Jasprit Bumrah Birthday: याॅर्कर सीखने के लिए ढूंढा था 'गजब' तरीका, फिर एक काॅल ने बदल डाली जिंदगी
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह आज यानी कि 6 दिसंबर को 26 साल के हो गए हैं। बुमराह फिलहाल स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण टीम से बाहर हैं। उम्मीद है कि वो जनवरी में न्यूजीलैंड दाैरे के लिए पूरी तरह से फिट हो जाएंगे। इस गेंदबाज ने बहुत ही कम समय में अपनी धाक जमा ली। कोई भी बल्लेबाज उनका सामना आसानी से नहीं कर सकता। छोटे से रनअप में बुमराह 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने की क्षमता रखते हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत है याॅर्कर। बुमराह की याॅर्कर पर कई दिग्गज बल्लेबाज चकमा खा बैठे हैं। हालांकि बुमराह ने कैसे याॅर्कर किंग बने और इसे सीखने के लिए क्या तरीका अपनाया, यह शायद ही आप जानते होंगे।

याॅर्कर सीखने के लिए ढूंढा था 'गजब' तरीका
बुमराह जब छोटे थे तो घर की दीवारों पर पेंसिल से विकेट बना कर बॉलिंग करने लगते। टेनिस बॉल जब दीवारों पर टकराती तो बहुत शोर होता जिससे उनकी मां गुस्सा हो जातीं। एक दिन उन्होंने खीज में कह दिया कि या तो बाहर खेले या फिर ऐसी बॉलिंग करो की घर में आवाज न हो। बुमराह सोच में पड़ गये कि क्या करें। तब उन्होंने तय किया कि वे गेंद को वहां पटकेंगे जहां जहां दीवार का निचला सिरा फर्श से मिलता हो। दीवार की जड़ में गेंद पटकने से आवाज कम होने लगी। फिर तो वे दीवारों पर विकेट जरूर बनाते लेकिन गेंदों को वहीं टप्पा खिलाते जहां दीवार की जड़ होती। इस प्रैक्टिस के बाद बुमराह जब स्कूली क्रिकेट में बॉलिंग के लिए मैदान पर उतरे तो उनकी अधिकतर गेंदें बल्लेबाज के पैरों पर गिरतीं। हड़बड़ी में बल्लेबाज या तो बोल्ड हो जाता या फिर एलबीडब्ल्यू। बुमराह में सटीक यॉर्कर फेंकने की कला यहीं विकसित हुई थी।

गरीबी से लड़कर बड़े हुए बुमराह
साल 1993 में गुजरात के अहमदाबाद में जन्मे बुमराह गरीबी में पले-बढ़े हैं। उनके पूर्वज पंजाब के रहने वाले थे। उनके दादा संतोष सिंह बुमराह रोजी रोटी के लिए अहमदाबाद आ गए थे। उन्होंने अपनी मेहनत से अहमदाबाद में तीन फैक्ट्रियां खड़ी कर ली थीं। सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन 2001 में बुमराह के पिता जसबीर सिंह बुमराह का असामयिक निधन हो गया। उस समय बुमराह की उम्र 8 साल और उनकी बहन जुहिका की उम्र 5 साल थी। बुमराह के पिता के निधन के बाद परिवार में कई तरह की समस्याएं शुरू हो गयीं। बिजनेस चौपट होने लगा। घर में मतभेद बढ़ने लगे। बुमराह की मां दलजीत कौर अकेली पड़ गयीं। घर के लोगों ने उनका साथ नहीं दिया। ऐसे में दलजीत कौर जसप्रीत और जुहिका को लेकर अलग रहने लगीं। अब उन पर दो छोटे बच्चों की परवरिश की जिम्मेवारी थी। आमदनी का कोई जरिया नहीं था। शुरू में उनके मायके वालों ने कुछ मदद की। लेकिन इससे जिंदगी की गाड़ी चलनी मुश्किल थी। अंत में बुमराह की मां ने घर चलाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। फिर कुछ दिनों के बाद एक निजी स्कूल में शिक्षक की नौकरी मिल गई।

एक काॅल ने बदल डाली थी जिंदगी
इस गेंदबाज ने आईपीएल के जरिए पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना ली। वह घरेलू क्रिकेट में गुजरात के लिए खेलते हैं। 18 मार्च 2014 को गुजरात मैच मुंबई से चल रहा था जिसे देखने के लिए मुंबई इंडियंस के कोच जाॅन राइट भी आए हुए थे। उन्होंने बुमराह की गेंदबाजी पर तब हैरानी जताई और गुजरात की कप्तानी कर रहे पार्थिव पटेल को कहा कि वो बुमराह को मेरा नंबर दे। इसके बाद बुमराह ने मुंबई इंडियंस के कोच से फोन पर पहली बार बात की जिसके बाद उन्हें 2013 के आईपीएल सीजन में ही खरीद लिया गया। इसके बाद बुमराह ने पीछे मुड़कर ना देखते हुए जनवरी 2016 में पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। बुमराह भारतीय टीम के लिए अबतक 12 टेस्ट मैचों में 62 विकेट, 58 वनडे मैचों में 103 तो 42 टी20 मैचों में 51 विकेट झटक चुके हैं।
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