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क्या मोहम्मद शमी को 'बेवफ़ाई' की ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए?

क्या मोहम्मद शमी को 'बेवफ़ाई' की ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए?

पिछले दो दिन से भारतीय मीडिया में मोहम्मद शमी छाए हुए हैं लेकिन ग़लत वजहों से.

दो दिन पहले उनकी पत्नी हसीन जहां ने सोशल मीडिया पर कुछ स्क्रीनशॉट डाले जिनसे ये अंदाज़ा होता है कि शमी कुछ दूसरी महिलाओं से आपत्तिज़नक बातचीत कर रहे हैं.

इन स्क्रीनशॉट में वॉट्सऐप पर की गई बातचीत थी, जो बेहद निजी थीं. इसके अगले दिन उनकी पत्नी मीडिया में आ गईं, वो भी और ज़्यादा गंभीर आरोपों के साथ.

हसीन ने मीडिया से कहा, ''जो कुछ मैंने पोस्ट किया है, वो पूरी कहानी का हिस्सा भर है. उनके कई महिलाओं से रिश्ते हैं. परिवार में सभी मुझे टॉर्चर करते हैं. ये टॉर्चर सवेरे दो-तीन बजे तक चलता था. वो मुझे मारना भी चाहते थे.''

शमी ने दी सफ़ाई

क्या मोहम्मद शमी को 'बेवफ़ाई' की ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए?

अपनी सफ़ाई में शमी ने कहा कि ये सब साज़िश है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ''ये हमारी निजी ज़िंदगी के बारे में जितनी भी ख़बरें चल रही हैं, ये सब सरासर झूठ हैं. ये कोई बहुत बड़ी साज़िश है. मुझे बदनाम करने और मेरा खेल ख़राब करने कोशिश है.''

जब शमी की पत्नी टीवी चैनलों पर आरोप लगाती दिख रही थीं और शमी अपनी सफ़ाई पेश कर रहे थे, तब तक ये एक निजी मामला था लेकिन कुछ ही देर में इस कहानी ने एक और मोड़ ले लिया.

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सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से नियुक्त भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के लिए कमेटी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेटर्स (CoA) ने इत्तफ़ाक़ से बुधवार को ही अक्टूबर, 2017 से सितंबर, 2018 की अवधि के लिए खिलाड़ियों के सालाना अनुबंध घोषित किए.

लेकिन सभी को हैरत में डालते हुए इस पूरी लिस्ट में मोहम्मद शमी का नाम नहीं है. इस सूची में कुल 26 खिलाड़ी हैं लेकिन शमी नहीं हैं. इनमें से ए+ में पांच, ए-बी और सी श्रेणी में सात-सात खिलाड़ी शामिल हैं.

दोनों घटनाएं जुड़ी हुईं?

क्या मोहम्मद शमी को 'बेवफ़ाई' की ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए?

ज़ाहिर है जब ये ख़बर आई तो मीडिया ने लिस्ट से शमी का नाम ग़ायब होने और उनकी पत्नी की तरफ़ से लगाए गए गंभीर आरोपों को जोड़कर ख़बरें चलाना शुरू कर दिया. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने तब तक इस बारे में कुछ नहीं कहा था.

लेकिन बीबीसी से बातचीत में गुरुवार को इस बात की पुष्टि भी हो गई कि इन दोनों घटनाओं का आपस में वाक़ई लेना-देना है.

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बोर्ड में मीडिया एंड कम्युनिकेशंस प्रतिनिधि मौलिन पारिख से जब ये पूछा गया कि क्या मोहम्मद शमी को टीम से बाहर कर दिया गया है, तो उन्होंने कहा, ''मोहम्मद शमी को टीम के बाहर नहीं किया गया है. वो सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले खिलाड़ी हैं लेकिन उनका नाम अभी रोका गया है.''

क्या ये नाम रोकने की वजह शमी और उनकी पत्नी के बीच विवाद है, उन्होंने कहा, ''हां.'' लेकिन क्या मैदान में प्रदर्शन और निजी जीवन के विवादों का आपस में कोई लेना-देना है, ''जैसा कि मैंने कहा कि वो सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट हासिल खिलाड़ी हैं और उनका नाम सिर्फ़ रोका गया है. और ऐसा हालिया घटना की वजह से किया गया है.''

'बीसीसीआई आगे करेगा फ़ैसला'

क्या मोहम्मद शमी को 'बेवफ़ाई' की ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए?

लेकिन क्या पहले कभी किसी खिलाड़ी के साथ ऐसा किया गया है, पारिख ने कहा, ''क्या आपको अतीत में ऐसी कोई घटना याद आती है?''

मोहम्मद शमी का भविष्य क्या है, पारिख ने कहा, ''हम देख रहे हैं कि आगे क्या होता है. अगर सब ठीक होता है तो उनका नाम भी लिस्ट में शामिल कर दिया जाएगा.''

लेकिन क्या क्रिकेट बोर्ड ने शमी के ख़िलाफ़ कोई जांच बैठाई है, उन्होंने कहा, ''इस मामले में बोर्ड कोई जांच नहीं करा सकता. ये एक पारिवारिक मामला है और पति-पत्नी के बीच है इसलिए हम इस मामले पर निगाह रखे हुए हैं.''

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लेकिन जब बोर्ड ख़ुद कोई जांच ही नहीं करा रहा तो इस फ़ैसले पर कब और कैसे पहुंचा जाएगा कि शमी पर लगे आरोप सही या ग़लत हैं, पारिख ने कहा, ''जब ये साफ़ हो जाएगा कि उन पर लगे आरोप सही नहीं हैं तो उनका नाम क्लीयर कर दिया जाएगा.''

अब आगे क्या होगा?

क्या मोहम्मद शमी को 'बेवफ़ाई' की ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए?

पत्नी की तरफ़ से आरोप लगाए जाने से पहले ये उम्मीद की जा रही थी कि शमी को ग्रेड ए या बी कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा. अगर ऐसा होता तो वो पांच या तीन करोड़ रुपए के साथ रीटेनर होते.

वेबसाइट क्रिकइंफ़ो के मुताबिक सीओए के चेयरमैन विनोद राय के मुताबिक लिस्ट में शमी का नाम शामिल करने को लेकर बोर्ड ख़ुद फंसा हुआ महसूस कर रहा था.

उन्होंने कहा, ''आम तौर पर आप इसे अलग तरह से देखते और कहते कि ये एक व्यक्तिगत मुद्दा है और अनुबंध प्रोफ़ेशनल मामला है. लेकिन दूसरी तरफ़ आसानी से ये भी कहा जा सकता है कि आरोप काफ़ी गंभीर हैं और फिर भी उन्हें रिवार्ड किया जा रहा है.''

मोहम्मद शमी का इस तरह विवादों में फंसना और इस विवाद का उनके खेल पर असर पड़ना वाक़ई दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि वो भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह से सजी भारतीय पेस बैटरी का अहम हिस्सा बन गए थे.

टेस्ट मैच में बढ़िया प्रदर्शन

क्या मोहम्मद शमी को 'बेवफ़ाई' की ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए?

हाल में दक्षिण अफ़्रीका में खेले गए टेस्ट मैच में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था. वो अब तक खेले गए कुल 30 टेस्ट मैच में 110 विकेट ले चुके हैं और औसत 28.90 का है.

कुछ लोग इसे शमी के साथ अन्याय मान रहे हैं लेकिन कुछ बीसीसीआई की मजबूरी समझ रहे हैं.

वरिष्ठ खेल पत्रकार धर्मेंद्र पंत ने बीबीसी से कहा कि एक तरफ़ शमी की पत्नी गंभीर आरोप लगा रही हैं और शिकायत कर रही हैं, अगर उसी रोज़ बोर्ड उनके नाम का ऐलान करता तो इससे काफ़ी बवाल मच सकता है.

कोड ऑफ़ कंडक्ट का सवाल

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पंत ने कहा, ''अतीत में दूसरे खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ जब ऐसी शिकायतें आई हैं तो उन्हें भी ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा है. बीसीसीआई वेट एंड वॉच की रणनीति अपना रहा है. अगर आगे सब ठीक रहता है तो शमी को 5 करोड़ वाला कॉन्ट्रैक्ट दे दिया जाएगा.''

लेकिन क्या इन दोनों चीज़ों को अलग नहीं रखा जाना चाहिए था, इस पर उन्होंने कहा, ''जब आप देश की तरफ़ से खेल रहे होते हैं तो आपका व्यवहार दुरुस्त रहना चाहिए. मैदान में ही नहीं बल्कि उसके बाहर भी एक कोड ऑफ़ कंडक्ट होता है.''

लेकिन ये अभी साबित कहां हुआ है कि शमी दोषी हैं, इस पर पंत का कहना था, ''ये बात सही है. इसीलिए अभी उनका नाम हटाया नहीं गया है, बल्कि 'विदहेल्ड' किया गया है. अगर बुधवार को उन्हें कॉन्ट्रैक्ट दे दिया जाता तो बीसीसीआई पर भी सवाल उठते.''

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Story first published: Thursday, March 8, 2018, 16:27 [IST]
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