मैच फिक्सिंग : 'स्पॉट फिक्सिंग' का शिकार हुआ लॉर्ड्स टेस्ट (राउंडअप)
पुलिस ने कहा कि माजीद ने पाकिस्तानी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर और मोहम्मद आसिफ के साथ नो-बॉल डालने को लेकर फिक्सिंग की है। दूसरे शब्दों में इसे स्पॉट फिक्सिंग कहा जाता है।
ब्रिटेन के समाचार पत्र 'द न्यूज ऑफ द वर्ल्ड' द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में माजीद ने समाचार पत्र से 150,000 पाउंड लिए और पहचान छुपाकर उससे मिलने वाले पत्र के संवाददाता से वादा किया कि पाकिस्तानी तेज गेंदबाज निर्धारित समय पर लार्ड्स टेस्ट में नो-बॉल फेंकेंगे।
समाचार पत्र ने इस स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो स्कॉटलैंड यार्ड को मुहैया कराया है। स्कॉटलैंड यार्ड ने इसी के आधार पर अपनी जांच शुरू कर दी है। पाकिस्तानी टीम के प्रबंधक यावर सईद ने इस बात की पुष्टि की है। सईद ने कहा कि स्कॉटलैंड यार्ड के अधिकारियों ने इस संबंध में उनसे पूछताछ की है।
स्कॉटलैंड यार्ड के अधिकारियों ने इन आरोपों की जांच के तहत उस होटल का भी दौरा किया, जहां पाक टीम ठहरी हुई है। इस दौरान अधिकारियों ने पाकिस्तानी टीम के कप्तान सलमान बट्ट, आसिफ, आमिर और विकेटकीपर बल्लेबाज कामरान अकमल से पूछताछ की।
पाकिस्तान के समाचार चैनल 'जियो टीवी' ने इस संबंध में सईद के हवाले से लिखा है, "स्कॉटलैंड यार्ड के अधिकारियों ने बट्ट, आसिफ, आमिर और अकमल से पूछताछ करने के अलावा मुझसे भी पूछताछ की। हम इस मामले में पुलिस के साथ पूरा सहयोग करेंगे।"
सईद ने हालांकि पुलिस द्वारा खिलाड़ियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप को खंगाले जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट का खंडन किया। साथ ही उन्होंने कहा कि अधिकारियों को खिलाड़ियों को कमरे से कोई रकम नहीं मिली।
सईद ने कहा, "यह सही नहीं है। हम इस संबंध में लंदन स्थित हमारे उच्चयोग के साथ संपर्क में हैं। साथ ही साथ हम पुलिस के साथ सहयोग कर रहे हैं।"
आमिर और आसिफ ने मैच के दौरान गुरुवार और शुक्रवार को लगातार तीन-तीन नो बॉल फेंकी थी। इसके बाद ही माजीद को गिरफ्तार किया गया। स्कॉटलैंड यार्ड के एक प्रवक्ता के मुताबिक, "न्यूज ऑफ द वर्ल्ड से मिली जानकारी के बाद हमने आज 35 वर्षीय एक संदिग्ध मैच फिक्सर को गिरफ्तार किया है।"
इस बीच अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भी इस संबंध में अपना बयान जारी कर दिया है। आईसीसी ने बयान में कहा, "मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने आईसीसी, इंग्लैंड और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्डो को इस बात की जानकारी दी कि एक 35 वर्षीय व्यक्ति को मैच फिक्सिंग के संदेह में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक इस संबंध में उसने अपनी जांच आरंभ कर दी है और साथ ही वह चाहती है कि आईसीसी की भ्रष्टाचार निरोधी इकाई भी इसमें उसकी मदद करे।"
"इस बारे में अब तक किसी खिलाड़ी या अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। चूंकि यह जांच का मामला है, लिहाजा इस संबंध में पीसीबी, ईसीबी, आईसीसी या फिर फिर लॉर्ड्स टेस्ट का मेजबान मेरिलबोर्न क्रिकेट क्लब (एमसीसी) कोई बयान जारी नहीं करेगी।"
क्या होती है स्पॉट फिक्सिंग :
'स्पॉट फिक्सिंग' के तहत खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों को खेल के किसी खास सत्र के दौरान अथवा किसी खास पल के दौरान निर्धारित तरीके से व्यवहार करने के लिए रिश्वत दी जाती है।
आमेर और आसिफ का खास सत्र में नो-बॉल फेंकना ही स्पाट फिक्सिंग है। स्पॉट फिक्सिंग मैच फिक्सिंग से अलग होता है क्योंकि इसका मैच के परिणाम पर सीधा असर नहीं पड़ता। इसे दूसरी भाषा में 'माइक्रो फिक्सिंग' या 'फैंसी फिक्सिंग' भी कहा जाता है।
इसके अंतर्गत नो-बाल फेंकने के अलावा कौन टॉस जीतेगा, कौन सा अंपायर विकेट के किस छोर पर खड़ा होगा, कितने खिलाड़ी चश्मा लगाएंगे, कितनी बार विकेटकीपर गिल्ली गिराएगा, पहले बदलाव के रूप में किस गेंदबाज से गेंदबाजी कराई जाएगी और नई गेंद कब ली जाएगी जैसी बातों के लिए खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों को धन मुहैया कराया जाता है।
जाहिर तौर पर इससे मैच के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ता। स्पॉट फिक्सिंग के दौरान सटोरिए टीम की अंदरूनी खबरें जानने का प्रयास करते हैं। ये खबरें आमतौर पर ड्रेसिंग रूम से जुड़ी होती हैं, जहां की बातें बाहर नहीं आतीं।
इसके अंतर्गत पिच की हालत, टीम संयोजन, पहले बल्लेबाजी कौन करेगा, पारी की शुरुआत कौन करेगा, किसी खिलाड़ी के चोट की खबरें या उसके चोटिल होने से टीम पर पड़ने वाले असर से जुड़ी खबरें, किसी एक सत्र के दौरान टीम पर खेल का असर या उस विशेष सत्र के दौरान टीम की रणनीति सहित कई अन्य बातों के लिए खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों को रिश्वत देते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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