नई दिल्ली। खेल जगत में खिलाड़ियों के संघर्ष की कई ऐसी कहानियां हैं जो अपने में मिसाल हैं। परिस्थितियां प्रतिकूल होने के बाद भी खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से अपना एक दायरा बनाते हैं, अपनी एक अलग पहचान और दुनिया बनाते हैं, ऐसे ही एक युवा खिलाड़ी का नाम है यशस्वी जायसवाल। यशस्वी मुंबई के मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के गार्ड के साथ तीन साल तक टेंट में रहे, इससे पहले वो डेयरी में काम करते थे और वहीं सोते थे लेकिन वहां से उन्हें भगा दिया गया। हर जगह उसे अपमान की नजर से देखा गया लेकिन यशस्वी की नजर में एक सपना पल रहा था वो था एक दिन भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना।
आज यशस्वी 17 साल के हो चुके हैं, ये कमाल का मिडल ऑर्डर बल्लेबाज़ अब श्रीलंका दौरे के लिए भारत की अंडर-19 के लिए खेलने के लिए तैयार हैं। मुंबई के अंडर-19 कोच सतीश समंत ने यशस्वी के बारे में कहा कि उसका फोकस और खेल की समझ कमाल की है। यशस्वी उत्तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले हैं। उनके पिता वहीं एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। यशस्वी, कम उम्र में ही क्रिकेट का सपना लेकर मुंबई पहुंच गए थे। उनके पिता के लिए परिवार को पालना मुश्किल हो रहा था इसलिए उन्होंने एतराज़ भी नहीं किया. मुंबई में यशस्वी के चाचा का घर इतना बड़ा नहीं था कि वो उसे साथ रख सकें. इसलिए चाचा ने मुस्लिम यूनाइटेड क्लब से अनुरोध किया कि वो यशस्वी को टेंट में रहने की इजाज़त दें.
यशस्वी ने बताया, "इससे पहले मैं काल्बादेवी डेयरी में काम करता था। पूरा दिन क्रिकेट खेलने के बाद मैं थक जाता था और सो जाता था. एक दिन उन्होंने मुझे ये कहकर वहां से निकाल दिया कि मैं सिर्फ सोता हूं और काम में उनकी कोई मदद नहीं करता.।
अगले तीन साल के लिए वो टेंट ही यशस्वी के लिए घर बन गया. पूरी कोशिश यही होती कि मुंबई में उनकी संघर्ष से भरी ज़िंदगी की बात मां-बाप तक नहीं पहुंचे. अगर उनके परिवार को पता चलता तो क्रिकेट करियर का वहीं अंत हो जाता. उनके पिता कई बार पैसे भेजते लेकिन वो कभी भी काफी नहीं होते। राम लीला के समय आज़ाद मैदान पर यशस्वी ने गोल-गप्पे भी बेचे। लेकिन इसके बावजूद कई रातों को उन्हें भूखा सोना पड़ता था।