नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अब लगता है कि वीरेन्द्र सहवाग को समझ आ गया है कि उनका क्रिकेट करियर समाप्त हो चुका है, इसलिए बेहतर होगा कि कुछ और धंधा किया जाए। इस बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने सहवाग इंटरनेशनल स्कूल का ही ब्रांड एंबेसेडर बनने का फैसला ले लिया है।
आज राजधानी के एक नामवर अखबार में उनके स्कूल का एक बड़ा सा विज्ञापन छपा है। उसमें सहवाग का भी फोटो है। उनका मुस्कराता हुआ चेहरा अच्छा लग रहा है। वे पेंट-सूट में खड़े हैं। सहवाग ने अपने स्कूल में अपने बच्चों के एडमिशन की चाहत रखने वाले पेरेन्ट्स से एक तरह से आग्रह किया है कि वे अपने नन्हें-मुन्नों का उनके स्कूल में एडमिशन करवा दें।
हुड्डा ने दी जमीन
बता दें कि जिन दिनों सहवाग का बल्ला आग उगल रहा था, तब हरिय़ाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने उन्हें गुड़गांव-झज्जर रोड पर स्कूल बनाने के लिए एक बड़ा सा प्लाट दे दिया था।
सबको मालूम है कि काफी समय तक उस प्लाट पर कुछ नहीं हुआ, पर जैसे ही वीरू के क्रिकेट की दुनिया में सितारे अस्त होने लगे वे अपने स्कूल को खोलने के काम में पर बिजी हो गए। इस काम में उनकी पत्नी ने उनका बखूबी साथ निभाया।
वीरू बाहर
वीरू को हाल ही में उन 30 खिलाड़ियों में भी शामिल नहीं किया गया, जिनमें से 15 खिलाड़ियों का आगामी विश्व कप के लिए भारतीय टीम के लिए चयन होना है। इसके बाद तो वीरू को लगा कि मानो अब उनके लिए क्रिकेट के मैदान में कोई स्कोप नहीं बचा स्कोर करने का।
सहवाग इंटरनेशनल स्कूल के विज्ञापन में बच्चों को स्कूल में मिलने वाली तमाम सुविधाओं का बखान किया गया है। हां, स्कूल बच्चों से कितनी फीस लेगा यह नहीं बताया गया। जानकारों का कहना है कि स्कूल वीरू का है,तो फीस तो मोटी होगी ही।