नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) कल पर्थ में जिस बेचारे पत्रकार को बेवजह भारतीय टीम के वाइस कैप्टन विराट कोहली ने चुनिंदा हिन्दी-पंजाबी गालियों से अनुग्रहित किया, उसका लंबा संघर्षों भरा इतिहास है।
ट्रांसपोर्ट परिवार से संबंध
राजधानी के कालका जी के एक बेहद मामूली ट्रांसपोर्टर परिवार से संबंध रखने वाले जसविंदर सिद्दू को दिल्ली की पत्रकार बिरादरी जस्सी भी कहती है। जस्सी बेदह शांत स्वभाव का पत्रकार है। कभी किसी से ऊंची आवाज में भी नहीं बोलता।
पत्रकार बनने की ख्वाहिश
जस्सी करीब 20 साल पहले हिन्दुस्तान टाइम्स में इस नाचीज लेखक से मिला था। उसकी चाहत थी कि उसे कुछ दिनों तक एचटी ग्रुप में ट्रेनिंग करने का मौका मिल जाए। उसके उत्साह को देखकर उसे मौका दिया गया। उसके बाद जस्सी फ्रीलांसिंग करने लगा। कई जगहों पर उसके विभिन्न विषयों पर लेख छपने लगे। दैनिक जागरण से लेकर अमर उजाला में उसने नौकरी की।
अमर उजाला में जस्सी ने क्रिकेट रिपोर्टर के रूप में जबरदस्त संपर्क विकसित किए। शायद ही भारतीय क्रिकेट बोर्ड का कोई आला पदाधिकारी हो जो उसे ना जानता हो। बेहद मृदुभाषी जस्सी लगातार स्टोरीज ब्रेक करता रहा। बोर्ड के भीतर की गड़बड़ियों को भी उजागर करने से पीछे नहीं हटा।
एचटी ग्रुप से जुड़ा
बीते एक साल से वह हिन्दुस्तान टाइम्स में बतौर क्रिकेट राइटर जुड़ गया। जिस संस्थान में जस्सी कुछ दिनों के लिए ट्रेनिंग करने के लिए आया था, उसने उसे बेहद अहम पद पर नौकरी दी। चालू वर्ल्ड कप में जाने से पहले उसने इस लेखक से नेशनल मीडिया सेंटर में कहा था, "दादा, इस बार मेरी खबरों पर प्लीज नजर रखिए। वर्ल्ड कप को कवर करना मेरे लिए भी चैलेंज है।"
कोहली का छोटापन
बहरहाल, कोहली ने एक बेहद उम्दा इंसान और पत्रकार के साथ बदतमीजी करके अपने को छोटा कर लिया है। जो शख्स भारतीय टेस्ट टीम का कप्तान हो, वह इतना सड़कछाप आचरण करे उसे यह शोभा नहीं देता।
जस्सी के साथ किए टुच्चे व्यवाहर से दिल्ली के पत्रकार तो खासतौर पर नाराज है। एसोसिएटेड प्रेस के साउथ एशिया प्रमुख संदीप नकई ने बोर्ड से मांग की कि कोहली के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।