आज शुरु होगा बीजिंग ओलंपिक 2008
बहुत चर्चा और विवादों से गुज़रने के बाद आख़िर बीजिंग में ओलंपिक खेलों की औपचारिक शुरुआत हो रही है. शुक्रवार की शाम रंगारंग उद्धाटन की तैयारी है.
प्रदूषण से लेकर मानवाधिकार तक बहुत से विवादों से गुज़रने के बाद अब सभी का ध्यान उद्धाटन समारोह पर रहेगा.
आठ अगस्त से शुरु हो रहा ओलंपिक 24 अगस्त तक चलेगा.
जैसा कि दावा किया गया है, रंगारंग और आकर्षक उद्धाटन समारोह भारतीय समय के अनुसार शाम साढ़े सात बजे होगा.
इसमें भाग लेने के लिए दुनिया भर के 11 हज़ार खिलाड़ी बीजिंग में एकत्रित हुए हैं. वे 302 खेलों में हिस्सा लेकर एक हज़ार मैडल जीतने के लिए खेलेंगे.
लंबी और खर्चीली तैयारी
चीन को इन ओलंपिक खेलों की तैयारियाँ करने में सात साल का समय लगा है और इन पर लगभग 40 अरब डॉलर का ख़र्च आया है.
सुरक्षा के भी पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं
चीन ने दुनिया को यह दिखाने में कोई कोर क़सर बाक़ी नहीं छोड़ी है कि वह भी ओलंपिक जैसा विशाल आयोजन कर सकता है.
चीन ने इन ओलंपिक खेलों के लिए ख़ासतौर से बीजिंग नेशनल स्टेडियम तैयार किया है जो स्टील की छड़ों से बना है और इसी लिए इसे 'बर्ड्स नेस्ट' यानी 'चिड़ियों का घोंसला' का नाम भी दिया गया है. इसी बीजिंग नेशनल स्टेडियम में आज ओलंपिक खेलों का उदघाटन समारोह आयोजित होने वाला है जिसमें लगभग दस हज़ार कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि ओलंपिक खेलों के इस उद्घाटन को दुनिया भर में लगभग चार अरब लोग देखेंगे.
इन ओलंपिक खेलों के आयोजकों को उम्मीद है कि जब एक बार बीजिंग ओलंपिक खेल शुरू हो जाएंगे तो वायु प्रदूषण, इंटरनेट पर लगी पाबंदियाँ और चीन के ख़िलाफ़ होने वाले राजनीतिक विरोध प्रदर्शन नैपथ्य में चले जाएंगे.
बीजिंग ओलंपिक खेलों के आयोजन में शामिल एक अधिकारी तीऊ मिंगते का विचार है कि चीन के लोग इन ओलंपिक खेलों के लोकर गौर्वान्वित महसूस कर रहे हैं और बहुत उत्साहित भी हैं.
वे कहते हैं, "चूँकि आप ख़ुद यहाँ हैं इसलिए आप ख़ुद यहाँ के माहौल को महसूस कर सकते हैं. आम लोगों में इन खेलों को लेकर जो उत्साह नज़र आता है, वो देखते ही बनता है."
उनका कहना है, "आप रेडियो चलाएंगे तो आपको पहला समाचार ओलंपिक खेलों के बारे में ही सुनने को मिलेगा और आप अख़बार खोलेंगे तो भी ओलंपिक की ख़बरों से ही भरा हुआ पाएंगे. इसी तरह टेलीविज़न का पर्दा भी आपको ओलंपिक खेलों की तैयारियों से भरा हुआ नज़र आएगा. सचमुच चीन के लोग इन खेलों के लिए बेहद उत्साहित हैं."
समझने का मौक़ा
उधर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष ज़्याक रॉख़े ने चीन को ओलंपिक खेलों का आयोजन करने का अवसर देने के फ़ैसले की बार-बार हिमायत की है.
रॉख़े ने उम्मीद जताई है कि इन खेलों के ज़रिए चीन को दुनिया को समझने और दुनिया को चीन को समझने का मौक़ा मिलेगा.
रॉख़े ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति इस पर नज़र रख रही है कि इतिहास में अभी तक के सबसे महंगे बीजिंग ओलंपिक खेलों से क्या निकलकर आता है.
उन्होंने कहा, "दुनिया इन खेलों के ज़रिए एक ऐसे देश को समझने की कोशिश करेगी जिसका पाँच हज़ार साल का एक इतिहास और परंपरा है. वे चीन को एक अदभुत देश पाएंगे और मेरा ख़याल है कि इससे दुनिया भर में चीन के बारे में राय बदलेगी."
ज़्याक रॉख़े ने ओलंपिक खेल शुरू होने से पहले गुरुवार को अपनी अंतिम पत्रकार वार्ता आयोजित की.
जिसमें उन्होंने भरोसा दिलाया कि चीन ने ओलंपिक खेलों के दौरान बीजिंग में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए समुचित उपाय किए हैं और एथलीटों के लिए माहोल ख़ुशनुमा रहेगा.
ज़्याक रॉख़े ने ओलंपिक खेलों के इतिहास पर नज़र डालते हुए कहा, "ग्रीस से यह परंपरा शुरू हुई और चीन अपने इन ओलंपिक खेलों के ज़रिए अपने एक अरब तीस करोड़ से भी ज़्यादा लोगों के साथ दुनिया के सामने होगा."
सुरक्षा के मुद्दे पर तो रॉख़े ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन एथलीटों को ओलंपिक नियमों का ध्यान दिलाते हुए कहा कि ओलंपिक स्थलों पर प्रदर्शन नहीं होने चाहिए. लेकिन अगर कोई एथलीट खेल के मैदान पर प्रदर्शन करेगा तो उसकी बात भी सुनी जाएगी.
प्रदूषण से लेकर मानवाधिकार तक बहुत से विवादों से गुज़रने के बाद अब सभी का ध्यान उद्धाटन समारोह पर रहेगा.
आठ अगस्त से शुरु हो रहा ओलंपिक 24 अगस्त तक चलेगा.
जैसा कि दावा किया गया है, रंगारंग और आकर्षक उद्धाटन समारोह भारतीय समय के अनुसार शाम साढ़े सात बजे होगा.
इसमें भाग लेने के लिए दुनिया भर के 11 हज़ार खिलाड़ी बीजिंग में एकत्रित हुए हैं. वे 302 खेलों में हिस्सा लेकर एक हज़ार मैडल जीतने के लिए खेलेंगे.
लंबी और खर्चीली तैयारी
चीन को इन ओलंपिक खेलों की तैयारियाँ करने में सात साल का समय लगा है और इन पर लगभग 40 अरब डॉलर का ख़र्च आया है.
सुरक्षा के भी पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं
चीन ने दुनिया को यह दिखाने में कोई कोर क़सर बाक़ी नहीं छोड़ी है कि वह भी ओलंपिक जैसा विशाल आयोजन कर सकता है.
चीन ने इन ओलंपिक खेलों के लिए ख़ासतौर से बीजिंग नेशनल स्टेडियम तैयार किया है जो स्टील की छड़ों से बना है और इसी लिए इसे 'बर्ड्स नेस्ट' यानी 'चिड़ियों का घोंसला' का नाम भी दिया गया है. इसी बीजिंग नेशनल स्टेडियम में आज ओलंपिक खेलों का उदघाटन समारोह आयोजित होने वाला है जिसमें लगभग दस हज़ार कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि ओलंपिक खेलों के इस उद्घाटन को दुनिया भर में लगभग चार अरब लोग देखेंगे.
इन ओलंपिक खेलों के आयोजकों को उम्मीद है कि जब एक बार बीजिंग ओलंपिक खेल शुरू हो जाएंगे तो वायु प्रदूषण, इंटरनेट पर लगी पाबंदियाँ और चीन के ख़िलाफ़ होने वाले राजनीतिक विरोध प्रदर्शन नैपथ्य में चले जाएंगे.
बीजिंग ओलंपिक खेलों के आयोजन में शामिल एक अधिकारी तीऊ मिंगते का विचार है कि चीन के लोग इन ओलंपिक खेलों के लोकर गौर्वान्वित महसूस कर रहे हैं और बहुत उत्साहित भी हैं.
वे कहते हैं, "चूँकि आप ख़ुद यहाँ हैं इसलिए आप ख़ुद यहाँ के माहौल को महसूस कर सकते हैं. आम लोगों में इन खेलों को लेकर जो उत्साह नज़र आता है, वो देखते ही बनता है."
उनका कहना है, "आप रेडियो चलाएंगे तो आपको पहला समाचार ओलंपिक खेलों के बारे में ही सुनने को मिलेगा और आप अख़बार खोलेंगे तो भी ओलंपिक की ख़बरों से ही भरा हुआ पाएंगे. इसी तरह टेलीविज़न का पर्दा भी आपको ओलंपिक खेलों की तैयारियों से भरा हुआ नज़र आएगा. सचमुच चीन के लोग इन खेलों के लिए बेहद उत्साहित हैं."
समझने का मौक़ा
उधर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष ज़्याक रॉख़े ने चीन को ओलंपिक खेलों का आयोजन करने का अवसर देने के फ़ैसले की बार-बार हिमायत की है.
रॉख़े ने उम्मीद जताई है कि इन खेलों के ज़रिए चीन को दुनिया को समझने और दुनिया को चीन को समझने का मौक़ा मिलेगा.
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उन्होंने कहा, "दुनिया इन खेलों के ज़रिए एक ऐसे देश को समझने की कोशिश करेगी जिसका पाँच हज़ार साल का एक इतिहास और परंपरा है. वे चीन को एक अदभुत देश पाएंगे और मेरा ख़याल है कि इससे दुनिया भर में चीन के बारे में राय बदलेगी."
ज़्याक रॉख़े ने ओलंपिक खेल शुरू होने से पहले गुरुवार को अपनी अंतिम पत्रकार वार्ता आयोजित की.
जिसमें उन्होंने भरोसा दिलाया कि चीन ने ओलंपिक खेलों के दौरान बीजिंग में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए समुचित उपाय किए हैं और एथलीटों के लिए माहोल ख़ुशनुमा रहेगा.
ज़्याक रॉख़े ने ओलंपिक खेलों के इतिहास पर नज़र डालते हुए कहा, "ग्रीस से यह परंपरा शुरू हुई और चीन अपने इन ओलंपिक खेलों के ज़रिए अपने एक अरब तीस करोड़ से भी ज़्यादा लोगों के साथ दुनिया के सामने होगा."
सुरक्षा के मुद्दे पर तो रॉख़े ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन एथलीटों को ओलंपिक नियमों का ध्यान दिलाते हुए कहा कि ओलंपिक स्थलों पर प्रदर्शन नहीं होने चाहिए. लेकिन अगर कोई एथलीट खेल के मैदान पर प्रदर्शन करेगा तो उसकी बात भी सुनी जाएगी.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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