जलाशयों के सूखने से हो रही जानवरों की मौत
जयपुर, 1 जून (आईएएनएस)। राजस्थान में झुलसा देने वाली गर्मी के कारण तालाब और जलाशय तेजी से सूख रहे हैं जिसकी वजह से इंसानों के साथ-साथ जानवरों की भी मौतें हो रही हैं। सरकार की तरफ से जलाशयों को बचाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
पानी की तालाश में जंगलों से नजदीकी गावों का रुख कर रहे जानवरों के मरने की खबरें आ रही हैं। पानी की कमी बंदर, चीतल और चिंकारा हिरणों की मौत का कारण बन रही है।
मशहूर रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के निकट बरान जिले के शाहाबाद गांव में पानी की कमी होने से पिछले तीन दिनों में कम से कम 13 बंदरों की मौत हो गई।
शाहाबाद शहर के नजदीक तपस्वी जी कि बगीचा में रहने वाले रमेश ने आईएएनएस को बताया, "पास के जंगलों के बंदर यहां पर पानी की तलाश में आ रहे हैं। पिछले तीन दिनों में इस इलाके में 13 बंदरों की मौत हुई है।"
इसी तरह की खबरें बाड़मेड़ जिले से भी आ रही हैं जहां भालू की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। निर्जलीकरण की वजह से यहां पर 22 चिंकारा हिरणों की मौत हुई है।
गैर सरकारी संगठन 'इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल प्रोटेक्शन इन इंडिया' के प्रतिनिधि नरेश काद्यान ने बताया, "राजस्थान का वन विभाग जंगली जानवरों की देखभाल करने में असफल हो चुका है। बाड़मेड़ में पानी की कमी की वजह से 22 से अधिक चिंकारा हिरणों की मौत हो चुकी है जबकि राज्य के अन्य भागों से भी पानी की कमी की वजह से जानवरों के मरने की खबरें आ रही हैं।"
नरेश ने कहा कि इन जानवरों को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाया जाना चाहिए।
उधर, चित्तौड़गढ़ जिले से भी पिछले कुछ दिनों के दौरान चीतलों के मरने की सूचना हैं।
गैर सरकारी संगठन पीपुल फार एनीमल (पीएफए) के राजस्थान प्रभारी बाबूलाल जाजू ने बताया, "चित्तौड़गढ़ किले के समीप पिछले पांच से सात दिनों के बीच 11 चीतलों की मौत हुई है।"
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से जलाशय और तालाब सूख रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए सरकार की तरफ से मामूली कदम ही उठाए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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