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अफगानिस्तान महिला फुटबॉल टीम बुरे हाल में, जान बचाने के लिए खिलाड़ी रोकर लगा रही हैं गुहार

नई दिल्लीः अफगानिस्तान इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है। अफगानिस्तान में खेलों को लेकर बहुत बुरी स्थिति हो चुकी है क्योंकि तालिबान ने दो दशक के बाद देश पर फिर से कंट्रोल करना शुरू कर दिया है। अफगानिस्तान फुटबॉल महिला टीम की सदस्यों ने जब पूर्व अफगान महिला फुटबॉल टीम कप्तान खालिदा पोपल को फोन किया तब उनको यही सलाह दी गई कि वे अपने घरों को खाली कर दें और ऐसे लोगों से बचें जो ये जानते हैं कि ये लड़कियां खिलाड़ी हैं।

भय इतना है कि इन लड़कियों को उनका अपना इतिहास ही मिटाने के लिए कह दिया गया है। तालिबान अब अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात को फिर से स्थापित कर रहा है।

पोपल ने डेनमार्क से एक टेलीफोन साक्षात्कार में एसोसिएटेड प्रेस को बताया, "मैं सोशल मीडिया चैनलों को हटाने, भागने और खुद को छिपाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हूं।"

"इससे मेरा दिल टूट जाता है क्योंकि इन सभी वर्षों में हमने महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम किया है और अब मैं अफगानिस्तान में अपनी महिलाओं को चुप रहने और गायब होने के लिए कह रही हूं। उनकी जान को खतरा है।"

34 वर्षीय पोपल 1996 में तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के बाद अपने परिवार के साथ भाग गई थी। फिर वे दो दशक पहले दोबारा अफगानिस्तान लौट आई थी। वे पाकिस्तान में एक शरणार्थी शिविर में रह रही थी। तब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सुरक्षा के साथ था और पोपल ने महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देते हुए एक फुटबॉल टीम खड़ी करने में रोल अदा किया।

2007 तक, पोपल के पास ऐसी कई खिलाड़ी थीं जो अफगानिस्तान की पहली महिला राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनने के लिए तैयार थी। लेकिन तब भी उनको खूब मौत की धमकियां मिली।

पोपल ने कहा, 'हमें जर्सी पहनकर बहुत गर्व महसूस हुआ। यह अब तक का सबसे खूबसूरत, सबसे अच्छा एहसास था।"

उन्होंने कहा, "मुझे मौत की इतनी धमकियां और चुनौतियां मिलीं क्योंकि मैं राष्ट्रीय टीवी पर थी। मैं तालिबान को अपना दुश्मन कह रही थी।"

पोपल ने 2011 में अफगानिस्तान फुटबॉल एसोसिएशन में एक निदेशक के रूप में टीम के समन्वय पर ध्यान केंद्रित करने के लिए खेलना बंद कर दिया। लेकिन धमकियां जारी रहीं और अंततः उन्हें 2016 में डेनमार्क में शरण लेने के लिए अफगानिस्तान से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

मौजूदा हालात बहुत बुरे हैं। इससे पहले महिला टीम को अफगानिस्तान फेडरेशन लीडरशिप के भ्रष्टाचार से भी जूझना पड़ा था। अब लड़कियों के हालात ऐसे हैं कि उनके दुश्मन कई हो चुके हैं और वे खुद की सुरक्षा कर पाने में भी असमर्थ हैं।

पोपल ने कहा, "हमने दुश्मन नहीं बनाए होते। वे रो रही हैं। वो बस रो रही हैं... उदास हैं। वे हताश की तरह हैं। उनके पास इतने सारे प्रश्न हैं। उनके साथ जो हो रहा है वह उचित नहीं है।

"वे छिप रही हैं। उनमें से अधिकांश अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के पास जाकर छिप गई क्योंकि उनके पड़ोसी जानते हैं कि वे खिलाड़ी हैं। तालिबान हर जगह फैल गया है। वे डर पैदा कर इधर-उधर जा रहे हैं।"

अब यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि अफगानिस्तान की महिला टीम फिर से खेल पाएगी।

पोपल ने कहा, "यह देखना बहुत दर्दनाक है जब कल सरकार ने आत्मसमर्पण किया। महिलाओं ने उम्मीद खो दी।"

Story first published: Tuesday, August 17, 2021, 12:42 [IST]
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