'बड़ा परिवार नहीं होता सुखी' किताब में लिखी इस बात पर भड़के सहवाग, कही ये बड़ी बात
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज रहे वीरेंद्र सहवाग जब खेल के मैदान में उतरते थे तो उनका गुस्सा गेंदों पर उतरता था। जब वो अपनी लय में बल्लेबाजी करते थे तो दुनिया का बड़े से बड़ा गेंदबाज भी भयभीत नजर आता था, हालांकि क्रिकेट जगत से संन्यास लेने के बाद सहवाग ने अपनी एक और पहचान बनाई और वो है सोशल मीडिया पर उनका मजेदार अंदाज में अपनी बातों को रखने का सलीका। हालांकि वैसे तो उनकी हर पोस्ट सोशल मीडिया पर धमाल मचाती है लेकिन हालिया उनकी एक पोस्ट में सहवाग काफी गुस्से में नजर आ रहे हैं। दरअसल इस बार सहवाग ने छोटे बच्चों की किताबों के छपे कॉन्टेंट को लेकर एक ट्वीट किया है।
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हुआ कुछ यूंः
वीरेंद्र सहवाग ने प्राइमरी स्कूल की किताबों में छपे कॉन्टेंट पर एक ट्वीट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में अंग्रेजी की किताब में बड़े परिवार पर लिखी गई बातों पर गुस्सा जाहिर किया है। किताब में छात्रों को यह पढ़ाया जा रहा है कि एक बड़ा परिवार कभी सुखी जीवन नहीं बिताता। दरअसल इस किताब में बड़े परिवार की परिभाषा कुछ इस तरह से बताई गई है - 'बड़े परिवार में माता-पिता के अलावा दादा-दादी के अलावा कई बच्चे होते हैं। एक बड़ा परिवार कभी भी सुखी जीवन नहीं जीता।

भड़का सहवाग का गुस्साः
इस कंटेंट को पढ़ते ही सहवाग का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने लिखा, 'स्कूल की किताब में इस तरह की और भी बहुत सारी बकवास शामिल है। मतलब साफ है कि किताब में कॉन्टेंट के लिए जिम्मेदार अथॉरिटी कॉन्टेंट का निरीक्षण ठीक से नहीं कर रही है। सहवाग के इस ट्वीट पर हजारों लोगों ने अपनी सहमति जताई है और ऐसे कॉन्टेंट के लिए संबंधित विभाग के प्रति नाराजगी जाहिर की है।
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लोगों का भी भड़का गुस्साः
एक यूजर ने सहवाग के इस पोस्ट पर अपनी सहमति दर्ज कराते हुए लिखा कि वास्तव में जिसने भी इसे पास किया है उसने सही मायनो में होमवर्क नहीं किया है। वहीं इस यूजर ने इस बाबत प्रधानमंत्री कार्यालय और मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को इश पोस्ट में टैग करते हुए इस विषय की जानकारी दी।
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