ट्वेंटी-20 विश्व कप : कौन जीतेगा, बताना संभव नहीं
नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। ट्वेंटी-20 विश्व कप के तीसरे संस्करण का आगाज शुक्रवार को गयाना के प्रोविडेंस स्टेडियम में होने जा रहा है। अलग-अलग मिजाज और खेल शैली की 12 टीमों के बीच होने वाले क्रिकेट के इस 'लघु महाभारत' में जीत किसकी होगी, इसे लेकर अब तक किसी प्रकार की भविष्यवाणी नहीं की गई है।
इसका प्रमुख कारण यह है कि क्रिकेट को पहले से ही अनिश्चितता का खेल माना जाता है और ट्वेंटी-20 की ताबड़तोड़ शैली ने इसकी रफ्तार को इतना बढ़ा दिया है कि इसकी अनिश्चितता पुरानी सीमाओं को तोड़ते हुए नए स्तर तक पहुंच चुकी है। यही कारण है कि विजेता के नाम की भविष्यवाणी करके क्रिकेट के कई नामचीन पंडित अपनी फजीहत करा चुके हैं।
इस बार क्रिकेट के किसी विश्लेषक और पंडित ने संभावित विजेता के बारे में किसी प्रकार की भविष्यवाणी नहीं की है। कइयों से यह सवाल पूछा गया लेकिन सबने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि ट्वेंटी-20 की बिसात पर सभी टीमें एक जैसी 'औकात' वाली हो जाती हैं क्योकि इसने खराब, अच्छी और बहुत अच्छी टीमों के बीच के अंतर को काफी हद तक कम कर दिया है।
वैसे यह कहना कि खराब, अच्छी और बहुत अच्छी टीमों के बीच का अंतर कम या खत्म हो गया है, जायज नहीं होगा। टेस्ट हो या एकदिवसीय या फिर ट्वेंटी-20 यह अंतर हमेशा बना रहेगा। हालिया प्रदर्शनों और खिलाड़ियों के बल्लों और गेंदों की चमक के आधार पर इस बात का फैसला किया जा सकता है कि कौन सी टीम खिताब के सबसे करीब पहुंच सकती है।
मसलन, 2007-08 में जब पाकिस्तानी टीम उपविजेता रही थी, तब यह कहा गया था कि वह अगले वर्ष खिताब जरूर जीतेगी और यूनिस खान की कप्तानी में पाकिस्तानी टीम ने श्रीलंका को हराकर यह कारनामा कर दिखाया था। इस बार भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी टीम के पास खिताब जीतने के लिए जरूरी संतुलन है लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए उसे मैदान में अच्छा खेलना होगा।
आंकड़ों और खिलाड़ियों के कद की बात की जाए तो आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका किसी से कम नहीं लेकिन दोनोंे टीमों अब तक एक बार फिर फाइनल में जगह नहीं बना सकी हैं। भारत और श्रीलंका की टीमें भी प्रमुख दावेदार हैं क्योंकि भारत ने 2008 में खिताब जीता था जबकि श्रीलंकाई टीम 2009 में उपविजेता रही है।
लगभग सभी टीमों के प्रमुख खिलाड़ियों को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के माध्यम से अभ्यास मिला है और सभी लय में दिख रहे हैं। आईपीएल से सबसे अधिक फायदा भारत, श्रीलंका, वेस्टइंडीज और आस्ट्रेलिया को हुआ है क्योकि उसके अधिकांश खिलाड़ी आईपीएल-3 में चमकदार प्रदर्श कर चुके हैं।
इस लिहाज से पाकिस्तान को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि राजनीतिक और संस्थागत मजबूरियों के कारण पाकिस्तान का एक भी खिलाड़ी आईपीएल-3 में नहीं खेल सका था। आयरलैंड, बांग्लादेश और अफगानिस्तान भी ऐसी ही टीमें हैं, जिनके खिलाड़ियों ने ट्वेंटी-20 मैचों का काफी कम अभ्यास किया है।
आयरलैंड, अफगानिस्तान और बांग्लादेश की टीमें कोई बड़ा सपना नहीं देख रही होंगी और यही कारण है कि मुख्य मुकाबला बाकी की नौ टीमों के बीच सिमटकर रह जाता है। इनमें से सभी टीमें एक दूसरे को परास्त कर सकती हैं और इस लिहाज से यह कहना कि कौन सी टीमें अंतिम-चार में पहुंचेंगी, बहुत मुश्किल है।
ट्वेंटी-20 क्रिकेट की रोचकता और सुंदरता भी इसी बात में छुपी है। तीन टीमों को अलग कर दिया जाए तो नौ टीमों के बीच होने वाली रोचक भिड़त दर्शकों को 16 दिनों तक बांधे रखेगी। इससे जाहिर तौर पर आयोजकों को भी फायदा होगा और आईसीसी को भी, जो ट्वेंटी-20 के माध्यम से क्रिकेट को वैश्विक पहचान देना चाहती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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