भारत के लिए महान क्षण: अभिनव
बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचने वाले अभिनव बिंद्रा ने कहा है कि यह भारत के लिए महान क्षण है जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता.
दस मीटर एयर राइफ़ल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अभिनव ने पत्रकारों से कहा, "मैंने कभी भी अपना ध्यान बँटने नहीं दिया. यही मेरी सफलता का मूल मंत्र है."
किसी व्यक्तिगत स्पर्धा में पहली बार भारत की ओर से स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी बने अभिनव का कहना था, "आज मेरा दिन था. उम्मीद करता हूँ कि आने वाले दिन हमारे दूसरे साथियों के लिए महान साबित होंगे."
जीत से अभिभूत अभिनव से जब यह पूछा गया कि फ़ाइनल राउंड में निर्णायक अचूक निशाना साधने के बाद वो कैसा महसूस कर रहे थे तो उनका कहना था, "मैं इसे बता नहीं सकता. ये तय है कि अब दुनिया को भारत और उसकी ताकत में विश्वास करना पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि भारत में नकारात्मक सोच खेलों के विकास में बड़ी बाधा है जिसे दूर कर लें तो सफलताएँ आती रहेंगी.
पिता भी खुश
चंडीगढ़ में अभिनव के पिता एएस बिंद्रा ने कहा कि उनके बेटे ने ओलंपिक तक का सफ़र कड़ी मेहनत और लगन से तय किया है.
उन्होंने एक निजी समाचार चैनल से कहा, "अभिनव बचपन से ही बंदूकों से खेलता था. जब वो पाँच साल का था तभी से अचूक निशाना लगाता रहा है."
एएस बिंद्रा बचपन की एक घटना की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, "वो अपनी आया को बैठा कर उनके सिर पर रंग भरा हुआ गुब्बारा रखता था और उस पर अचूक निशाना लगाता था. उस समय वो पाँच साल का था. तभी मैंने उसकी टैलेंट को पहचान लिया."
उन्होंने कहा कि ये सिर्फ़ उनके बेटे की जीत नहीं है बल्कि पूरे देश की जीत है और यह समय जश्न मनाने का है.
दस मीटर एयर राइफ़ल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अभिनव ने पत्रकारों से कहा, "मैंने कभी भी अपना ध्यान बँटने नहीं दिया. यही मेरी सफलता का मूल मंत्र है."
किसी व्यक्तिगत स्पर्धा में पहली बार भारत की ओर से स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी बने अभिनव का कहना था, "आज मेरा दिन था. उम्मीद करता हूँ कि आने वाले दिन हमारे दूसरे साथियों के लिए महान साबित होंगे."
जीत से अभिभूत अभिनव से जब यह पूछा गया कि फ़ाइनल राउंड में निर्णायक अचूक निशाना साधने के बाद वो कैसा महसूस कर रहे थे तो उनका कहना था, "मैं इसे बता नहीं सकता. ये तय है कि अब दुनिया को भारत और उसकी ताकत में विश्वास करना पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि भारत में नकारात्मक सोच खेलों के विकास में बड़ी बाधा है जिसे दूर कर लें तो सफलताएँ आती रहेंगी.
पिता भी खुश
चंडीगढ़ में अभिनव के पिता एएस बिंद्रा ने कहा कि उनके बेटे ने ओलंपिक तक का सफ़र कड़ी मेहनत और लगन से तय किया है.
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एएस बिंद्रा बचपन की एक घटना की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, "वो अपनी आया को बैठा कर उनके सिर पर रंग भरा हुआ गुब्बारा रखता था और उस पर अचूक निशाना लगाता था. उस समय वो पाँच साल का था. तभी मैंने उसकी टैलेंट को पहचान लिया."
उन्होंने कहा कि ये सिर्फ़ उनके बेटे की जीत नहीं है बल्कि पूरे देश की जीत है और यह समय जश्न मनाने का है.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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