रोनाल्डो की फुटबॉल से विदाई
ब्राज़ील की विश्व कप जीत में रोनाल्डो की बड़ी भूमिका रही है और वो विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब भी जीत चुके हैं.
ब्राज़ील के लोकप्रिय और जाने-माने फ़ुटबॉल खिलाड़ी रोनाल्डो नज़ारियो ने संन्यास की घोषणा कर दी है और इस तरह उतार-चढ़ाव से भरा 18 वर्षों का उनका करियर अब समाप्त हो गया.
'ओ फ़िनोमेनो' यानी 'करिश्माई रोनाल्डो' के नाम से जाने गए रोनाल्डो के बेहतरीन प्रदर्शन का अंदाज़ा इन्हीं आँकड़ों से लग सकता है कि वह विश्व कप में 15 गोल करके सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी हैं.
उनका ये रिकॉर्ड जर्मनी के म्युलर के 14 गोलों के रिकॉर्ड से एक ज़्यादा है. इतनी ही नहीं वो दुनिया के सिर्फ़ दो ऐसे खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्हें फ़ुटबॉल की शीर्ष संस्था फ़ीफ़ा ने तीन बार वर्ष का खिलाड़ी घोषित किया. दूसरे खिलाड़ी फ़्रांस के ज़िनेदिन ज़िदान रहे हैं.
ब्राज़ीलियाई लोगों के लिए रोनाल्डो आज तक के महानतम खिलाड़ियों में से एक हमेशा रहेंगे. वहाँ के लोग शायद पेले से उनकी तुलना न करें मगर उन्हें रोमारियो और ज़िको जैसे बेहतरीन खिलाड़ियों की पंक्ति में ज़रूर शामिल किया जाएगा.
उनका ये शानदार फ़ुटबॉल करियर जहाँ सम्मानों और रिकॉर्डों से भरा है तो दूसरी ओर इस करियर का समापन काफ़ी कड़वाहट भरा रहा है.
ब्राज़ीलियाई क्लब कोरिन्थियन्स के साथ उन्होंने 2009 में खेलना शुरू किया और उस साल उन्हें जीत भी हासिल हुई वो उनका करियर ख़त्म होते-होते प्रशंसकों और पत्रकारों के साथ हुई हिंसक झड़प में तब्दील हो गई थी.
रोनाल्डो का लक्ष्य 2011 में अपने क्लब को दक्षिण अमरीका का प्रतिष्ठित लिबर्तादोरेस कप जिताना था जो कि ब्रितानी चैंपियंस लीग की ही तरह माना जाता है.
साओ पाओलो में स्थित कोरिन्थियन्स क्लब ब्राज़ील के काफ़ी लोकप्रिय क्लबों में से एक है और उसके लगभग ढाई करोड़ प्रशंसक भी हैं मगर ये क्लब इससे पहले ये कप कभी नहीं जीत सका है.
टीम से इतनी बड़ी उम्मीदें जल्दी ही विवाद और हिंसा में बदल गईं. इस महीने की शुरुआत में क्लब एक अपेक्षाकृत कमज़ोर कोलंबियाई क्लब डेपोर्टेस टोलिमा से हार गया.
इससे पहले इस प्रतियोगिता से इतनी जल्दी ये क्लब कभी बाहर नहीं हुआ था.
कई प्रशंसकों ने रोनाल्डो को ही मुख्य दोषी माना और उनकी नाराज़गी भी रोनाल्डो को झेलनी पड़ी. अगले दिन उनके क्लब के अभ्यास वाले मैदान पर लोगों ने लिख दिया- 'ओ गोर्दो' यानी कि मोटा.
एक दिन बाद सैकड़ों प्रशंसक क्लब के अभ्यास मैदान के बाहर इकट्ठे हुए और उन्होंने टीम की बस पर पत्थर भी फेंके.
रोनाल्डो ने ख़ुद के बचाव में ट्विटर की राह अपनाई. उन्होंने क्लब की हार में अपनी भूमिका स्वीकार की मगर हिंसा की भी आलोचना की.
रोनाल्डो ने रविवार को इस बात की घोषणा कर दी कि वह फ़ुटबॉल से संन्यास ले रहे हैं और उसकी मुख्य वजह ये है कि उनका शरीर अब और चोट बर्दाश्त नहीं कर सकता.
सिर्फ़ दो ही साल पहले रोनाल्डो जब एसी मिलान क्लब से कोरिन्थियन्स आए थे तो उन्होंने इस क्लब से साथ अपने रिश्ते को प्रेम प्रसंग वाला बताया था
उस सौदे को ब्राज़ील के फ़ुटबॉल इतिहास का एक बड़ा सौदा बताया गया था, हालाँकि कई आलोचनों ने उसे कोई अहमियत नहीं दी थी और कहा था कि रोनाल्डो सम्मानजनक रूप से संन्यास लेने के लिए ये राह चुन रहे हैं.
रोनाल्डो की शुरुआत जिस तरह की रही उससे तो यही लगा था कि आलोचकों की बात ग़लत साबित होगी.
उन्होंने 2009 में कई प्रमुख गोल भी किए थे जिसकी वजह से क्लब का अच्छा प्रदर्शन रहा.
मगर बाद में राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान उन्हें चोट लग गई और बाक़ी सीज़न के लिए वो बाहर कर दिए गए.
2010 में एक बार फिर उनसे काफ़ी उम्मीदें रहीं पर क्लब नॉक आउट दौर में फ़्लेमेंगो की टीम से हार गई.
उनके संन्यास से कई लोगों को आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि कुछ महीनों से वह चोट, दर्द और बढ़ते वज़न का शिकार हो रहे थे. फिर भी उनकी छवि एक वापसी करने वाले खिलाड़ी की थी.
कई विश्लेषकों ने 1999 में उनके घुटने की चोट के बाद ही उनके करियर को समाप्त घोषित कर दिया था मगर रोनाल्डो ने 2002 में वापसी की थी और स्पेन के ला लिगा में रियाल मैड्रिड की ओर से अच्छा प्रदर्शन किया था.
ब्राज़ील में बड़े पैमाने पर लोग उन्हें 2002 के विश्व कप के फ़ाइनल में जर्मनी के विरुद्ध किए गए दो गोलों के लिए याद रखेंगे तो वहीं कुछ 1998 में फ़्रांस से ब्राज़ील को मिली 3-0 से हार के लिए.
मगर ब्राज़ील का शायद ही कोई ऐसा फ़ुटबॉल प्रेमी होगा जो उन्हें किसी न किसी वजह से याद न रखे.
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