
आया ये बयान
दरअसल, कोरोना वायरस से बढ़ रहे खराब हालातों को देखते हुए खेल मंत्रालय ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) सहित अन्य राष्ट्रीय महासंघों को साफ तौर पर कहा कि कोरोनो वायरस के खतरों के बीच अगर देश में किसी भी टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है तो, उसे बंद दरवाजों के बीच आयोजित करना होगा। खेल सचिव राधे श्याम जुलानिया ने आईएएनएस से बात करेत हुए साफ कहा, ''अगर कोई खेल है, जिसे टाला नहीं जा सकता है तो उसे बंद दरवाजों के बीच आयोजित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसमें दर्शक ना आएं।''

दर्शकों के हाथ लगी निराशा
सचिन ने आगे कहा, ''यह राज्य सरकार के ऊपर है जिसे दर्शकों का प्रबंधन करना है और उनके पास इसे रोकने के लिए महामारी रोग अधिनियम (1897 की महामारी अधिनियम) के तहत शक्ति प्राप्त है। यदि इसे (टूर्नामेंट को) टाला नहीं जा सकता है तो इसे दर्शकों के बिना ही बंद दरवाजों के बीच आयोजित करना चाहिए।'' इस मामले में जब बीसीसीआई अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें भी सरकार के फैसले का पालन करने की जरूरत है। लेकिन खेल मंत्रालय से आए इस बयान से दर्शकों के हाथ जरूर निराशा लगी है। यानी कि जो स्टेडियम में बैठकर मैच देखना चाहते हैं उन्हें टीवी के सामने बैठकर मैच देखने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। बता दें कि 14 मार्च को मुंबई में आईपीएल के उच्च अधिकारी मीटिंग करने जा रहे हैं। इस मीटिंग में फैसला हो जाएगा कि क्या सरकार के कहने पर टूर्नामेंट की तारीख आगे बढ़ाई जाएगी या फिर बिना दर्शकों के मैच होंगे।

कोरोना वायरस को लेकर सरकार हुई सख्त
बता दें कि कोरोना वायरस को लेकर सरकार सख्त हो चुकी है। चीन में अब तक 80,000 से भी ज्यादा लोग कोरोना वायरस का शिकार हो चुके हैं जिनमें से 3,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया भर में अब तक कोरोना वायरस के 118,000 से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है और 4,291 लोगों की मौत हुई है। वहीं भारत में इसके 73 मामले सामने आए हैं। केंद्र सरकार ने फिलहाल सरकार ने विदेशी खिलाड़ियों को 15 अप्रैल तक वीजा देने पर रोक लगा दी है। आईपीएल की शुरुआत 29 मार्च से होना है और यदि विदेशी खिलाड़ी 15 अप्रैल तक नहीं खेलेंगे तो इसका रोमांच कम हो जाएगा।


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