जोहांसबर्ग। हॉलैंड की फुटबाल टीम की 36 महिला प्रशंसकों को हॉलैंड-डेनमार्क के बीच सोमवार को जोहांसबर्ग में खेले गए ग्रुप मुकाबले के दौरान मैदान से बाहर निकलने का आदेश सुनाया गया था। इन महिला प्रशंसकों को फीफा के आदेश पर मैदान से हटाया गया था।
समाचार एजेंसी डीपीए ने दक्षिण अफ्रीका के समाचार पत्र 'द स्टार' के माध्यम से खबर दी है कि इन 36 महिलाओं ने हॉलैंड की एक बीयर बनाने वाली कंपनी द्वारा दी गई बेहद चुस्त नारंगी रंग की पोशाक पहन रखी थी। हॉलैंड की कंपनी-बावारिया ने इन महिलाओं को विश्व कप के लिए खास तौर पर तैयार नारंगी रंग की पोशाक दी थी, जो उसने खासतौर पर अपने उत्पादों के प्रचार के लिए तैयार की थी।
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बावरिया को फीफा की आधिकारिक प्रायोजक कंपनी-बडवेइसर का प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। इस कंपनी ने फीफा विश्व कप के दौरान प्रचार और प्रसार के काम के लिए खासतौर पर इन महिलाओं को नारंगी रंग की आपत्तिजनक पोशाक मुहैया कराई है।
इन महिलाओं में शामिल एक महिला ने 'द स्टार' को बताया कि वह अपने साथियों के साथ मैदान में बैठी मैच का लुत्फ ले रही थी और अपने देश की टीम के सम्मान में गीत गा रही थी, तभी फीफा का एक अधिकारी उनके पास आया और कहा कि वे यह पोशाक पहनकर मैदान में नहीं बैठ सकतीं। महिला ने बताया कि फीफा अधिकारी उन्हें स्टेडियम में स्थित फीफा के दफ्तर में ले गया, जहां उनके साथ कई घंटों तक पूछताछ की गई।
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महिला ने कहा, "हमें बताया कि हम इस तरह किसी कंपनी के उत्पाद का प्रचार और प्रसार नहीं कर सकतीं। दक्षिण अफ्रीका में इसकी इजाजत नहीं है और इसके लिए छह महीने की जेल की सजा हो सकती है। हम सभी घबरा गईं और रोनी लगीं।" इस घटना को लेकर बावरिया कंपनी ने नाराजगी जताई है। कंपनी ने कहा है कि उसने प्रचार के लिए महिलाओं को कपड़े नहीं मुहैया कराए और फिर उन कपड़ों पर कंपनी ने किसी प्रकार का विज्ञापन नहीं किया है। नारंगी रंग पर फीफा का एकाधिकार नहीं है। महिलाओं के साथ गलत व्यवहार किया गया है।
दूसरी ओर, फीफा ने कहा है कि बावरिया कंपनी का प्रचार करने का और हॉलैंड की टीम को अपने साथ जोड़ने का तरीका काफी पुराना है। इससे पहले 2006 विश्व कप में भी कंपनी ने इस तरह का प्रचार अभियान चलाया था। इस संबंध में फीफा ने माफी मांगने से इंकार कर दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।