शास्त्री ने बताया किसकी सहमति से धोनी को 7वें नंबर पर भेजने का लिया गया था फैसला
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम आईसीसी विश्व कप में सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रही थी लेकिन उन्हें सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड से हारकर फाइनल की दाैड़ से बाहर होना पड़ा। इसी के साथ करोड़ों भारतीय फैंस का सपना भी टूट गया था जो टीम को तीसरी बार खिताब उठाते हुए देखना चाहते थे। टीम से कई गलतियां हुईं जो हार कारण बनीं उनमें से एक रही अनुभवी महेंद्र सिंह धोनी को खराब समय के बावजूद भी सातवें नंबर पर भेजना। सवाल टीम मैनेजमेंट पर उठाए जा रहे हैं कि उन्हें धोनी को पांचवें नंबर पर भेजना चाहिए था ताकि वह टीम की पारी को संभालते। ऐसे में इस सवाल पर मुख्य कोच रवि शास्त्री ने जवाब दिया है और बताया कि आखिर क्यों धोनी को सातवें नंबर पर उतारने का फैसला लिया गया था।

दिया ये बयान
कोच शास्त्री ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू के दाैरान बताया कि धोनी को सातवें नंबर पर भेजना पूरी टीम का फैसला था। शास्त्री ने कहा, ''अगर धोनी पहले बैटिंग के लिए आते और वो जल्दी आउट हो जाते तो फिर लक्ष्य का पीछा करने का सारा खेल ही बिगड़ जाता। हमें उनके अनुभव की बाद में जरूरत थी। वो दुनिया के सबसे बड़े फिनिशनर है और अगर हम उनका इस्तेमाल सही समय पर नहीं करते तो फिर उनके साथ और टीम के साथ न्याय नहीं होता।"

मैच के हिसाब से खेल रहे थे धोनी
उन्होंने आगे कहा, "धोनी शानदार खिलाड़ी है और वे सही तरीके से लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे थे। उन्हें पता था कि अंतिम ओवर जिमी नीशम डालेंगे और वे उसी हिसाब से मैच में बल्लेबाजी कर रहे थे। वे दुर्भाग्य से गुप्टिल की डायरेक्ट थ्रो पर रन आउट हो गए और जब वह पवेलियन की और लौट रहे थो तो इसकी निराशा उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी।''
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खिलाड़ियों को खुद पर करना चाहिए गर्व
शास्त्री ने टीम इंडिया के खिलाड़ियों से कहा, 'अपना सिर ऊंचा करके यहां से जाइए, खुद पर गर्व करिए। 30 मिनट के खराब खेल से आपके पिछले दो साल का अच्छा खेल नहीं मिट सकता। आप सब इस बात को जानते हैं। एक सीरीज, एक टूर्नामेंट और वो भी सिर्फ 30 मिनट का खराब खेल कोई फैसला नहीं कर सकता। आप सबने ये इज्जत कमाई है। ये बात सही है कि हम सभी निराश और दुखी हैं लेकिन आप इस बार पर गर्व करिए कि आपने पिछले दो साल में क्या हासिल किया है।' उन्होंने कहा कि जब आपने पिछले 30 महीने में इतना शानदार क्रिकेट खेला हो, तो सेमीफाइनल में मिली हार से तकलीफ जरूर होती है। ये कड़वी दवा है, जिसे निगलना मुश्किल है, लेकिन ये खेल है और इसीलिए हम इसे खेलते हैं।

धोनी की पारी नहीं दिला सकी जीत
बता दें कि न्यूजीलैंड ने टाॅस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया था। न्यूजीलैंड ने भारत के साथ 240 रनों का लक्ष्य रखा था। भारतीय टीम के खिलाड़ी जिस फाॅर्म में थे उसे देख लह रहा था कि आसानी से मैच जीता जा सकता है लेकिन शुरूआती 3 विकेट महज 5 रनों पर ही गिर गए। इसके बाद न्यूजीलैंड ने भारत पर दवाब बनाया। हालांकि हार्दिक पांड्या(77), धोनी(50) की पारियों की बदाैलत भी भारत 18 रनों से मैच हारकर बाहर हो गया।
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