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स्पेन पहली बार विश्व कप के फ़ाइनल में

पंकज प्रियदर्शी

बीबीसी संवाददाता, दक्षिण अफ़्रीका से

इस विश्व कप में अपना पहला मैच स्विट्ज़रलैंड के हाथों हार जाने वाली टीम फ़ाइनल तक पहुँचेगी, शायद ही किसी ने सोचा था. लेकिन सच यही है. स्पेन की टीम ने सारे आकलनों, सारी भविष्यवाणियों को झुठलाते हुए पहली बार विश्व कप के फ़ाइनल में जगह बना ली है.

दूसरी ओर ख़िताब जीतने की सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही जर्मनी की टीम एक बार फिर सेमी फ़ाइनल में हार कर बाहर हो गई. इस मैच में जर्मनी का पलड़ा भारी माना जा रहा था, लेकिन स्पेन ने दिखा दिया कि बेहतर तालमेल और गेंद पर ज़्यादा से ज़्यादा नियंत्रण रखने की कोशिश कितना अच्छा परिणाम दे सकती है.

मैच का नतीजा देखकर पहली नज़र में ऐसा लग सकता है कि मुक़ाबला तगड़ा हुआ होगा, लेकिन यहाँ भी सच यही है कि स्पेन ने जर्मनी को हर क्षेत्र में पीटा. डिफ़ेंस में, मिडफ़ील्ड में और आक्रमण में भी. कई बार तो ऐसा लग ही नहीं रहा था कि ये वही जर्मनी की टीम है, जिसने इंग्लैंड और अर्जेंटीना को इतने बड़े अंतर से मात दी थी.

मैच के शुरू से ही स्पेन की टीम आक्रमण कर रही थी और जर्मनी के स्टार खिलाड़ी सिर्फ़ देख रहे थे. क्लोज़ा नहीं चले, पोडोल्स्की नहीं चले, स्वाइंजटाइगर नहीं चले और कप्तान लाम भी नहीं चले. स्पेन की टीम का गेंद पर इतना बढ़िया नियंत्रण था कि जर्मन खिलाड़ियों की एक नहीं चल रही थी.

हाफ़ टाइम तक स्कोर बिना गोल के बराबर था. लेकिन पहले हाफ़ में स्पेन को दो-तीन बार गोल करने के अच्छे अवसर मिले. दूसरे हाफ़ में भी कमोबेश वही स्थिति रही, लेकिन इस बार स्पेन ने जर्मन गोल पर कई अच्छे आक्रमण किए.

नतीजा मैच के 73वें मिनट में निकला. ज़ावी के कॉर्नर पर पुइया का शानदार हेडर और फिर गोल. जर्मन हक्के-बक्के और उनके समर्थक भौंचक. लेकिन स्पेन को तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई. और फिर इसी अंतर पर जीत हासिल करके स्पेन ने पहली बार विश्व कप के फ़ाइनल में जगह बना ली. स्पेन के समर्थक तो उसी समय से जश्न मनाने लगे थे, जब स्पेन ने जर्मनी के ख़िलाफ़ गोल किया.

स्पेन समर्थकों की ख़ुशी समझी जा सकती थी और उनके पास उत्सव मनाने की वजह भी तो थी....पहली बार उनकी टीम फ़ाइनल में पहुँची है. समर्थकों को उम्मीद है कि उनकी टीम फ़ाइनल में भी अपना झंडा लहराएगी. स्पेन के समर्थकों का मानना है कि उनकी टीम ने दूसरे हाफ़ में अच्छी रणनीति अपनाई और जर्मनी की टीम उनके आगे टिक नहीं पाई..स्पेन ने क्लासिक खेल दिखाया और गेंद पर ज़्यादा नियंत्रण रखा.

जर्मनी के समर्थकों का कहना है कि टीम के पास दूरदृष्टि की कमी थी, उन्होंने सिर्फ़ डिफ़ेंस पर ध्यान दिया. स्पेन की टीम निश्चित रूप से बेहतर टीम थी. जर्मनी के कोच की रणनीति पर भी सवाल उठे हैं कि क्यों टीम इस मैच में बैक फ़ुट पर रही और फिर स्पेन को लगातार आगे बढ़ने का मौक़ा मिला.

एक समर्थक ने कहा, "स्पेन ने गेंद पर हमेशा नियंत्रण रखा. जर्मनी के पास कुछ नहीं था. क्लोज़ा नहीं चले, पोडोलस्की नहीं चले. स्पेन की टीम हर जगह नज़र आ रही थी, मिडफ़ील्ड में, डिफ़ेंस में और फ़ॉरवर्ड लाइन पर."

दक्षिण अफ़्रीकी की इस कड़कड़ाती सर्दी में भी स्पेन ने अपने समर्थकों के मन में उम्मीद की गरमी भर दी है. पूरा स्पेन जश्न में डूबा है, दक्षिण अफ़्रीका में उसके समर्थक उत्सव मना रहे हैं......लेकिन नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ फ़ाइनल तक शायद स्पेन के खिलाड़ी चैन की नींद नहीं सो पाए.

Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:23 [IST]
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