गांगुली खेल रहे हैं अपना अंतिम टेस्ट
भारत के सबसे सफल कप्तान रहे सौरव गांगुली नागपुर में अपने जीवन का अंतिम टेस्ट मैच खेल रहे हैं. उन्होंने संन्यास लेने की घोषणा पहले ही कर दी थी.
ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले जा रहे इस टेस्ट मैच के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की है.
सौरव गांगुली कुल 49 मैचों में भारत के कप्तान रहे और इनमें से 21 में भारत को जीत हासिल हुई.
और वह सौरव गांगुली की कप्तानी के ही दिन थे जब भारतीय क्रिकेट में पैसे की बरसात होनी शुरु हुई.
भारत में सौरव गांगुली को लेकर बहुत विवाद भी होते रहे हैं, ख़ासकर उनके टीम में रहने न रहने को लेकर.
चाहे आप उन्हें पसंद करें या न करें लेकिन एक बात तय रही है कि आप उन्हें अनदेखा नहीं कर सकते.
भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलियाई कोच ग्रेग चैपल के साथ अनबन होने से पहले सौरव ने पाँच साल तक भारतीय टीम की कप्तानी संभाली.
तब एक ऐसा समय था जब लोग मानने लगे थे कि सौरव का क्रिकेट जीवन ख़त्म हो गया लेकिन उन्होंने समीक्षकों को ग़लत साबित किया और एक बार फिर से भारतीय टीम में जगह बनाई.
नेतृत्व
भारत में क्रिकेट एक धर्म की तरह ही है.
गांगुली कहते हैं, "भारतीय टीम का नेतृत्व करना आसान नहीं है, ख़ासकर जब आपको सलाह देने के लिए सौ करोड़ लोग मौजूद हों."
वे कहते हैं, "जब तक आप जीत रहे हों तब तक तो ठीक है लेकिन अगर आप हार गए तो प्रतिक्रिया थोड़ी तेज़ हो सकती है."
इस अनुभव के बारे में वे कहते हैं, "जब आप नहीं जीतते हैं तो सोते-जागते आपको इसकी याद दिलाई जाती है...लेकिन एक समय बाद आप इसके आदी हो जाते हैं...और यह सभी कप्तानों के लिए एक जैसा है, कभी आप आसमान में होते हैं और कभी ज़मीन पर पटक दिए जाते हैं."
गांगुली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम ने भारत में हो रहे विकास की झलक दिखलाई.
भारत जब आर्थिक रुप से मज़बूत होकर उभर रहा था और विश्वपटल पर उसका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ दिखता था, तब भारतीय क्रिकेट टीम भी उसके साथ कमदताल कर रही थी.
गांगुली का नेतृत्व आक्रामक था और उनके नेतृत्व में खेलते हुए खिलाड़ियों ने लाखों-करोड़ों रुपए कमाए क्योंकि भारत क्रिकेट का आर्थिक केंद्र बन रहा था.
लेकिन सौरव के गृहनगर कोलकाता में दादा, यानी की बड़ा भाई, अपना पैड उतारने जा रहा है.
सौरव ख़ुद मानते हैं कि वे संन्यास के फ़ैसले से राहत महसूस कर रहे हैं.
भारत के सबसे सफल कप्तान रहे सौरव गांगुली कहते हैं कि वे अब आराम की नींद सोना चाहते हैं.
ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले जा रहे इस टेस्ट मैच के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की है.
सौरव गांगुली कुल 49 मैचों में भारत के कप्तान रहे और इनमें से 21 में भारत को जीत हासिल हुई.
और वह सौरव गांगुली की कप्तानी के ही दिन थे जब भारतीय क्रिकेट में पैसे की बरसात होनी शुरु हुई.
भारत में सौरव गांगुली को लेकर बहुत विवाद भी होते रहे हैं, ख़ासकर उनके टीम में रहने न रहने को लेकर.
चाहे आप उन्हें पसंद करें या न करें लेकिन एक बात तय रही है कि आप उन्हें अनदेखा नहीं कर सकते.
भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलियाई कोच ग्रेग चैपल के साथ अनबन होने से पहले सौरव ने पाँच साल तक भारतीय टीम की कप्तानी संभाली.
तब एक ऐसा समय था जब लोग मानने लगे थे कि सौरव का क्रिकेट जीवन ख़त्म हो गया लेकिन उन्होंने समीक्षकों को ग़लत साबित किया और एक बार फिर से भारतीय टीम में जगह बनाई.
नेतृत्व
भारत में क्रिकेट एक धर्म की तरह ही है.
गांगुली कहते हैं, "भारतीय टीम का नेतृत्व करना आसान नहीं है, ख़ासकर जब आपको सलाह देने के लिए सौ करोड़ लोग मौजूद हों."
वे कहते हैं, "जब तक आप जीत रहे हों तब तक तो ठीक है लेकिन अगर आप हार गए तो प्रतिक्रिया थोड़ी तेज़ हो सकती है."
इस अनुभव के बारे में वे कहते हैं, "जब आप नहीं जीतते हैं तो सोते-जागते आपको इसकी याद दिलाई जाती है...लेकिन एक समय बाद आप इसके आदी हो जाते हैं...और यह सभी कप्तानों के लिए एक जैसा है, कभी आप आसमान में होते हैं और कभी ज़मीन पर पटक दिए जाते हैं."
गांगुली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम ने भारत में हो रहे विकास की झलक दिखलाई.
भारत जब आर्थिक रुप से मज़बूत होकर उभर रहा था और विश्वपटल पर उसका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ दिखता था, तब भारतीय क्रिकेट टीम भी उसके साथ कमदताल कर रही थी.
गांगुली का नेतृत्व आक्रामक था और उनके नेतृत्व में खेलते हुए खिलाड़ियों ने लाखों-करोड़ों रुपए कमाए क्योंकि भारत क्रिकेट का आर्थिक केंद्र बन रहा था.
लेकिन सौरव के गृहनगर कोलकाता में दादा, यानी की बड़ा भाई, अपना पैड उतारने जा रहा है.
सौरव ख़ुद मानते हैं कि वे संन्यास के फ़ैसले से राहत महसूस कर रहे हैं.
भारत के सबसे सफल कप्तान रहे सौरव गांगुली कहते हैं कि वे अब आराम की नींद सोना चाहते हैं.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:19 [IST]
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