महान गावस्कर ने बारह साल बाद धोया पुराना दाग, आखिरी वनडे से ठीक पहले ठोका तूफानी शतक

By अशोक कुमार शर्मा
World Cup 1987 Flashback: Sunil Gawaskar made stunning hundered just before his last ODI

नई दिल्ली। सुनील गावस्कर भारत ही नहीं दुनिया के महान बल्लेबाज हैं। उन्होंने महान डॉन ब्रेडमैन के 29 शतकों के रिकॉर्ड को तोड़ा था। बहुत समय तक सबसे अधिक 34 टेस्ट शतक लगाने का रिकॉर्ड उनके ही नाम पर दर्ज था। अब इस रिकॉर्ड पर तेंदुलकर का कब्जा है। गावस्कर ऐसे ठोस बल्लेबाज थे कि उन्होंने तेज से तेज गेंदबाजों को भी बिना हेलमेट के खेला। उनकी उपलब्धि की अनगिनत कहानियां हैं। लेकिन एक पारी ऐसी भी जो उनके चमकते करियर पर दाग की तरह है। ये पारी उन्होंने 1975 के पहले विश्वकप में खेली थी। 60 ओवरों में केवल 36 रन बनाये थे। इस दाग को धोने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। 1987 में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 85 गेंदों पर शतक लगा कर धीमी बल्लेबाजी के दाग धो दिया था। गावस्कर ने अपने करियर के आखिरी लम्हों में ऐसी तेज पारी खेली कि लोग हैरान रहे गये। भारत के इस महान खिलाड़ी ने अपने आखिरी वनडे से एक मैच पहले अपना पुराना हिसाब चुकता कर लिया।

किन परिस्थितियों में गावस्कर ने लगाया शतक?

किन परिस्थितियों में गावस्कर ने लगाया शतक?

1987 के चौथे विश्वकप में भारत पहले पांच मैचों में चार जीत कर सेमीफाइनल में जगह बना चुका था। छठा मैच न्यूजीलैंड से होने वाल था। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण मैच था। ग्रुप में पहला स्थान पाने के लिए जरूरी था कि भारत न्यूजीलैंड को बड़े अंतर से हराये। भारत एक मैच आस्ट्रेलिया से हारा था तो दूसरा जीत गया था। भारत को पहले पायदान पर आने के लिए आस्ट्रेलिया को रन रेट में पछाड़ना जरूरी था। न्यूजीलैंड ने पहले खेलते हुए 50 ओवरों में 221 रन बनाये। भारत अगर 42.2 ओवर में जीत के लक्ष्य को हासिल कर लेता तो वह आस्ट्रेलिया को पछाड़ कर ग्रुप में पहले स्थान पर आ जाता। भारत के लिए पहला स्थान एक और कारण से भी जरूरी था। भारत अगर पहले पायदान पर रहता तो उसका सेमीफाइनल मुकाबला मुम्बई में होता। दूसरे स्थान पर रहने से उसे सेमीफाइनल खेलने के लिए पाकिस्तान जाना पड़ता। पाकिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान में खेलना पड़ता। भारतीय पारी शुरू होने से पहले ड्रेसिंग रूम में कप्तान कपिल ने अपने सबसे सीनियर साथी गावस्कर से बात की। गावस्कर भी अपने पुराने दर्द से छुटकारा पाना चाहते थे। उन्होंने आगे बढ़कर तेज पारी खेलने की जवाबदेही ली ।

गावस्कर का विस्फोटक शतक-

गावस्कर का विस्फोटक शतक-

31 अक्टूबर 1987, मुकाम नागपुर। सुनील गावस्कर क्रिकेट के ग्रामर के हिसाब से खेलते थे। वे कॉपी बुक स्टाइल में बल्लेबाजी करते थे। लेकिन उस दिन गावस्कर ने कुछ अलग करने की ठान रखी थी। 22 साल पहले प्रतिओवर 5.25 रन बनाने की चुनौती बहुत मुश्किल थी। गावस्कर, श्रीकांत के साथ मैदान पर उतरे। दोनों ने पहले दो ओवरों में 18 रन बनाये। श्रीकांत तो तेज खेलते ही थे अब गावस्कर ने आक्रमण का फैसला ले लिया। गावस्कर ने इवान चैटफील्ड के एक ओवर में दो चौके और दो छक्के लगा कर कुल 21 रन बटोरे। गावस्कर का ये नया रूप देख कर हर कोई भौंचक रह गया। भारत ने 14 ओवरों में 100 रन बन लिये। भारत का पहला विकेट 136 पर गिरा। श्रीकांत 58 गेंदों पर 75 रन बना कर आउट हुए जिसमें 9 चौके औक 3 छक्के शामिल थे। गावस्कर ने तेजी से रन बोटरना जारी रखा। केवल 85 गेंदों पर शतक ठोक कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इससे पहले उन्होंने वनडे में कोई शतक नहीं लगाया था। गावस्कर ने कुल 88 गेंदें खेलीं और 103 रनों पर नाबाद रहे। इस पारी में उन्होंने 10 चौके और 3 छक्के उड़ाये। गावस्कर का लक्ष्य लिया। टारगेट से 10 ओवर पहले ही भारत ने न्यूजीलैंड को 9 विकेट से हरा दिया। भारत अपने ग्रुप में पहले पायदान पर आ गया।

सेमीफाइनल गावस्कर का अंतिम वनडे-

सेमीफाइनल गावस्कर का अंतिम वनडे-

1987 विश्वकप का सेमीफाइनल मुकाबला गावस्कर का आखिरी वनडे मैच था। अपने अंतिम वनडे मैच के ठीक पहले गावस्कर ने शतक लगाने की हसरत पूरी कर ली थी। इस तूफानी शतक से भारत को मुम्बई में सेमीफाइनल खेलने का मौका तो मिल गया लेकिन वह इंग्लैंड से पार न पा सका। इंग्लैंड ने भारत को 255 रनों का लक्ष्य दिया था। सेमीफाइनल में लिटिल मास्टर गावस्कर ने केवल 4 रन बनाये जो उनकी आखिरी पारी साबित हुई। सबसे अधिक अजहरुद्दीन ने 64 रन बनाये। भारत की टीम 219 रनों पर ही ढेर हो गयी। भारत यह मैच 35 रनों से हार गया।

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Story first published: Friday, May 17, 2019, 12:09 [IST]
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