Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block

गोल्ड मेडल जीत चुके हैं 'महाभारत' के भीम, दमदार शरीर बनाने में लगे 3 साल

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 3 मई तक लाॅकडाउन बढ़ाया गया है। सड़के खाली पड़ गई हैं तो वहीं टीवी चैनलों पर लगातार आने वाले एपिसोड भी रूक गए। ऐसे में दूरदर्शन ने लोगों को फिर से पुराने दिन याद दिलाने के लिए रामायण के पुराने एपिसोड दिखाना शुरू कर दिया। तो वहीं दूसरी ओर डीडी भारती ने इसी चलन में महाभारत को शुरू कर दिया जो फिर चर्चा में आ गया है। महाभारत में भीम का रोल बेहद पसंद किया गया। लेकिन आप यह जानकर खुश होंगे कि भीम का किरदार निभाने वाला शख्स खेल में भी अपनी धाक जमा चुका है। वह एशियाड खेलों में गोल्ड मेडलिस्ट हैं।

डिस्क थ्रो में जीता था 'गोल्ड'

डिस्क थ्रो में जीता था 'गोल्ड'

भीम का किरदार निभाने वाले प्रवीण कुमार सोबती लंबी-चौड़ी कद-काठी के लिए पहचाने जाते हैं। वे भारत के हैमर थ्रो खिलाड़ी रहे हैं. प्रवीण ने कई प्रतियोगिताएं जीती और 1966 के कॉमनवेलथ गेम्स में डिस्कस थ्रो के लिए उनका सिलेक्शन किया गया। तब भारत ने एथलेटिक्स में 11 मेडल जीते थे जिसमें 5 गोल्ड, 5 ब्रोंज मेडल्स थे। सोबती ने इनमें से दो मेडल हासिल किए थे। यही नहीं बैंकॉक में एशियाड में उन्होंने डिस्क थ्रो में गोल्ड मेडल हासिल किया था। उन्होंने हैमर थ्रो में ब्रोंज भी पाया था। 1970 में भी अगले टूर्नामेंट में गोल्ड जीते थे। 1974 में उन्होंने तेहरान में सिल्वर मेडल जीता था।

अर्जुन अवॉर्ड भी पा चुके हैं

अर्जुन अवॉर्ड भी पा चुके हैं

यही नहीं वह बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के पूर्व जवान भी हैं। वह 1967 में अर्जुन अवॉर्ड भी पा चुके हैं। बीआर चोपड़ा की महाभारत में उनका किरदार बेहद पसंद किया गया है। पांच पांडवों के भाईयों में सोबती का अंदाज अलग ही दिखा। खेल के मैदान में बेहतरीन ख‍िलाड़ी होने के बावजूद उन्हें सीरियल महाभारत से पहचान मिली।

दमदार शरीर बनाने में लगे 3 साल

दमदार शरीर बनाने में लगे 3 साल

6 दिसंबर 1947 को जन्मे प्रवीण कुमार सोबती को दमदार शरीर बनाने में 3 साल लग गए थे। इसका खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू के दाैरान किया था। प्रवीण ने कहा, ''एक भी दिन ऐसा नहीं जब मैं 3 बजे ना उठा हूं। गांव में कोई जिम जैसी चीज नहीं थी और ना ही तब तक मैंने ऐसी चीज देखी थी। मां घर में जो चक्की अनाज पीसने के लिए इस्तेमाल करती थी, उसी की सिल्ल‍ियों का वजन उठाकर मैं ट्रेनिंग करता था। भोर के 3 बजे से सूरज निकलने तक मैं ट्रेनिंग करता था। तीन साल लगे शरीर बनाने में और जब जानने वालों ने मुझे देखा तो वो पहचान नहीं पाए। मैने अपना शरीर देसी खुराक से तैयार किया।

Story first published: Friday, April 17, 2020, 20:47 [IST]
Other articles published on Apr 17, 2020
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+