फीफा विश्व कप में अर्जेंटीना खिताब जीतना तो दूर सेमीफाइनल तक में नहीं पहुंच सकी थी। क्वार्टरफाइनल में उसे शर्मनाक हार झेलनी पड़ी। अर्जेंटीना की इतनी बड़ी किरकिरी की वजह से फुटबॉल संघ ने महान फुटबॉलर व टीम के कोच डिएगो माराडोना को कोच पद से मुक्त करने का निर्णय लिया। सही मायने में देखें तो माराडोना को उनकी काबीलियत नहीं बल्कि बड़े बोल ले डूबे।
वो ऐसे कि फीफा विश्व कप की शुरुआत से लेकर अंत तक माराडोना ने खेल पर कम मीडिया में अपनी प्रशंसा पर ज्यादा ध्यान दिया। सुर्खियों में छाए रहने की ललक ही थी, जिसकी वजह से उनकी टीम के अंदर जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास भर गया। विश्व कप के पहले दिन माराडोना ने दावा किया कि यह विश्व कप लिओनेल मेस्सी को होगा। जबकि वही मेस्सी पूरे विश्व कप में एक भी गोल नहीं कर सके। माराडोना जिसे अपना ट्रम्प कार्ड समझते थे, वो जर्मनी के खिलाफ क्वार्टरफाइल जैसे अमह मुकाबले में फिसड्डी साबित हुए। यही नहीं विश्व कप के दौरान उन्होंने कई बार अर्जेंटीना की मजबूती के खोखले स्तंभ गाड़े।
गौरतलब है कि विश्व कप से टीम के बाहर होने के बावजूद इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि मैराडोना यह जिम्मेदारी अगले विश्व कप तक निभा सकते हैं। परंतु ऐसा नहीं हुआ। अर्जेंटीना फुटबाल संघ (एएफए) ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि माराडोना आगे टीम के कोच नहीं रहेंगे। एएफए के अध्यक्ष जुलियो ग्रोंडोना चाहते थे कि माराडोना टीम के कोच बने रहें परंतु इस संबंध में दोनों के बीच बात नहीं बनी। एएफए की कार्यकारिणी ने आमराय से मैराडोना का अनुबंध न बढ़ाने का फैसला किया।