बीबीसी संवाददाता, जोहानेसबर्ग से
इतिहास का हिस्सा बनना किसको अच्छा नहीं लगता. इसके पन्ने कई बार आपको भयावह एहसास दिलाते हैं, तो कई बार गर्व से आपका सिर ऊँचा भी करते हैं. क्या इस बार विश्व कप में एक ऐसा इतिहास बनेगा, जिसमें ख़ुद इतिहास का हिस्सा बन चुका शख़्स इस नए इतिहास का साक्षी होगा. दक्षिण अफ़्रीका में लंबे समय से ये चर्चा ज़ोरों पर है क्या नेल्सन मंडेला विश्व कप फ़ुटबॉल के उदघाटन समारोह का हिस्सा बनेंगे?
इस चर्चा को कभी विराम नहीं मिलता. 91 वर्षीय नेल्सन मंडेला के क़रीबी लोग जहाँ उनके शामिल होने की बात कर रहे हैं, तो उनकी ख़राब तबीयत उनके इतिहास का हिस्सा बनने की राह में अवरोध बन सकती है. और अगर मंडेला इतिहास का हिस्सा बने भी तो उनकी उपस्थिति काफ़ी कम समय के लिए होगी. लेकिन मंडेला की क्षणिक मौजूदगी भी दक्षिण अफ़्रीकी लोगों को तरोताज़ा कर देगी. जैसा कि राष्ट्रपति ज़ूमा ने कहा,'' अगर वे समारोह में नहीं आते हैं, तो भी बात समझ में आती है और वे आ गए तो हमारे लिए ये बोनस होगा.''
खिसियाए कपेलो
इंग्लैंड के फ़ुटबॉल प्रेमी जहाँ भी जाते हैं, आयोजकों को उन पर ख़ास नज़र रखनी होती है. उनका व्यवहार कब कैसा हो जाए- कोई नहीं कह सकता.लेकिन आजकल इंग्लैंड टीम के कोच फ़ेबियो कपेलो का ग़ुस्सा चर्चा में है. घायल होने के कारण कप्तान रियो फ़र्डीनेंड को खो चुके कपेलो अपनी टीम को लेकर चिंतित हैं.
लेकिन उनकी नाराज़गी शायद अभ्यास मैच में टीम के ख़राब प्रदर्शन को लेकर ज़्यादा है. अब कपेलो ग़ुस्सा निकाले भी तो किसपर, पिल पड़े फोटोग्राफ़रों और मीडियाकर्मियों पर. ठीक उसी तरह जैसे हमारे हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के जाने-माने सितारे करते हैं. रस्टेनबर्ग के अपने बेस से ट्रेनिंग के लिए निकल रहे खिलाड़ियों की फोटो खींच रहे फोटोग्राफ़रों पर कपेलो बिफर पड़े. शनिवार को इंग्लैंड की टीम अपना पहला मैच अमरीका से खेलेगी. अब कपेलो के व्यवहार को आप क्या कहेंगे- खिसियानी बिल्ली खंभा नोंचे.
अच्छे व्यवहार की अपील
जल्द ही फ़ुटबॉल विश्व कप शुरू हो रहा है और इस प्रतियोगिता से दक्षिण अफ़्रीका का दाँव पर लगा हुआ है. आयोजन, सुरक्षा व्यवस्था और भी बहुत कुछ. इसी के मद्देनज़र दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ने देशवासियों से अपील की है कि वे प्रतियोगिता के दौरान अच्छा व्यवहार करें. लोगों को सलाह दी गई है कि सार्वजनिक जगह पर वे बाहर से आने वाले लोगों से अच्छा व्यवहार करें.
वैसे आम तौर पर दक्षिण अफ़्रीकी लोगों का व्यवहार आगंतुकों के लिए अच्छा होता है और मैंने भी इसे महसूस किया है, लेकिन अपराध की घटनाओं के कारण सरकार को बार-बार शर्मिंदा होना पड़ता है. सरकार नहीं चाहती कि विश्व कप के दौरान स्थानीय लोगों के व्यवहार के कारण मेज़बान देश सुर्ख़ियाँ बटोरे. अब सरकार की इस अपील का कितना असर पड़ेगा, ये तो आने वाला समय ही बताएगा.