फीफा में रेफ़री सीख रहे हैं गाली
बीबीसी संवाददाता, जोहानेसबर्ग से
ब्राज़ील के रेफ़री अंग्रेज़ी के अपशब्दों को सीख रहे हैं. घबराइए मत, रेफ़री को फ़ीफ़ा कोई नई भूमिका नहीं दे रहा है. दरअसल अपने ख़राब व्यवहार के लिए मशहूर इंग्लैंड की टीम अपना पहला मैच शनिवार को अमरीका के ख़िलाफ़ खेलेगी. इंग्लैंड की टीम में वेन रूनी जैसे कई खिलाड़ी हैं, जिन्हें ख़राब व्यवहार और गाली-गलौज के लिए फटकार मिल चुकी है और कई बार उन्हें मैदान से भी बाहर निकाला जा चुका है.
इस कारण रेफ़री कोई रिस्क नहीं लेना चाहते, अगर उन्हें अंग्रेज़ी के अपशब्द समझ में ही नहीं आए तो वे कार्रवाई कैसे करेंगे. तो इसलिए शनिवार के मैच में रेफ़री की भूमिका निभाने वाले ब्राज़ील के कार्लोस साइमन अपने सहयोगियों के साथ अंग्रेजी के उन अपशब्दों का अध्ययन कर रहे हैं, जो खिलाड़ी मैदान पर इस्तेमाल कर सकते हैं.
हालाँकि उनका कहना है कि वे सभी 11 भाषाओं की गाली नहीं सीख रहे लेकिन कम से कम अंग्रेज़ी के अपशब्द तो सीख ही सकते हैं. आपको याद होगा पिछले विश्व कप के फ़ाइनल में फ़्रांस के ज़िनेदिन ज़िदान ने इटली के मैतरात्सी को सर से टक्कर मारी थी. और किसी को ये अंदाज़ा ही नहीं लग पाया था कि मैतरात्सी ने ज़िदान को क्या अपशब्द कहे थे, जिससे ज़िदान जैसा शांत खिलाड़ी भड़क उठा था. तो इस बार तैयारी ऐसी किसी घटना को रोकने की है.
फ़्रांस की टीम विश्व कप में कैसा प्रदर्शन करेगी, ये तो आने वाला समय ही बताएगा. लेकिन टीम के कोच रेमंड डोमेनेच हमेशा अपने व्यवहार के कारण चर्चा में रहते हैं. विश्व कप से ठीक पहले इटली के अख़बार ला रिपब्लिका में कराए गए एक सर्वेक्षण में फ़्रांसीसी टीम के कोच डोमेनेच को सबसे बुरा कोच चुना गया है. अख़बार के पाठकों की राय में डोमेनेच का अक्खड़पन उनके विवादों में रहने की बड़ी वजह है.
इस सर्वेक्षण में डोमेनेच ने इटली के कोच मार्चेलो लिप्पी और इंग्लैंड के कोच फ़ेबियो कपेलो को पीछे छोड़ा है. वैसे लिप्पी और कपेलो भी अपने ग़ुस्सैल स्वभाव के कारण हमेशा ही सुर्ख़ियों में रहते हैं.
डोमेनेच के ख़राब व्यवहार के कारण तो एक बार टीम ने उनके ख़िलाफ़ बग़ावत का झंडा ही बुलंद कर दिया था. पिछले साल विश्व कप क्वालीफ़ाइंग मैच के दौरान रोमानिया के ख़िलाफ़ 1-1 से बराबरी के बाद टीम ने डोमेनेच को विद्रोह के लिए चेता दिया था.
वैसे इटली के लोग डोमेनेच से इसलिए भी नाराज़ हैं क्योंकि उन्होंने इटली पर आरोप लगाया था कि वे रेफ़री को घूस देते हैं. विश्व कप फ़ुटबॉल में किसका सितारा बुलंद होगा- ये कहना तो मुश्किल है. लेकिन पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो और अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है. मीडिया में इन दोनों खिलाड़ियों की तुलना का दौर जारी है. स्पेन के दो अलग-अलग शीर्ष क्लबों से खेलने वाले इन दोनों खिलाड़ियों की तुलना नई नहीं है. लेकिन विश्व कप इन दोनों खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा मंच है, अपने आप को साबित करने का.
मेसी ने बार्सिलोना की ओर से खेलते हुए कई यादगार प्रदर्शन किए हैं, तो रोनाल्डो इस समय रियाल मैड्रिड का हिस्सा हैं. इससे पहले रोनाल्डो इंग्लैंड के मशहूर क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड की ओर से खेल चुके हैं और टीम का अहम हिस्सा रह चुके हैं. इस विश्व कप फ़ुटबॉल प्रतियोगिता में दोनों सितारे उसी समय आमने-सामने हो सकते हैं, जब उनकी टीमें फ़ाइनल में पहुँचे. लेकिन दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ही उनकी टीमों का भविष्य निर्भर करता है.
हाल ही में इंग्लिश प्रीमियर लीग के मैनेजरों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में 83 प्रतिशत वोट मेसी के पक्ष में पड़े हैं यानी मैनेजरों की मानें तो मेसी इस विश्व कप में चमकेंगे. लेकिन रोनाल्डो इस पर गर्व कर सकते हैं कि हाल ही में लंदन के चर्चित मैडम तुसॉद म्यूजियम में उनकी मोम की मूर्ति लगाई गई है. और वे पेले, बेकम और जेरार्ड जैसे स्टार खिलाड़ियों की जमात में शामिल हो गए हैं जबकि मेसी को अभी इसका सौभाग्य नहीं मिला है.
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