FIFA World Cup 2018: रंग की चर्चा से परेशान हो जाते हैं 'ब्लैक कोच'
नई दिल्ली। रूस में फीफा वर्ल्ड कप चल रहा है। दुनिया के सबसे बड़े वर्ल्ड कप का क्रेज फैंस के सिर चढ़कर बोल रहा है। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी फीफा वर्ल्ड कप विवादों से परे नहीं रहा है। नस्लीय टिप्पणी यहां आमबात हो गई है। दरअसल सेनेगल के कोच और पूर्व में इस टीम के कप्तान रहे एलियो सीसे इस वर्ल्ड में सबसे युवा कोच हैं और वह इस विश्व कप में इकलौते ब्लैक कोच हैं।
सेनेगल की टीम का पहला मुकाबला पोलैंड की टीम के साथ है। हालांकि इस मैच से पहले मॉस्को के स्पार्टक स्टेडियम में 41 वर्षीय सिसे से जब यह पूछा गया, कि क्या उन्होंने यहां किसी तरह का भेदभाव महसूस किया है क्योंकि यहां हिस्सा ले रही टीमों में वह एकमात्र ब्लैक कोच हैं। इसका जवाब देने से पहले सिसे यह सवाल सुनकर थोड़ा मुस्कुराते हैं और फिर सिसे इस सवाल का जवाब देते हैं।
सिसे कहते हैं, 'यह सच है कि यहां रूस में हिस्सा ले रहीं 32 टीमों में सिर्फ मैं ही एकमात्र ब्लैक कोच हूं। लेकिन ब्लैक कोच की बहस मुझे परेशान करती है। फुटबॉल दुनिया का खेल है, जहां त्वचा का रंग बहुत कम मायने रखता है। यह देखकर अच्छा लगता है कि एक ब्लैक कोच वर्ल्ड कप मैच के दौरान टैक्नीकल एरिया में चलता हुआ दिखता है।'
सिसे के मुताबिक, 'फुटबॉल को त्वचा का रंग नहीं चाहिए। यह खेल स्किन के कलर से नहीं खेला जाता है और स्किन के रंग का इस खेल में कोई स्थान नहीं है। मैं अफ्रीका में नई पीढ़ी के कोचों का प्रतिनिधत्व कर रहा हूं। हमारे पास पहचान है और आज जिस पोजिशन में हम हैं हम उसके लिए पूरी तरह हकदार हैं।'
आपको बता दें कि सेनेगल के कोच सिसे 2002 वर्ल्ड कप में भी सेनेगल टीम का हिस्सा थे, इस टीम ने 1998 की चैंपियन फ्रांस को अपने पहले ही मुकाबले में हराकर इतिहास रचते हुए क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। हालांकि उनकी योग्यता की कहानी बेहद दिलचस्प है - सेनेगल ग्रुप डी में दक्षिण अफ्रीका से हार गई लेकिन फीफा ने उस फैसले को पलट दिया था। दरअसल उस मैच में रेफरी जोसेफ लैम्टेई को मैच फिक्सिंग का दोषी पाया गया था। जिसके बाद फीफा ने रिप्ले का आदेश दिया और सेनेगल ने नवंबर 2017 में अफ्रीका को 2-0 हराकर अपना रूस का टिकट कटाया था।
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