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मुक्केबाज़ी में विजेंदर ने उम्मीद जगाई

बीजिंग ओलंपिक में दूसरे दिन भारतीय दल के निशानेबाज़ों ने निराश किया है लेकिन मुक्केबाज़ी में विजेंदर दूसरे दौर में पहुँच गए. रविवार को मानवजीत सिंह संधू और मनशेर सिंह भारी दबाव को नहीं झेल पाए और दोनों पुरुषों की ट्रैप शूटिंग स्पर्धा के फ़ाइनल में जगह नहीं बना पाए.

मानवजीत से भारत को पदक की काफ़ी उम्मीदें थीं लेकिन, बीजिंग शूटिंग रेंज में क्वालिफ़ाइंग राउंड के पाँच दौरों में मानवजीत 125 में से सिर्फ़ 116 अंक ही जुटा सके. मानवजीत का नंबर बारहवाँ था. वहीं मानवजीत के मुक़ाबले में मनशेर ने कुछ बेहतर प्रदर्शन किया. मनशेर ने 117 अंक बनाकर आठवाँ स्थान हासिल किया.

ट्रैप शूट में शुरू के छह खिलाड़ी चुन लिए गए. पहले दिन मानवजीत ने तीन दौरों में 23, 23 और 24 अंक लिए. लेकिन रविवार को बीजिंग ओलंपिक के दूसरे दिनउन्होंने दो राउंड में 22 और 24 अंक हासिल किए और उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया.

इसी तरह मनशेर ने पहले दिन पहले दो राउंड में 24 अंक जुटाए लेकिन तीसरे दौर में वो महज़ 20 अंक ले पाए जिससे उनके जीतने की उम्मीद पूरी तरह धूमिल पड़ गई थी. अगर मनशेर ने तीसरे दौर में कुछ और अंक जीत लिए होते तो वो फ़ाइनल में अपनी जगह बना चुके होते.

मुक्केबाज़ों से उम्मीद

भले ही निशानेबाज़ों ने दूसरे दिन निराश किया हो लेकिन मुक्केबाज़ों ने कुछ उम्मीद ज़िंदा रखी है. भारतीय मुक्केबाज़ विजेंदर कुमार ने 75 किलोग्राम वज़न मुक़ाबलों में ज़ांबिया के मुक्केबाज़ जैक बदोऊ को पहले ही राउंड में हरा दिया. विजेंदर ने जैक बदोऊ को दो के मुक़ाबले 13 अंकों से हराया.

विरेंदर सिंह का अगला मुक़ाबला थाइलैंड के मुक्केबाज़ से होगा. लेकिन 81 किलोग्राम वज़न श्रेणी में मुक्केबाज़ दिनेश अलजीरिया के अब्दुलहफ़ीज़ से हार गए. 22 साल के विजेंदर से भारतीय दल को उम्मीद है. उन्होंने एशियाई खेलों में भी रजत पदक जीता था.

विजेंदर का अगला मुक़ाबला 2002 के बुसान एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता थाइलैंड के अंगखान चोमफूहुआंग से होगा. अपनी जीत के बाद विजेंदर ने कहा, मुक़ाबला काफ़ी तगड़ा था. मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो इतनी टक्कर दे देगा.

ओलंपिक में भारतीय टीम के कोट गुरबख्श सिंह का कहना है, "मुझे दिनेश के जीतने की उम्मीद नहीं थी. लेकिन विजेंदर अनुभवी है वो आगे तक जा सकता है." गुरबख्श सिंह ने कहा, "हमारे मुक्केबाज़ों की सबसे अच्छी बात ये है कि वो अब पदकों के बारे में सोचने लगे हैं खासकर स्वर्ण पदकों के बारे में. ये अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है."
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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