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जो कहा वो कर दिखाया

ओलंपिक में अभिनव की जीत की ख़बर देहरादून में उनके स्कूल में मिली तो स्कूल में बस हिप हुप हुर्रे की ही गूँज थी.

देहरादून के मशहूर रिवरडेल स्कूल में अभिनव ने साढ़े तीन साल की नन्ही सी उम्र में दाखिला लिया था और पाँचवीं तक की पढ़ाई यहीं से की थी. इसके बाद उन्होंने देहरादून के ही मशहूर दून स्कूल में तीन साल पढ़ाई की और फिर चंड़ीगढ़ चले गए.

हमने उन्हें बचपन में खेलते पढ़ते देखा है. वो निशानेबाज़ी के ऐसे शौकीन थे कि कभी बल्ब पर, कभी चिड़िया पर और कभी हमारे सिर पर बोतलें रखवाकर निशाने लगाते थे
अभिनव ने अपने स्कूल से वादा किया था कि वो गोल्ड मेडल जीत कर आएंगे. उन्होंने अपना वादा पूरा कर दिखाया.

और अब उनके स्कूल के साथ-साथ पूरा देहरादून शहर अपने लाडले का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है.

ये एक सुखद संयोग ही था कि सोमवार की सुबह अभिनव के मुक़ाबले से पहले उनके इस बचपन के स्कूल में बाक़ायदा प्रार्थना की गई थी.

बच्चों ने अभिनव की कामयाबी के लिए दुआएं की. स्कूल में जैसे ही ख़बर आई कि अभिनव ने दस मीटर एयर राइफल के इवेंट में देश का झंडा गाड़ दिया है तो सब खुशी से उछल पड़े. और पूरा स्कूल हिप हिप हुर्रे के शोर में डूब गया.

मुझे पता था कि एक दिन अभिनव देश का नाम रोशन करेगा. उसमें बचपन से ही कुछ कर गुज़रने का जज़्बा नज़र आता था
स्कूल के हेड ब्वॉय नमन जौली ने कहा, "हमने उसके लिए प्रार्थना की थी. और हमारी प्रार्थना सफल रही. हम आगे भी उसके लिए प्रार्थना करेंगे कि वो और गोल्ड मेडल जीते और आगे भी देश का नाम रोशन करें."

स्कूल की ही एक और छात्रा आद्या ने कहा, "मुझे गर्व है कि अभिनव मेरे स्कूल में पढ़े हैं. पहले तो इतना एक्साईटमेंट हो रहा था कि क्या होगा? फिर जब मैडम ने बताया तो पूरी क्लास हिप हिप हुर्रे चिल्लाने लगी."

होनहार छात्र थे अभिनव

उसकी अच्छाई उसके गुण सब उसके चेहरे पर झलकते हैं. बहुत अनुशासित था वो. और उसमें ऐसी ऊर्जा है कि कोई भी उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता
स्कूल की प्रिंसिपल सुरजीत अहलूवालिया को अपने इस होनहार छात्र की उपलब्धि पर गर्व है. अभिनव के बारे में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सुरजीत अहलूवालिया का गला भर आया.

उन्होंने कहा, " मुझे पता था कि एक दिन अभिनव देश का नाम रोशन करेगा. उसमें बचपन से ही कुछ कर गुज़रने का जज़्बा नज़र आता था."

वे कहती हैं, "ये एक ऐतिहासिक दिन है मेरे स्कूल के लिए और पूरे देश के लिए. एक खास बात ये है कि एक बहुत अच्छे इंसान ने ये कामयाबी हासिल की है. भगवान ऐसे और बच्चे देश को दे."

अभिनव के देहरादून स्थित आवास में कर्मचारी सुरेंद्र कुमार की आंखें इस उपलब्धि पर छलछला आयीं. उन्होंने कहा, "हमने उन्हें बचपन में खेलते पढ़ते देखा है. वो निशानेबाज़ी के ऐसे शौकीन थे कि कभी बल्ब पर, कभी चिड़िया पर और कभी हमारे सिर पर बोतलें रखवाकर निशाने लगाते थे."

रिवरडेल स्कूल में उनकी क्लास टीचर रहीं सुनीता नौटियाल अपने पूर्व छात्र की महान उपलब्धि पर गदगद हैं.

उनका कहना है, "इससे बड़ा दिन कोई आ ही नहीं सकता. वो हमेशा अव्वल आता था. सात साल वो हमारे स्कूल में रहा. पांचवीं में मैं उनकी क्लास टीचर थी. वो हेड ब्वॉय था. और उसके बारे में कुछ कहना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है."

अभिनव के अध्याक बेहद ख़ुश हैं

सुनीता कहती हैं, " मैं ऐसा इसलिए नहीं कह रही कि उसने गोल्ड मेडल जीत लिया है लेकिन वास्तव में उसकी अच्छाई उसके गुण सब उसके चेहरे पर झलकते हैं. बहुत अनुशासित था वो. और उसकी वाईब्रेशन ही ऐसी थी कि कोई उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था."

अभिनव पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ-साथ संगीत और नाटक में भी आगे रहते थे.

अभिनव के सहपाठी और शूटिंग में भी उनके साथी रहे राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज़ मयंक मारवाह अपने दोस्त की कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं.

देहरादून में अपना शूटिंग इंन्स्टीट्यूट चला रहे मयंक का कहना है, "इससे ज़बर्दस्त मनोबल बढ़ेगा और निशानेबाज़ी में उभरते खिलाड़ियों को प्रेरणा, हिम्मत और मौका सब मिलेंगें. ये सिर्फ अभिनव की जीत नहीं खेल और सभी खिलाड़ियों की जीत है."
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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