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आखिर क्या है क्रिकेट में VJD नियम, क्यों है DLS से बेहतर

नई दिल्ली। घरेलू टीमों के लिए वनडे प्रारूप सीरीज विजय हजारे ट्रॉफी का आगाज हो चुका है। पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी बारिश का कहर जारी रहा। यह पहली बार है जब विजय हजारे ट्रॉफी में पहले 2 दिन के अंदर 10 मैच बारिश के चलते धुल गए, हालांकि दूसरे दिन कुछ मैच बारिश के दखल के बावजूद पूरे किये गये और टीमों ने 'वीजेडी नियम' के आधार पर जीत दर्ज की। 'वीजेडी नियम' के बारे में सुनते ही दिमाग में यह सवाल आता है कि आखिर यह नियम है क्या?

घरेलू टूर्नामेंट में नियमों की देख-रेख करने वाली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की ओर से इस नियम को लागू किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट में बारिश से बाधित मैचों में स्कोर को रिवाइज करने के लिए डकवर्थ लुईस नियम का इस्तेमाल होता है यह नियम उसी का विकल्प है। जब भी मैच में बारिश का खलल होता है तो वीजेडी नियम के तहत दूसरी टीम के लिए नया स्कोर निर्धारित करता है।

वी जयदेवन ने की थी इस प्रणाली की खोज

वी जयदेवन ने की थी इस प्रणाली की खोज

इस नियम को केरल के रहने वाले एक सिविल इंजीनियर वी जयदेवन ने बनाया था। वीजेडी का उपयोग पहले इंडियन क्रिकेट लीग में किया गया था, इसके बाद तमिलनाडु प्रीमियर लीग (टीएनपीएल) में भी इसका उपयोग होता रहा है। इसका इस्तेमाल आईपीएल के चौथे और पांचवें सीजन में भी किया गया था और एक बार तो आईसीसी भी डीएलएस की जगह वीडीएस का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही थी।

साल 2012 में ICC ने VDS के प्रस्ताव को किया खारिज

साल 2012 में ICC ने VDS के प्रस्ताव को किया खारिज

साल 2012 में आईसीसी ने यह कहते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था कि वर्तमान में लागू DLS सिस्टम में हमें कोई खामी नजर नहीं आती है और हमें लगता है कि VDS सिस्टम भी मैच में कुछ नया नहीं प्रदान कर रहा है। जिसका वी जयदेवन ने विरोध किया और कहा कि उनके साथ ज्यादती हुई है और उनके पक्ष को सही तरीके से नहीं सुना गया। हालांकि यह बात सच है कि सामान्य DLS सिस्टम से VDS में कई फायदे हैं जो इसे सटीक और खेल के लिए फायदेमंद बताता है।

DLS की तुलना में ज्यादा व्यवहारिक है VDS

DLS की तुलना में ज्यादा व्यवहारिक है VDS

बारिश से बाधित मैच के दौरान DLS स्कोर कैलकुलेट करने के लिए मौजूदा रन-रेट को जारी रखता है जबकि VDS उस टीम के हालिया प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए नये स्कोर की गणना करता है। यह अक्सर देखा गया है कि DLS प्रक्रिया के इस्तेमाल के बाद विपक्षी टीमों को थोड़ा बेइमानी भरा स्कोर मिलता है, क्योंकि टीमें हमेशा ओवरों की संख्या के अनुपात में अपना स्ट्राइक रेट नहीं बढ़ा पाती हैं। इसके चलते डीएलएस प्रणाली का इस्तेमाल करने पर अनुमानित स्कोर में अक्सर बड़ा फेर-बदल देखने को मिलता है।

आखिर कैसे अलग है DLS से VDS

आखिर कैसे अलग है DLS से VDS

जबकि VJD प्रणाली अधिक वैज्ञानिक तरीके से इसकी गणना करता है, यह टीम की पारी को अलग-अलग चरणों में विभाजित करती है। VJD के अनुसार इसकी कैलकुलेशन शुरू के ओवर्स में हाई स्कोरिंग, बीच के ओवर्स में थोड़ी सी गिरावट और स्लॉग ओवर्स में फिर से हाई स्कोरिंग करके की जाती है। इससे विपक्षी टीम को और अधिक व्यवहारिक स्कोर मिलता है और उन्हें ठगा हुआ महसूस नहीं होता।

इतनी ही नहीं VJD के अंतर्गत 100 तक, 100 से 200 तक और 200 से 300 तक के स्कोर की गणना के लिए अलग पैटर्न है क्योंकि मैच के दौरान खिलाड़ी हर स्कोर के लिए अलग तरह की अप्रोच रखता है तो यह अधिक व्यवहारिक लगता है।

DLS बनाम VDS अनुमानित स्कोर

DLS बनाम VDS अनुमानित स्कोर

आइये देखते हैं कि कैसे इन दोनों प्रणालियों में लक्ष्य अलग आते हैं। 50 ओवर का मैच अगर घटकर 20 ओवर का हो जाता है तो मैच में स्कोर

Story first published: Sunday, October 6, 2019, 6:03 [IST]
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