कंगारुओं की आदत में है क्रिकेट को बदनाम करना, पढ़िए 4 शर्मनाक हरकतें
नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन टेस्ट मैच के तीसरे दिन कंगारू एक बार फिर क्रिकेट को बदनाम करते हुए पकड़े गए। केपटाउन टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई ऑपनर बैनक्राफ्ट ने बॉल के साथ जो छेड़छाड़ की है, उसमें अकेला उनका दोष नहीं है। कप्तानी से हाथ धो कर बैठे स्मिथ ने प्रेस कांफ्रेंस कर स्वीकार किया है कि तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन लंच के दौरान बॉल टेंपरिंग को लेकर ड्रेसिंग रूम में डिसकस हुआ था। यानि, पूरी टीम का प्लान था कि लंच के बाद बॉल पर स्क्रैच करेंगे, ताकि कंडिशन बदलने के लिए नई बॉल मंगवाई जा सके। बैनक्राफ्ट ने इस पूरे मिशन को अंजाम दिया, लेकिन बेचारा यंग प्लेयर पेंट की जेब से लेकर पेंट के अंदर हाथ डालने तक कैमरे में कैद हो गया। खैर, स्मिथ और वॉर्नर पर इस हरकत के लिए गाज गिरी है, लेकिन 75 फीसदी मैच फीस जुर्माने के साथ मुख्य आरोपी बैनक्राफ्ट बच निकले हैं। यह याद रखना जरूरी है कि क्रिकेट को निम्न स्तर पर पहुंचाने में कंगारुओं की पुरानी आदत रही है। क्रिकेट में सबसे ज्यादा स्लेजिंग, अभद्रता से लेकर बॉल टेंपरिंग जैसे विवाद में उलझकर कंगारुओं ने खेल को मजाक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। केपटाउन की घटना के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के कुछ विवाद ऐसे हैं, जो अब भी याद आते हैं।

स्टीव स्मिथ का ब्रेन फेड (2017)
पिछले साल बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान बेंगलुरु टेस्ट में 'ब्रेन फेड' सबसे पॉपुलर शब्द रहा। उस दौरान टीम की कमान संभाल रहे स्मिथ ने कहा था कि उनका ब्रेन फेड हो गया है। मैच के दौरान एलबीडब्ल्यू का शिकार होने बाद, बेंगलुरु टेस्ट के दौरान ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ ने ड्रेसिंग रूम की तरफ देखकर DRS लेने में मदद मांगी थी, जो कि खेल भावना के विपरीत है। उसके बाद कप्तान कोहली ने मैदान में ही कड़ी आपति व्यक्त की थी। स्मिथ को इसके लिए माफी भी मांगनी पड़ी थी।

शेन वार्न हुए ड्रग्स का शिकार (2003)
ऑस्ट्रेलिया के राइट आर्म लेग ब्रेक स्पिनर शेन वार्न का क्रिकेट के मैदान के अंदर और बाहर हमेशा विवादों से पुराना नाता रहा है। लेकिन, 2003 विश्व कप से तुरंत पहले वार्न ने क्रिकेट को शर्मसार करने का काम किया, जब वे ड्रग्स के आरोप में पॉजिटिव पाए गए। उस दौरान वॉर्न को क्रिकेट से एक साल निलंबित कर दिया गया। उस वक्त तत्कालीन कप्तान स्टीव वॉ ने उनकी इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी को मुश्किल बताया था।

पोंटिंग का झूठ (2008)
सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के दौरान सेकेंड स्लिप में खड़े माइकल क्लार्क ने सौरव गांगुली कैच लपका और ऑस्ट्रेलियाई टीम जश्न मनाने लग गई। अंपायर के आउट दिए जाने के बाद भी गांगुली क्रीज छोड़ने के लिए तैयार नहीं थें, क्योंकि उनको पता था कि वे आउट नहीं है। उस दौरान रिकी पोंटिंग बार-बार कह रहे थे कि गांगुली साफ आउट है। लेकिन, रिप्ले में कंगारुओं की पोल खुल गई, जब बॉल पहले ग्राउंड को टच हुई और उसके बाद क्लार्क के हाथों में गई।

चैपल की 'बदनाम बॉल' (1981)
1981 का यह दृश्य बिल्कुल भी फनी नहीं है, इंटरनेशनल क्रिकेट मैच में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ट्रेवर चैपल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अंडरआर्म गेंद डाल कर सभी को हैरानी में डाल दिया। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच बेनसन ऐंड हेजेज वर्ल्ड सीरीज कप का तीसरा मैच खेला जा रहा था। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए इस मैच में आखिरी गेंद फेंकी जा रही थी और न्यूजीलैंड को मैच टाई करने के लिए 6 रनों की जरूरत थी। ट्रेवर चैपल ने अंडरआर्म बॉल डाल दी और ऐसा करने के लिए उन्हें, उनके भाई ग्रेग चैपल ने ही बोला था। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया मैच जीत गया, लेकिन यह क्रिकेट इतिहास की सबसे बदनाम बॉल थी जिसने खेल की भावनाओं की धज्जियां उड़ाई थी।
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