जब टीम इंडिया को यह 'अटल' सलाह देकर वाजपेयी ने पाकिस्तान को दी थी सियासी मात!
नई दिल्ली। राजनीति संभाव्य की कला है, कोई राजनीतिक दल हो या देश, अपने विरोधी को सियासी मात देने के लिए कई स्तर पर प्रयास करता है और तरह-तरह के हथकंडे भी अपनाता है। भारत की राजनीति की अगर बात करें तो उसका रिश्ता हमेशा से पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ अच्छा नहीं रहा है। दोनों देशों में रिश्तों की बुनियाद को मजबूत करने के लिए कई बार संवाद और करार का सहारा लिया गया लेकिन ये समझौते सियासी किताबों में तो सुनहरे अक्षरों में गढ़ गए लेकिन कभी दोनों देशों के दिलों में घर नहीं कर सके। हालांकि इन सारे द्विपक्षीय प्रयासों में एक ऐसा प्रयास है जो राजनीति जगत में हमेशा एक मिसाल के रूप में याद किया जाता रहेगा। दरअसल ये बात उस वक्त की है जब भारत के प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी हुआ करते थे। पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने को लेकर वाजपेयी ने जो भी अटल प्रयास किए हैं वो विश्व स्तर पर सराहना का पात्र भी साबित हुए लेकिन वाजपेयी ने एक बार अपने कूटनीतिज्ञ अंदाज में खेल का सहारा लेते हुए पाकिस्तान को सियासी पटखनी दी थी।

क्रिकेट के बल्ले पर लिखा था 'सियासी' जीत का संदेशः
ये बात उस वक्त की है जब भारत और पाकिस्तान दोनों के बीच शांति वार्ता शुरू हुई थी और ऐसे में दोनों देशों के बीच रिश्ते को सुधारने के लिए अटल ने क्रिकेट मुकाबले का सहारा लिया था। दरअसल उस वक्त 2004 में पांच वनडे और तीन टेस्ट मैचों की ऐतिहासिक सीरीज खेलने पाकिस्तान जा रही सौरव गांगुली एंड कंपनी को अटल बिहारी वाजपेयी ने बुलाया और उन्हें एक बल्ला दिया, उस बल्ले लिखा था कि खेल ही नहीं, दिल भी जीतिए, शुभकामनाएं।

हुआ था विरोध लेकिन भारत ने किया था धमालः
बता दें कि इस सीरीज को लेकर दोनों ही देशों में काफी बवाल हुआ था। वहीं कड़ी सुरक्षा के बीच भारत की टीम पाकिस्तान पहुंची थी। वहीं भारत ने 11 मार्च 2004 से अप्रैल 2004 में हुई सीरीज में 3-2 से वनडे सीरीज और 2-1 से टेस्ट सीरीज जीती थी। वहीं इस सीरीज में भारतीय क्रिकेट टीम ने कई रिकॉर्ड और कई मिसालें भी स्थापित की जो क्रिकेट जगत में हमेशा दोहराए जाते रहेंगे।

भारत को मिला था मुल्तान का सुल्तानः
ये वही दौरा था जब भारत को इस सीरीज में जीत के साथ-साथ एक विस्फोटक बल्लेबाज सहवाग के रूप में मिला था। टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला मुल्तान में हुआ था, जहां पहले टेस्ट मैच में सहवाग ने 309 रन की पारी खेली थी, जिसके बाद सहवाग को मुल्तान का सुल्तान नाम से जाने जाना लगा। वहीं भारत की तरफ से कुंबले ने गेंदबाजी करते हुए सर्वाधिक 15 विकेट लिए थे। गौरतलब हो कि खिलाड़ियों को इस तरह से प्रोत्साहित करने और विरोधी को सियासी मात देने का अटल विहारी वाजपेयी का ये तरीका राजनीति जगत में हमेशा ही अनुकरणीय बना रहेगा।
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