इथियोपिया के अदीस अबेबा में रहने वाली इस एथलीट ने 1998 में अपने दौड़ने के करियर की शुरुआत की थी। एक शारीरिक शिक्षा शिक्षक ने उनकी प्रतिभा को देखा और उन्हें अंतर-विद्यालय चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। वह वर्तमान में इथियोपिया में ओरोमिया जेलों का प्रतिनिधित्व करती हैं और डॉ. वोल्डेमेस्केल कोस्ट्रे द्वारा प्रशिक्षित हैं।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2008 | Women 10000m | 12 |
| 2004 | Women 10000m | S रजत |
उनके चचेरे भाई, डेरार्टू तुलु, इथियोपिया के लिए 10000 मीटर स्पर्धा में दो बार ओलंपिक चैंपियन रहे हैं। एक अन्य चचेरे भाई, बेकेलू डिबाबा भी एक ट्रैक धावक थे और उन्हें उनकी बहन कहा जाता है। उनके छोटे भाई डेजेन 800 मीटर श्रेणी में उभरती हुई प्रतिभा हैं, जबकि उनकी छोटी बहन जेनज़ेबे क्षेत्रीय क्रॉस कंट्री स्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।
एथलीट की यात्रा तब शुरू हुई जब एक शारीरिक शिक्षा शिक्षक ने उसके दौड़ने के कौशल पर ध्यान दिया। इसके कारण उसे अंतर-विद्यालय चैंपियनशिप में भाग लेने का मौका मिला, जो उसके एथलेटिक करियर की शुरुआत थी। वह 1998 से ही इस खेल के लिए समर्पित है।
वह वर्तमान में इथियोपिया स्थित ओरोमिया प्रिज़न्स नामक क्लब से जुड़ी हुई हैं। डॉ. वोल्डेमेस्केल कोस्ट्रे के मार्गदर्शन में, वह विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा जारी रखती हैं।
डॉ. वोल्डेमेस्केल कोस्ट्रे उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी विशेषज्ञता उनके करियर को आकार देने और कई उपलब्धियाँ हासिल करने में सहायक रही है।
एथलीट की पारिवारिक पृष्ठभूमि एथलेटिक्स में उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरी हुई है। विश्व मंच पर तिरुनेश डिबाबा की सफलता एक प्रेरणा का स्रोत है। डेरार्टू तुलु की ओलंपिक जीत लंबी दूरी की दौड़ में परिवार की क्षमता को और उजागर करती है।
ट्रैक रनिंग में बेकेलू डिबाबा के योगदान ने इस एथलेटिक वंश में उत्कृष्टता की एक और परत जोड़ दी है। डेजेन और जेनज़ेबे सहित युवा पीढ़ी इस विरासत को जारी रखने की संभावना दिखाती है।
जुलाई 2024 तक, एथलीट राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा जारी रखने की योजना बना रही है। उसका ध्यान अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने और डॉ. वोल्डेमेस्केल कोस्ट्रे के मार्गदर्शन में नए मील के पत्थर हासिल करने पर है।
एक शारीरिक शिक्षा शिक्षक द्वारा खोजे जाने से लेकर धावकों के एक प्रतिष्ठित परिवार का हिस्सा बनने तक की एथलीट की यात्रा उसके समर्पण और प्रतिभा को दर्शाती है। अपने कोच और परिवार से निरंतर समर्थन के साथ, वह अपने एथलेटिक करियर में नई ऊंचाइयों को छूने का लक्ष्य रखती है।