नई दिल्ली। निदहास ट्रॉफी के फाइनल में भारत को बांग्लादेश के खिलाफ बड़ी मुश्किल से जीत नसीब हुई। दिनेश कार्तिक ने आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर भारत को खिताब जिताया। जहां कार्तिक के लिए ये मैच पूरी जिंदगी भर एक सुनहरे पल के रूप में याद रहेगा तो वहीं युवा ऑलराउंडर विजय शंकर के लिए खास मौके पर परफॉर्म न कर पाने के लिए याद रहेगा।
फाइनल में 17 गेंदों में महज 19 रन बनाने वाले विजय शंकर आलोचनाओं के घरे में थे। दबाव में अच्छा न खेल पाने का उन्हें भी मलाल था। उनके मन में खुद की नाकामी पर तरह-तरह के सवाल उठने लगे थे। खुद विजय ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया, "मैं बहुत परेशान था और होटल पहुंचकर कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद खुद दिनेश कार्तिक ने कमरे का दरवाजा खटखटाया और मुझे धैर्य रखने को कहा। इन सबसे मेरे हौसला लौट आया।"
विजय ने आगे कहा, "उस रात मैं ये ही सोचता रहा कि अगर कार्तिक ने आखिरी बॉल पर वो छक्का ना मारा होता, तो हम हार चुके होते। ऐसे में क्या होता? अगर मैंने इतनी डॉट बॉल ना खेली होती, तो हम मुकाबला आसानी से जीत जाते।"
बता दें कि जब भारत को आखिरी 2 ओवरों में 34 रन चाहिए थे तब विजय शंकर के बल्ले से गेंद हिट नहीं हो रही थी। वो तो भला हो दिनेश कार्तिक का जिन्होंने आते-आते रन बरसाने शुरू कर दिए और 8 गेंदों में 29 रन बनाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिला दी।