नई दिल्ली। अपने पहले एकदिवसीय मैच में महज एक रन बनाकर आउट होने के बाद तकरीबन दो साल तक भारतीय टीम अपनी जगह बनाने के लिए जूझते रहने वाले वीरेंद्र सेहवाग के बारे में किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन वो भारत के बेहतरीन विस्फोटक बल्लेबाज साबित होंगे। मुल्तान टेस्ट में 309 रनों की विशाल पारी खेलने के बाद से मुल्तान के सुल्तान के नाम से ख्याति पाने वाले वीरेंद्र सेहवाग अपना 36वां जन्मदिन मना रहे है।
एकदिवसीय क्रिकेट में पर्दापण करने के बाद सेहवाग अपने विस्पोटक अंदाज के लिए जाने जाते थे। शुरुआती दिनों में लोगों को सेहवाग में हूबहू सचिन की छवि नजर आती थी। सचिन जैसी ही कद-काठी, क्रीज पर खड़े होने का अंदाज, स्टांस लेने का तरीका और सचिन जैसे शाट्स खेलने के अंदाज से लोग हमेशा सचिन और सेहवाग में भ्रमित हो जाते थे। सेहवाग ने काफी लंबे समय तक सचिन के साथ भारत के लिए ओपनिंग स्लॉट पर बल्लेबाजी की है।
एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सेहवाग के नाम 219 रनों की सबसे बड़ी पारी का रिकॉर्ड है, वहीं सबसे कम गेदों में(333 रन-278 गेंद पर) टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक मारने का रिकॉर्ड भी सेहवाग के ही नाम है। क्रिकेट में सेहवाग को बेहतरीन योगदान के लिए उन्हें अर्जुन अवार्ड, पद्मश्री, आइसीसी 2010 का सर्वश्रेष्ठ टेस्ट क्रिकेटर का भी उन्हे खिताब मिल चुका है।
सेहवाग का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में छवि काफी साफ सुथरी रही है, टीम में उनके हंसमुख स्वभाव की वजह से सभी टीम सदस्यों के साथ उनकी खूब जमती थी। हालांकि सेहवाग अभी टीम में अपनी जगह बनाने के लिए जूझ रहे हैं लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।