इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में शीला दीक्षित ने कहा, "वहां कोई कॉर्डिनेशन नहीं था, किसी को कुछ नहीं मालूम था. हालात ख़राब थे, बेसमेंट में पानी भरा हुआ था और कोई इस बात की सुध लेने वाला नहीं थी." शीला दीक्षित आगे कहतीं हैं कि जिस एजेंसी के पास सफ़ाई का जिम्मा था उसकी कहीं कोई नामो-निशान नहीं था.
दीक्षित ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, " हमें बताया गया था कि एक एजेंसी के 400 लोगों को इस काम के लिए रखा गया है. हमें खेलगांव में सिर्फ़ तीस या पचास ही लोग मिले. 73 में 68 लिफ़्टें काम नहीं कर रहीं थीं और बालकनियों में कांच तक नहीं लगा था."
जब दिल्ली सरकार ने सफ़ाई का ये काम अपने हाथ में लिया था तब शीला दीक्षित ने ये हैरान कर देने वाली जानकारियां मीडिया के साथ नहीं बांटीं थीं लेकिन खेल ख़त्म होने के बाद अब नए तथ्य सामने आ रहे हैं.
शीला दीक्षित अपने इंटरव्यू में कहती हैं कि उन्होंने पांच सितारा होटलों की एसोसिएशन से बातकर, सफ़ाई में उनका सहयोग लिया और उस समय मौजूद व्यवस्था के विफल हो जाने पर उन्हें विकल्प तलाशने पड़े. उन्होंने ये भी कहा कि बाढ़ और खेलों के लिए अन्य व्यवस्थाएं करने में लगी दिल्ली सरकार के लिए आख़िरी वक़्त पर खेलगांव की सफ़ाई का काम दिया जाना एक अतिरिक्त ज़िम्मेदारी थी जिसे उन्होंने ख़ुद नहीं मांगा था.