
चेतेश्वर पुजारा
जब भी इस सीरीज का जिक्र होगा तब-तब भारत के जिस खिलाड़ी के नाम की सबसे पहले चर्चा होगी, वह होंगे- चेतेश्वर पुजारा। इस बल्लेबाज ने बेजोड़ इरादे दिखाते हुए टेस्ट क्रिकेट में क्लासिक बल्लेबाजी को एक बार फिर से स्थापित कर दिया। पुजारा ने चार टेस्ट मैचों की 7 पारियों में तीन शतकों के साथ कुल 521 रन बनाकर कंगारू गेंदबाजी की धार कुंद कर दी। पुजारा ने एडिलेड टेस्ट की पहली पारी में ही शतक जड़कर लय पकड़ ली थी जो सीरीज के आखिर तक बरकरार रही। एडिलेड में 123 और 71 रन बनाने वाले पुजारा की बदौलत भारत यह टेस्ट 31 रनों से जीतने में कामयाब रहा। इसके अलावा पुजारा ने बॉक्सिंग डे टेस्ट में भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतक बनाया था। भारत यह मैच भी जीतने में कामयाब रहा। पुजारा की बल्लेबाजी का एक और श्रेष्ठ नमुना सिडनी में देखने को मिला। यहा पुजारा ने 193 रनों की पारी खेली जिसके दम पर भारत 622 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर सका। पुजारा ने इस सीरीज में सबसे ज्यादा 521 रन बनाए।
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अंजिक्य रहाणे की 82 रनों की पारी
रहाणे इस सीरीज में भले ही निरंतरता की कमी से जूझते नजर आए लेकिन इसके बावजूद इस सीरीज में उनके नाम कुछ यादगार पारियां हैं। खासकर एडिलेड की दूसरी पारी में उन्होंने जो 70 रनों की पारी खेली थी उसने मैच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रहाणे जब आउट हुए तब तक भारत का स्कोर 300 के पार करवा चुके थे। टीम इंडिया को इस मैच में 31 रनों से करीबी जीत मिली। इसको देखते हुए रहाणे की 70 रनों की पारी की अहमियत समझी जा सकती है।

जबरदस्त बॉलिंग युनिट
इस सीरीज में भारतीय गेंदबाजी एक बार फिर से धारधार रही। भारत गेंदबाजों ने हर मैच में कंगारू टीम को आउट करने में सफलता हासिल की। एडिलेड में हुए पहले मैच में फिर से तीनों भारतीय तेज गेंदबाजों के अलावा रविचंद्रन अश्विन ने बढ़िया गेंदबाजी करते हुए भारत को करीबी जीत दिलाई थी। जबकि पर्थ में हुए दूसरे मैच में तीनों तेज गेंदबाजों ने अपना जलवा बिखेरा। भारत को यहां स्पिनर ना खिलाना भारी पड़ा था। पूरी सीरीज में इंडियन बॉलिंग युनिट ने शानदार खेल दिखाया। भारतीय तेज गेंदबाजों में ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह ने कुल मिलाकर 48 विकेट लिए। ईशांत शर्मा चोट के चलते सीरीज का आखिरी मैच नहीं खेल सके थे, उन्होंने तीन मैचों में कुल 23.8 के शानदार औसत से 11 विकेट झटके।

शमी-बुमराह का 'सिक्सर'
मोहम्मद शमी ने इसी मैच की दूसरी पारी में 6 विकेट लेने वाली यादगार गेंदबाजी की थी। बॉक्सिंग डे टेस्ट में यही सिलसिला जारी रहा और यहां बेहतरीन बॉलिंग युनिट के नायक रहे जसप्रीत बुमराह जिन्होंने मैच में 9 विकेट लेकर भारत को पहला बॉक्सिंग डे टेस्ट जिताने में भूमिका निभाई। बुमराह ने मैच की पहली पारी में करियर की बेस्ट गेंदबाजी करते हुए केवल 33 रन देकर 6 विकेट हासिल किए थे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया मैच में ऐसा लड़खड़ाया की फिर संभल ही नही सका। बुमराह ने सीरीज में सबसे ज्यादा 21 विकेट और शमी ने 16 विकेट झटके।

चाइनामैन कुलदीप यादव की फिरकी
हालांकि सिडनी का मैच बारिश से प्रभावित रहा जिस कारण भारतीय गेंदबाजों को कंगारूओं की एक ही पारी आउट करने का मौका मिला। इसमें भी पहला टेस्ट खेल रहे चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव ने पांच विकेट लिए थे। इसी पारी में ही कंगारू टीम 31 साल में पहली बार अपने घर में फॉलोऑन खेलने पर मजबूर हुई थी। कुलदीप की फिरकी को देखते हुए कंगारूओं के लिए यह मैच बचाने के लिए केवल बारिश का ही सहारा बचा था। आखिर बारिश हुई और कंगारू एक और टेस्ट हार से किसी तरह बच निकले।


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