देश के असली हीरो सेना के जवान: हरभजन सिंह
जालंधर। प्रलयकारी उत्तराखंड की बारिश में जहां हजारों जानें चली गयी हैं वहीं देश के क्रिकेट स्टार हरभजन सिंह आज सही सलामत अपने साथियों और रिश्तेदारों के साथ अपने घर पहुंच गये। घर पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले ऊपरवाले का शुक्रिया अदा किया और कहा कि देश के असली हीरो अगर कोई है तो वह है देश की सेना के जवान, जो अपनी जान पर खेल कर दूसरों की जान बचाते हैं। धन्य है भारत माता जिसकी धरती पर महान सपूत पैदा हुए हैं। मैं पहाड़ के इस भयावह मौत के मंजर को कभी नहीं भूल सकता हूं।
मालूम हो कि हरभजन अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए गये थे। जहां भारी बारिश के चलते वह बुरी तरह से रास्ते में फंस गये थे। सेना ने उन्हें सही सलामत घर पहुंचाने के लिए हेलिकॉफ्टर का सहारा लिया। भज्जी ने साफ किया आईटीबीपी और सेना की तरफ से उन्हें पूरी सुविधा प्रदान की गयी थी और उनके साथ वैसा ही बर्ताव किया गया जैसा कि आम आदमी के साथ किया जाता है।
आपको बताते चले कि बाढ़ प्रभावित उत्तराखंड के कई इलाकों में अभी भी लगभग 50,000 लोग फंसे हुए हैं। पिछले पांच दिनों से सेना के जवान राहत कार्यों में लगे हुए हैं। हालांकि गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि "हमने 34,000 से अधिक लोगों को निकाल लिया है, मगर तकरीबन 49,000 से 50,000 तक लोग अभी भी वहां फंसे हुए हैं। अभी भी मलबे में काफी लोग फंसे हुए हैं और मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती हैं।

विखंडित उत्तराखंड
प्रलयकारी बारिश ने उत्तराखंड को पूरी तरह से विखंडित कर दिया है। प्रदेश की पूरी खूबसूरती इस समय लाशों के कब्रिस्तान में तब्दील हो चुकी है।

पहाड़ का सूनामी
पहाड़ पर आयी इस प्राकृतिक प्रलय को प्रदेश के सीएम विजय बहुगुणा जोशी ने पहाड़ का सूनामी करार दिया है और कहा है कि वह और उनकी सरकार पूरी कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाये।

पड़ोसी राज्यों ने की मदद
उत्तराखंड की त्रासदी पर पूरा भारत एक दिख रहा है। पड़ोसी राज्यों यूपी, हरियाणा, दिल्ली ने सभी ने उत्तराखंड के लिए आर्थिक मदद दी है।

सेना के जवान रीयल हीरो
प्रलयकारी बारिश में फंसे हरभजन सिंह आज सहीसलामत घर पहुंच गये जहां उन्होंने कहा कि असली हीरो तो देश के जवान है। मैं उन सभी को दिल से सलाम करता हूं।

मौत का मंजर देखा
भज्जी ने कहा कि मैंने इससे पहले मौत को कभी नहीं देखा था। मैं ऊपर वाले से दुआ करता हूं कि फिर कभी किसी को ऐसा दिन ना देखना पड़े। मैं मौत के मंजर को कभी नहीं भूल सकता।
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