पहलवान सोनिका की याचिका खारिज
न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने सोनिका की याचिका को खारिज करते हुए कहा, "महासंघ को पिछले प्रदर्शन के आधार पर नहीं बल्कि मौजूदा अच्छे प्रदर्शन के आधार पर टीम का चयन करने का पूरा अधिकार है।"
इस संबंध में कुश्ती महासंघ द्वारा दायर दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने साफ कर दिया कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए टीम के चयन को लेकर महासंघ के रुख में किसी प्रकार का पक्षपात या मनमानापन नहीं दिखा है।
सोनिका ने दो महीने बाद राष्ट्रीय राजधानी में होने जा रहे राष्ट्रमंडल खेलों के लिए महिला पहलवानों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
सोनिका ने अपनी याचिका में कहा था कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए कुश्ती महासंघ की चयन प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं है। सोनिका की याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार, भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय कुश्ती महासंघ को सोमवार तक जवाब देने को कहा था।
दिल्ली निवासी 26 वर्षीया सोनिका ने अपनी याचिका में कहा था, "राष्ट्रमंडल खेलों के वास्ते लिए गए ट्रायल न्यायसंगत नहीं हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता के साथ चयन को लेकर न्याय नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता को अपनी काबिलियत साबित करने का मौका नहीं दिया गया, जबकि उसमें किसी प्रकार का दोष नहीं है। याचिकाकर्ता एक काबिल खिलाड़ी है और उसे राष्ट्रमंडल खेलों के लिए टीम में चयन हेतु अपनी काबिलियत साबित करने का पूरा मौका मिलना चाहिए।"
सोनिका ने आरोप लगाया था कि औसत प्रदर्शन के बावजूद चयन समिति के लोग कुछ पहलवानों का पक्ष ले रहे हैं। सोनिका के मुताबिक ऐसे लोगों का पक्ष लिया जा रहा है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी आज तक कोई पदक नहीं जीता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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