फीफा विश्व कप : स्पेन चैम्पियन, 'महाकुंभ' का समापन (राउंडअप)
पॉप स्टार शकीरा की अगुआई में दुनिया भर से आए नामचीन कलाकारों ने इस दौरान जहां रंगारंग कार्यक्रम पेश किया वहीं खिताबी मुकाबले को लेकर सॉकर सिटी स्टेडियम लाल और नारंगी रंग में सराबोर दिखा। मंडेला अपनी पत्नी ग्रासा माइकल के साथ गोल्फ कार्ट पर बैठकर स्टेडियम में पहुंचे। स्टेडियम में पहुंचते ही मंडेला ने तमाम दर्शकों का हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया। कुछ प्रशंसक उन्हें देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाए।
फीफा और एलओसी ने मंडेला को विश्व कप मुकाबलों के लिए खुला निमंत्रण दिया था। उनके 11 जून को हुए उद्घाटन समारोह में पहुंचने की खबर थी लेकिन उसी दिन परपोती की असमय मृत्यु के कारण उनका कार्यक्रम बदल गया था। मंडेला ने फाइनल के लिए पहुंचकर आयोजकों को खुश कर दिया।
समापन समारोह में अनेक अतिविशिष्ट अतिथि मौजूद थे। इनमें दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा, स्पेन की राजकुमारी सोफिया और अफ्रीकी देशों के कई प्रतिनिधि शामिल थे। विश्व कप की शुरुआत 11 जून को सॉकर सिटी स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका और मेक्सिको के बीच खेले गए मैच के साथ हुई थी। एक महीने तक चले इस महान आयोजन के दौरान कुल 64 मैच खेले गए।
स्पेन की टीम ने मिडफील्डर आंद्रेस इनिएस्ता द्वारा अतिरिक्त समय (116वें मिनट) में किए गए गोल की मदद से हॉलैंड को 1-0 से हराकर विश्व चैम्पियन होने का गौरव हासिल किया। वर्ष 2008 में यूरोपीयन चैम्पियनशिप जीतने वाली स्पेन की टीम ने पहली बार इस खिताब पर कब्जा किया है जबकि हॉलैंड की टीम के हाथ से तीसरी बार विश्व चैम्पियन बनने का मौका निकल गया।
पहली बार किसी यूरोपीय देश से बाहर दो यूरोपीय देशों के बीच खेले गए इस मैच के बाद विश्व फुटबाल को आठवां चैम्पियन मिला। यह दूसरा मौका है जब किसी टीम ने यूरोपीयन चैम्पियन होने के साथ-साथ विश्व कप जीता है। इससे पहले 1974 में जर्मनी ने यह कारनामा किया था।
इनिएस्ता के गोल और फिर मैच खत्म होने की सीटी बजने के साथ स्पेन के खिलाड़ियों, कोच, सहयोगी स्टाफ और सॉकर सिटी स्टेडियम में मौजूद लाल रंग की पोशाक पहने हजारों प्रशंसकों की खुशी देखने लायक थी। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे जबकि 32 वर्ष बार खिताब जीतने का मौका अपने हाथ से निकलने का गम साफ तौर पर हॉलैंड के खिलाड़ियों के चेहरों पर देखा जा सकता था।
स्पेन का नाम इससे पहले खिताब जीतने वाले पांच बार के चैम्पियन ब्राजील, चार बार के चैम्पियन इटली, तीन बार के चैम्पियन जर्मनी, दो बार खिताब जीत चुके उरुग्वे, दो बार के चैम्पियन अर्जेटीना, एक-एक बार खिताब जीत चुकीं इंग्लैंड एवं फ्रांस की टीमों के साथ जुड़ गया है। इन देशों के अलावा चेकोस्लोवाकिया, स्वीडन और हंगरी की टीमें भी फाइनल में पहुंच चुकी हैं लेकिन उन्हें खिताबी जीत नहीं मिली।
नौवीं बार विश्व कप में हिस्सा ले रही हॉलैंड की टीम पहली बार 1974 और दूसरी बार 1978 में फाइनल में पहुंची थी लेकिन बहुत कम अंतर से खिताबी जीत से चूक गई थी। रविवार को स्पेन ने एक बार फिर उससे चैम्पियन बनने का मौका छीन लिया।
आंकड़े स्पेन के साथ नहीं थे लेकिन सटीक भविष्यवाणी करके विख्यात हो चुके पॉल ऑक्टोपस बाबा ने स्पेन को खिताबी मुकाबले का विजेता घोषित कर दिया था। आंकड़ों के मुताबिक अब तक उस टीम ने कभी खिताब नहीं जीता है, जिसने विश्व कप की शुरुआत हार के साथ की हो। नहीं भूलना चाहिए कि स्पेन ने स्विट्जरलैंड के खिलाफ 0-1 से हार से अपने अभियान की शुरुआत की थी।
स्पेन को यह बात निराश कर सकती थी लेकिन पॉल बाबा की भविष्यवाणी से उसके लिए खिताबी जीत की आशा बनी रही। मीडिया के हुजूम के बीच पॉल ने शुक्रवार को ही इस बात का खुलासा कर दिया था कि स्पेन को हॉलैंड पर जीत मिलेगी। पॉल ने स्पेन और जर्मनी के बीच खेले गए दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले को लेकर बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी की थी।
स्पेन की टीम ने 32 टीमों की इस प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ होने का गौरव हासिल किया। उसे भी हालांकि खिताब का दावेदार माना जा रहा था लेकिन उससे पहले इटली, ब्राजील, जर्मनी, अर्जेटीना, इंग्लैंड और फ्रांस को गिना जा रहा था लेकिन ये सभी टीमें बारी-बारी से अपनी चुनौती खोती गईं। इस दौरान कुछ नई टीमों ने अंतिम-16 और क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई लेकिन सेमीफाइनल में अंतत: जर्मनी, हॉलैंड, स्पेन और उरुग्वे जैसे दिग्गजों को ही पहुंचने का मौका मिला।
जर्मनी और उरुग्वे सेमीफाइनल में हार गए। जर्मनी को स्पेन ने 1-0 से पराजित किया जबकि हॉलैंड ने उरुग्वे की चुनौती समाप्त की। इन दोनों टीमों के बीच तीसरे स्थान का प्लेऑफ मुकाबला हुआ, जिसमें जर्मनी ने शानदार खेल दिखाते हुए 3-2 से जीत दर्ज की और चौथी बार विश्व कप में कांस्य पदक हासिल किया।
उरुग्वे की टीम 1954 और 1970 में भी सेमीफाइनल में पहुंची थी लेकिन उसमें हारने के बाद उसे चौथे स्थान से ही संतोष करना पड़ा था। दोनों ही मौकों पर उरुग्वे की टीम को प्लेऑफ मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा था। दूसरी ओर, जर्मनी की टीम अब तक चार बार तीसरे स्थान पर रही है। इतनी अधिक बार किसी टीम ने तीसरे स्थान का प्लेऑफ मैच नहीं जीता है।
इटली और फ्रांस की टीमों की हालांकि बहुत बुरी गत हुई क्योंकि तमाम दिग्गज खिलाड़ियों से लैस होने के बावजूद ये टीमें अंतिम-16 दौर में भी जगह नहीं बना सकीं। फ्रांस की टीम ग्रुप स्तर पर एक भी मैच नहीं जीत सकी थी। मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जहां उसे हार मिली थी वहीं उरुग्वे ने उसे बराबरी पर रोका था। इटली की टीम को एक मैच में हार मिली जबकि उसे दो बार ड्रॉ खेलना पड़ा।
इटली को हराकर स्लोवाकिया की टीम ने ग्रुप-एफ से अंतिम-16 में पहुंचने का श्रेय हासिल किया था। पहली बार विश्व कप में खेल रहे इस छोटे से देश के लिए यह बहुत बड़ी सफलता थी। इसके अलावा सर्बिया, आइवरी कोस्ट, और ग्रीस का दूसरे दौर में नहीं पहुंच पाना भी चौंकाने वाला रहा। स्लोवाकिया को हालांकि इस दौर में हॉलैंड के हाथों 2-1 से हार मिली लेकिन यह टीम अपने शानदार खेल से लोगों का दिल जीतने में सफल रही।
घाना और अमेरिका के लिए भी दूसरे दौर में पहुंचना बड़ी खबर थी। अमेरिका का सफर तो यहीं समाप्त हो गया क्योंकि घाना ने उसे हराने के बाद क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया। क्वार्टर फाइनल में उसे हालांकि उरुग्वे के हाथों हार का सामना करना पड़ा। 1930 और 1950 में खिताब जीत चुकी उरुग्वे की टीम ने अपने अंतिम-16 दौर के मुकाबले में दक्षिण कोरिया को हराया था।
पहली बार विश्व कप खेल रहे स्लोवाकिया को हराकर क्वार्टर फाइनल में पहुंची हॉलैंड की टीम ने पांच बार के चैम्पियन ब्राजील को हराकर बहुत बड़ा उलटफेर किया। ब्राजील की टीम चिली को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में पहुची थी लेकिन हॉलैंड की टीम ने ब्राजील की एक न चलने दी और 2-1 से शानदार जीत दर्ज करके सेमीफाइनल में पहुंचने का गौरव हासिल किया।
इस हार ने ब्राजील की टीम के कोच कार्लोस डूंगा और उनके तीन सहयोगियों की नौकरी ले ली। हॉलैंड की टीम सेमीफाइनल में उरुग्वे को 3-2 से हराकर फाइनल में पहुंचे में सफल रही। स्पेन की टीम ने तीन बार के चैम्पियन जर्मनी को हराकर फाइनल में पहुंचने का श्रेय हासिल किया। जर्मनी की टीम खिताब का दावेदार मानी जा रही दो बार के चैम्पियन अर्जेटीना की टीम को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची थी। जर्मनी ने अपनी अंतिम-16 दौर के मुकाबले में इंग्लैंड को 4-1 से पराजित किया था।
अर्जेटीना ने हिग्वेन की शानदार हैट्रिक की बदौलत अपने अंतिम-16 दौर के मुकाबले में मेक्सिको को 3-1 से हराया था। अपने अंतिम-16 मैच में स्पेन ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाली टीम का गुरूर ध्वस्त किया था। स्पेन ने यह मैच डेविड विला के एकमात्र गोल की मदद से 1-0 से जीता था। अगले दौर में स्पेन की भिड़ंत पराग्वे से हुई और उसने एक बार फिर विला के गोल की मदद से यह मैच भी 1-0 से जीता।
पराग्वे की टीम जापान को 5-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल में पहुंची थी। जापान और उरुग्वे के हाथों दक्षिण कोरिया की हार के साथ विश्व कप में एशियाई चुनौती समाप्त हो गई। अर्जेटीना को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची जर्मनी की टीम तथा पराग्वे को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची स्पेनी टीम के बीच जोरदार टक्कर हुई, जिसमें स्पेन ने 1-0 से जीत दर्ज की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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