अवैध रूप से टीएफआई पर काबिज हैं हरीश : जगतियानी
जगतियानी ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा कि 1976 में उन्होंने ही टीएफआई की स्थापना की जिसे 1985 में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने मान्यता प्रदान की थी।
उल्लेखनीय है कि जगतियानी खुद को टीएफआई का महासचिव और प्रख्यात वकील राम जेठमलानी को इसका अध्यक्ष बताते हैं, वहीं कुमार ने जगतियानी के दावों को फर्जी बताते हुए खुद को टीएफआई का अध्यक्ष बताया है।
जगतियानी का कहना है कि कुमार के दावे न्यायालय के आदेश के खिलाफ हैं क्योंकि न्यायालय अपना फैसला सुना चुकी है और उसमें कुमार खेमे को टीएफआई के बैनर का इस्तेमाल नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
कुमार के दावे के खिलाफ जगतियानी द्वारा लखनऊ जिला न्यायालय की शरण लेने के बाद सिविल जज (जूनियर डिविजन) दक्षिणी लखनऊ राजनारायण सिंह ने 20 मार्च, 2003 को फैसला सुनाते हुए कुमार को वादी जगतियानी के लखनऊ स्थित पंजीकृत कार्यालय में किए जा रहे कार्यो में किसी तरह का हस्तक्षेप न करने का सख्त आदेश दिया था।
साथ ही न्यायालय ने कुमार खेमे को भारतीय ओलंपिक संघ से अवैधानिक रूप से कोई संबद्धता अथवा मान्यता प्राप्त करने से मना किया था। दूसरी ओर, कुमार दावा करते हैं कि टीएफआई का मान्यताप्राप्त पंजीकृत दफ्तर लखनऊ में नहीं बल्कि बेंगलुरू में स्थित है।
पिछले वर्ष 16 दिसंबर को आईएएनएस से बातचीत के दौरान कुमार ने जगतियानी पर बिल्कुल वही आरोप मढ़े थे, जो आज जगतियानी कुमार पर मढ़ रहे हैं। कुमार ने कहा था कि जगतियानी फर्जी तरीके से टीएफआई को हाईजैक किए हुए हैं और अवैध तरीके से अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों का आयोजन कराकर अपनी जेब भर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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