कानपुर के कुलदीप यादव के चाइनामैन गेंदबाज बनने की कहानी
नई दिल्ली। जब आप अपने घरों में शायद चैन की नींद सो रहे होंगे (वैसे क्रिकेट फैंस सोते नहीं) तब कानपुर का छोड़ा कुलदीप यादव टीम इंडिया के लिए 'मैनचेस्टर में मैजिक' बिखेर रहा था। मंगलवार को खेले गए पहले टी-20 मुकाबले में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी और इस जीत के दो हीरो रहे। कमाल की गेंदबाजी करने वाले कुलदीप और अदभुत स्ट्रोक से चित्रकार पिकासो की तरह मैदान में रनों के रंग बिखेरने वाले लोकेश राहुल। टीम इंडिया की शानदार जीत में 'K' फैक्टर हावी रहा। कुलदीप ने कमाल की गेंदबाजी करते हुए इंग्लैंड को 159 रनों पर रोक दिया तो KL राहुल ने 54 गेंदों में विस्फोटक शतकीय पारी खेली और टीम को जीत दिला दी। KLassy Rahul के विशेषण से नवाजे गए इस अदभुत प्रतिभा के धनी खिलाड़ी के लिए यह पारी इसलिए भी खास थी क्योंकि उन्होंने 2016 के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय मैचों में कोई शतक जड़ा था। शतक ठोकने के ठीक बाद ड्रेसिंग रूम की तरफ राहुल का मनाया जश्न इस बात का पुख्ता प्रमाण थे कि पहले इंग्लैंड दौरे के पहले मैच में ही इस खिलाड़ी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। टीम में काफी लंबे समय बाद जगह पाने वाले इस खिलाड़ी ने कप्तान कोहली का सेलेक्शन वाला 'सिरदर्द' और भी बढ़ा दिया है।

कुलदीप को कुली बुलाते हैं माही :
बात उस खिलाड़ी की जिसकी फिरकी पर पिछले सप्ताह तक ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की धुनाई करने वाले अंग्रेज बल्लेबाज नाचते दिखे। नाम है कुलदीप यादव, वैसे तो इन्हें अब किसी परिचय की दरकार नहीं है लेकिन इनके गेंदबाज बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है। एक ऐसा लेग स्पिन्नर (चाइनामैन गेंदबाज) जो थोड़े से समय में क्रिकेट खिलाड़ियों और एक्सपर्ट्स का भी चहेता बन गया। सचिन तेंदुलकर और हर्षा भोगले भी इनकी उंगलियों से बिखेरे जादू पर लट्टू हो गए। प्यार से धोनी इन्हें 'कुली' बुलाते हैं और कप्तान कोहली के भी ये खास चहेते हैं। ठीक एक साल पहले यही वो खिलाड़ी थे जिन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में डेब्यू करवाने के लिए कोहली-कुंबले की अनबन पूरी दुनिया के सामने आ गई थी। कप्तान के भरोसे पर कुलदीप मैच दर मैच खड़े उतर रहे हैं तभी दुनिया के सबसे महान लेग स्पिन्नर शेन वार्न ने भी इनसे मिलने और इनकी गेंदबाजी देखने के बाद कहा कि अगर धैर्य से गेंदबाजी करते रहें तो ये विश्व के सबसे शानदार स्पिनर बन सकते हैं। जिस खिलाड़ी की पूरी दुनिया में इतने चाहने वाले हैं उनके खिलाड़ी बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है।कुलदीप के पिता उत्तर प्रदेश के उन्नाव में ईंट भट्टा के मालिक हैं।

"मेरे को सिर्फ विकेट निकालना है'
कुलदीप यादव ने कानपुर में जब क्रिकेट अकादमी ज्वाइन किया तो वो एक तेज गेंदबाज बनना चाहते थे लेकिन उनके कोच कपिल पांडे ने कुछ ऐसा कहा जो शुरुआती दिनों में उनके लिए काफी मुश्किल भरा था। यह उनके कोच थे जिन्होंने कुलदीप को बाएं हाथ से गेंदबाजी की सलाह दी थी और तेज गेंदबाज के बजाए चाइनामैन गेंदबाज बनने का टफ टास्क दिया। यह उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था लेकिन उन्होंने मेहनत की और यह मान लिया कि स्पिन गेंदबाजी ही उनके लिए एक बेहतर विकल्प है। wrong'un गेंदबाजी की कला में माहिर होने के लिए इस खिलाड़ी ने कड़ी मेहनत की और अपने कला में विविधता के साथ अंडर-19 में शानदार प्रदर्शन करने वाले इस खिलाड़ी ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुलदीप यादव ने 17 साल की उम्र में U-19 का पहला गेम साल 2012 में खेला था। खूब विकेट झटकने के बावजूद वो चयनकर्ताओं को प्रभावित नहीं कर सके लेकिन 2014 में खेले गए अंडर-19 मैचों में उनके प्रदर्शन ने सबका दिल जीता और उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि "मेरे को सिर्फ विकेट निकालना है'. उनकी इसी लगन ने उन्हें टीम में जगह दिलाई। ICC अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलते हुए इन्होंने स्कॉटलैंड के खिलाफ हैट्रिक लेने का कारनामा किया था।

सचिन को आउट करने के बावजूद नहीं हुआ IPL डेब्यू :
कुलदीप के बारे में एक और किस्सा काफी मशहूर हुआ। टीम इंडिय के इस स्पिनर को मुंबई इंडियंस ने साल 2012 में अपनी आईपीएल टीम के लिए खरीदा था। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को इस खिलाड़ी ने नेट प्रैक्टिस के दौरान अपने wrong'un से आउट कर दिया था, लेकिन सचिन की गिल्लियां बिखेड़ने के बावजूद भी इस खिलाड़ी की प्रतिभा को कमतर आंका गया और इन्हें आईपीएल में डेब्यू करने का मौका नहीं मिला। कोलकाता नाईट राइडर्स की टीम ने इन्हें 2014 में खरीदा लेकिन ये वहां भी अपना आईपीएल डेब्यू नहीं कर पाए लेकिन चैंपियंस लीग के मैचों में सुनील नारायण के सहायक गेंदबाज की भूमिका में इन्होंने अपनी इकोनॉमिकल गेंदबाजी से सबको प्रभावित किया और तब इन्हें फर्स्ट क्लास और लिस्ट-A क्रिकेट में भी खेलने का मौका मिला।

कुलदीप ने किया था ड्रीम डेब्यू :
भारत के सबसे खूबसूरत मैदान धर्मशाला में कुलदीप यादव ने टेस्ट मैच में साल 2017 में डेब्यू किया था। कमाल की बात यह है कि कंधे की चोट की वजह से बाहर चल रहे विराट कोहली की जगह उन्हें टीम प्लेइंग-11 में शामिल किया गया था। उन्होंने इस मौके को दोनों हाथों से लपका और 68 रन देकर चार सफलताएं अर्जित की। टेस्ट में दुनिया के सबसे धाकड़ बल्लेबाजों में से एक माने जाने वाले डेविड वार्नर उनका पहला शिकार बने। भारतीय टीम के 82 साल के क्रिकेट इतिहास में वो पहले चाइनामैन गेंदबाज हैं जो टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

फीफर लेने वाले पहले चाइनामैन :
कुलदीप यादव टी-20 क्रिकेट में 5 विकेट लेने वाले पहले चाइनामैन गेंदबाज बन गए हैं। इससे पहले 21 देकर 4 विकेट कुलदीप यादव का ही रिकॉर्ड था जो उन्होंने कुछ दिन पहले आयरलैंड के खिलाफ बनाया था। भारत की तरफ से टी-20 क्रिकेट में अब तक केवल तीन गेंदबाज ही एक मैच में 5 या उससे ज्यादा विकेट ले चुके हैं। युजवेंद्र चहल ने साल 2017 में (बेंगलुरू) इंग्लैंड के खिलाफ 6 विकेट झटके थे वहीं भुवनेश्वर कुमार ने साल 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ (जोहांसबर्ग) 5 विकेट झटके थे। यह तीनों खिलाड़ियों का टी-20 में अब तक का बेस्ट प्रदर्शन है।

विंडीज बनाम दक्षिण अफ्रीका के बीच भी हुआ यह कारनामा :
क्रिकेट में बहुत कम ऐसे मौके भी आते हैं जब एक ही टीम के बल्लेबाज ने टी-20 में शतक भी जड़ा हो और उसी टीम के गेंदबाज ने 5 विकेट भी झटके हों। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीन साल पहले (2015) विंडीज और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए मुकाबले में भी कुछ ऐसा ही हुआ था. दक्षिण अफ्रीका खिलाड़ी मॉर्नी वैन वेक ने शतक जड़ा था और डेविड विजे ने 5 विकेट भी झटके थे। इस मैच में शतक के लिए बल्लेबाज को मैन ऑफ द मैच दिया गया जबकि इंग्लैंड के खिलाफ कुलदीप यादव को।
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