शोएब को मानसिकं इलाज की अगर जरूरत है तो पाकिस्तानी खिलाड़ियों के अभावों पर भी ध्यान देने की जरूरत हैं। नहीं तो अपनी जीविका चलाने के लिए ये खिलाड़ी इसी तरह से ऊंट-पटांग बयान देते रहेगें। प्रश्न ये नहीं होना चाहिए कि शोएब ने सचिन को डरपोक कहा, बल्कि ये होना चाहिए कि उसने डरपोक क्यों कहा?

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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