फीफा विश्व कप : सूना पड़ा है गांधी का पीटरमारित्जबर्ग
पीटरमारित्जबर्ग, 30 जून (आईएएनएस)। एक तरफ जहां पूरा दक्षिण अफ्रीका फीफा विश्व कप के जश्न में डूबा है वहीं महात्मा गांधी के संघर्षमयी जीवन का सबसे पहला गवाह पीटरमारित्जबर्ग रेलवे स्टेशन इन दिनों लोगों की बेरुखी के कारण वीरान है।
गांधी जी ने इसी जगह से एक बेरिस्टर से 'महात्मा' बनने तक का सफर शुरू किया था। यह स्थान दक्षिण अफ्रीका के क्वाजूलू नटाल प्रांत की राजधानी है और विश्व कप के नौ आयोजन स्थलों में से एक डरबन से महज 80 किलोमीटर दूर है लेकिन यहां विश्व कप को लेकर किसी प्रकार का उत्साह या उल्लास नहीं है।
गांधी जी से जुड़े होने के कारण पीटरमारित्जबर्ग रेलवे स्टेशन को धरोहर का दर्जा प्राप्त है। आम दिनों में यहां सैकड़ों पर्यटक आते हैं लेकिन चूंकी विश्व कप का आयोजन यहां नहीं हो रहा है लिहाजा यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या अभी नगण्य है।
रेलवे स्टेशन की मुख्य सफाईकर्मी पार्टीसिया को इस बात को लेकर निराशा है कि एक तरफ जहां पूरे दक्षिण अफ्रीका में पर्यटकों की धूम है वहीं यहां आने वाले लोगों की संख्या निराशाजनक स्तर तक पहुंच चुकी है।
पार्टीसिया ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "विश्व कप को लेकर हम काफी उत्साहित थे। हमें लगा था कि हमारे यहां भी बड़ी संख्या में पर्यटक आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे हमें निराशा हुई है। इसका कारण यह है कि यह स्थान डरबन और जोहांसबर्ग से सीधे तौर पर रेलवे से नहीं जुड़ा है। अगस्त तक यहां की स्थिति सुधरने की आशा है।"
इसी रेलवे स्टेशन ने गांधी जी ने दुनिया को पहली बार सत्याग्रह का संदेश दिया था। यह वही स्टेशन है जहां सात जून 1893 की एक सर्द सुबह में गांधी जी को रेलगाड़ी से सिर्फ इसलिए जबरन नीचे उतार दिया गया था क्योंकि वह श्वेत लोगों के लिए आरक्षित बोगी में बैठे थे। इसी के बाद गांधी जी ने इस देश में अन्याय के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी थी।
पीटरमारित्जबर्ग से जोहांसबर्ग को जोड़ने वाली सिर्फ एक रेलगाड़ी है। यह दिन में यहां से गुजरती है। मंगलवार को यहां से होकर कोई रेलगाड़ी नहीं गुजरती। यहां का स्टेशन मास्टर दो बजे दोपहर में आता है और 10 बजे रात को चला जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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