
हुआ था विवाद
दरअसल, सचिन तेंदुलकर दूसरी पारी में ग्लेन मैकग्रा की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट दिए गए थे, हार्पर ने ही तेंदुलकर को आउट दिया था और इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। इस किस्से के करीब 21 साल बाद हार्पर ने कहा है कि वो उस फैसले को लेकर खुद पर बहुत गर्व महसूस करते हैं। विवाद इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि लोगों ने इसे एलबीडब्ल्यू की जगह 'शोल्डर बिफोर विकेट' नाम दिया था।

हार गया था भारत
मैकग्रा की गेंद पर तेंदुलकर ने डक किया था और मैकग्रा ने एलबीडब्ल्यू की अपील की थी, जिसके बाद हार्पर ने तेंदुलकर को आउट करार दिया था। मैच में यह भारत की दूसरी पारी थी और फिर भारत को उस मैच में हार का सामना करना पड़ा था। एशियानेट न्यूजेबल पर हार्पर ने कहा, 'मैं अपनी जिंदगी के हर दिन तेंदुलकर को आउट दिए गए उस फैसले के बारे में सोचता हूं। ऐसा कुछ नहीं था कि मुझे उसके बाद नींद नहीं आई थी, बुरे सपने आए थे या फिर वो रिप्ले हमेशा मेरे दिमाग में घूमता है। जब मैं अपने गैराज में जाता हूं तो सचिन और ग्लेन मैकग्रा की वो तस्वीर सामने आती है और मैं कुछ देर के लिए उस समय में चला जाता हूं जब गेंद तेंदुलकर को लगी थी।'

हार्पर को है फैसले पर गर्व
उन्होंने आगे कहा, 'आपको यह जानकर निराशा होगी कि आज भी मुझे उस फैसले पर बहुत गर्व है। क्योंकि मैंने अपने सामने हुई घटना पर बिना किसी डर या पक्षपात के नियम लगाया था।' हार्पर 2011 में उस समय भी विवाद में रहे थे, जब उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में डेब्यू कर रहे तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार को गेंदबाजी करने से बैन कर दिया था। प्रवीण को पिच पर डेंजर एरिया में दौड़ने के लिए यह सजा मिली थी।


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