धौनी की 'जिद' टीम इंडिया को ले डूबी !
नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। ट़्वेंटी-20 विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम की जिस शर्मनाक अंदाज में विदाई हुई, उसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी क्योंकि क्रिकेट प्रेमियों को कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और उनके साथियों पर भरोसा था। परंतु खुद धौनी अपने कुछ अटपटे फैसलों को इस तरह दोहराते रहे कि आखिर में लोगों का यह भरोसा बेमानी साबित हुआ।
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के तीसरे संस्करण में पिछले दिनों जब धौनी की अगुवाई में ही चेन्नई सुपर किंग्स विजेता बनी तो लोगों को लगा कि कुछ यही कारनामा धौनी कैरेबियाई सरजमीं पर भी दोहराएंगे। लोगों की इस उम्मीद के पीछे धौनी और उनके धुरंधरों द्वारा पहला ट्वेंटी-20 विश्व जीतना भी एक आधार था लेकिन श्रीलंका से मिली हार ने सब कुछ बदलकर रख दिया। भारत ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 164 रनों का लक्ष्य रखा। इस लक्ष्य को श्रीलंकाई टीम ने बेहतरीन अदांज में हासिल किया। आखिरी गेंद पर श्रीलंका को मैच जीतने के लिए 3 रनों की जरूरत थी और चमाका कापूगेदारा ने छक्का लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाई।
आईपीएल के बाद कैरेबियाई जमीन पर उतरने के साथ ही धौनी ने एक के बाद एक कई ऐसे फैसले करने शुरू किए जिन पर सभी को अचरज हुआ। पहले दौर के दोनों मुकाबले में उनके फैसले सही साबित हुए क्योंकि टीम को पहले अफगानिस्तान और फिर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जीत मिली। परंतु धौनी की 'जिद' की झलक सुपर-8 मुकाबले में दिखनी शुरू हुई। पहले ही मैच में सामना आस्ट्रेलिया से था और बारबाडोस की उछाल भरी पिच पर उन्होंने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। यह फैसला लोगों को अजीब लगा क्योंकि आस्ट्रेलिया बल्लेबाजों ने धौनी के फैसले को गलत साबित किया। इसी मैच में धौनी आठ बल्लेबाजों और महज तीन विशेषज्ञ गेंदबाजों के साथ मैदान पर उतरे। नतीजा यह रहा कि भारतीय टीम को आस्ट्रेलिया से करारी हार का सामना करना पड़ा।
लोगों को लगा कि धौनी अपने इन कुछ फैसले पर गौर करेंगे और आगे के मैचों में ये गलतियां नहीं दोहराएंगे लेकिन यही कहानी उन्होंने मेजबान वेस्टइंडीज के खिलाफ हुए अहम मैच में भी दोहराई। यहां भी उन्होंने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया और आठ बल्लेबाज खिलाए। कैरेबियाई कप्तान क्रिस गेल ने धौनी के इन्ही अटपटे फैसलों और भारतीय टीम के लचर क्षेत्ररक्षण का लाभ उठाते हुए 98 रनों की पारी खेली। इससे भारतीय टीम बैकफुट पर चली गई और फिर हार का मुंह देखना पड़ा।
भारतीय टीम के पास मंगलवार को आखिरी मौका था, जहां वह अपनी साख को बचा सकती थी। श्रीलंका को 20 रनों के अंतर से हराने के सिवाय उसके पास कोई दूजा चारा नहीं था। परंतु ऐसा नहीं हो सका। धौनी ने यहां पहले वाली गलती नहीं दोहराई लेकिन बतौर खिलाड़ी वह एक बार फिर हार की एक वजह जरूर बन बैठे। उन्होंने न सिर्फ धीमी बल्लेबाजी की बल्कि एक निर्णायक कैच भी छोड़ा। यही नहीं मुरली विजय जैसे कुछ खिलाड़ियों को एकादश में लगातर जगह देना भी धौनी की इसी जिद का एक प्रमाण है।
उधर, क्रिकेट के जानकार पहले से आईपीएल को टीम के लिए थकाऊ मान रहे थे लेकिन धौनी हर बार इसके उलट यह कहते दिखे कि इससे भारतीय खिलाड़ियों को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा। गौरतलब है कि विश्व कप से विदाई के बाद भी उनका राग नहीं बदला। सेंट लूसिया में उन्होंने कहा कि टीम के खराब प्रदर्शन के लिए आईपीएल जिम्मेदार नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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