नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। टीम इंडिया उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है। वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच हारी तो क्रिकेट प्रेमियों को वीरेंद्र सहवाग की याद आ गई। तमाम लोगों ने कहा कि अगर वीरू होता तो मैच जिता देता... यह बातें इसलिये जहन में आयीं, क्योंकि सहवाग ने अपने बल्ले का जौहर कई बार दिखाया है। आज सहवाग के साथ ऐसा होगा शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा।
हम बात कर रहे हैं सहवाग के नाम पर किये गये वादे की। वो वादा जो दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने किया था। वादा था कि फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में दर्शक दीर्घा में एक स्टैंड वीरू के नाम पर रखा जाएगा।
जानकारों का कहना है कि डीडीसीए के अपने वादे को भूलने से सहवाग के भी निराश है। अभी हाल ही में भारत-वेस्ट इंडीज के बीच कोटला में एकदिवसीय मैच हुआ। तब उम्मीद थी कि मैदान के एक स्टैंड को वीरू करने की घोषणा हो जाएगी। पर अफसोस ऐसा नहीं हुआ।
वादा नहीं निभाया
डीडीसीए ने कोटला के मैदान के एक स्टैंड को सहवाग के नाम पर करने की घोषणा तब की थी जब मुल्तान का सुल्तान जमकर रन बना रहा था। डीडीसीए ने चंदेक साल पहले वीरेन्द्र सहवाग को उनकी 100 टेस्टों की उपलब्धि के लिए उन्हें 100 सोने की गिन्नियां देकर सम्मानित किया था। सम्मान समारोह फिरोजशाह कोटला पर 6 जनवरी 2013 को आयोजित किया गया था, जब भारत और पाकिस्तान के बीच यहां एक दिवसीय मुकाबला खेला गया था।
बहरहाल, अब डीडीसीए का कोई भी पदाधिकारी इस मसले पर बात नहीं करता कि फिरोजशाह कोटला मैदान के एक छोर का नाम सहवाग पर कब रखा जाएगा। कुछ समय पहले डीडीसीए के वरिष्ठ पदाधिकारी चेतन चौहान से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया।
राजधानी के वरिष्ठ खेल पत्रकार धर्मेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि दिल्ली ने सहवाग से बड़ा कोई खिलाड़ी पैदा नहीं किया। उसकी मैदान में उपलब्धियां महान हैं। उसके साथ किए वादे को निभाया जाना चाहिए।